E20 फ्यूल को अनिवार्य हुए अभी एक पखवाड़ा भी नहीं हुआ है और E21 की (Petrol may soon have more ethanol) बात होने लगी है. केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट को वाहनों की सहनशीलता स्तर और मौजूदा मानकों के अनुरूप 20% से बढ़ाकर 21% किया जा सकता है.
E20 पेट्रोल से परेशान हैं? E21 फ्यूल के लिए भी कमर कस लीजिए
केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट (Petrol may soon have more ethanol) को वाहनों की सहनशीलता स्तर और मौजूदा मानकों के अनुरूप 20% से बढ़ाकर 21% किया जा सकता है. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) इथेनॉल मिश्रण 1% ऊपर-नीचे करने की अनुमति देता है, जिससे इथेनॉल ब्लैन्ड का स्तर प्रभावी रूप से 21% तक हो सकता है.


टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब भारत कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए बायो फ्यूल के अधिक उपयोग को बढ़ावा दे रहा है. बताते चलें कि 1 अप्रेल 2026 से देश में E20 फ्यूल अनिवार्य कर दिया गया है.
E20 से E21एक प्रश्न के उत्तर में, हेवी इंडस्ट्री के अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी ने कहा कि सरकार बायो फ्यूल के उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) इथेनॉल मिश्रण में 1% ऊपर-नीचे की अनुमति देता है, जिससे मिश्रण का स्तर प्रभावी रूप से 21% तक हो सकता है. उन्होंने कहा, "E20 पहले ही लागू हो चुका है, और लिमिट के भीतर थोड़ी वृद्धि संभव है."
हालांकि, इंडस्ट्री के एक्सपर्ट का मानना है कि उच्च मिश्रण अनुपात सभी वाहनों के लिए ठीक नहीं हो सकता है. अप्रैल 2023 के बाद बने वाहन तो E20 मानकों के हिसाब से डिज़ाइन किए गए हैं, लेकिन पुराने वाहनों को इस फ्यूल से सामंजस्य बिठाने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि देश में चलने वाली बहुत सी कारें 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए तैयार नहीं हैं, खास कर भारत के पुराने वाहन. ज्यादातर वाहनों के इंजन सिर्फ 10% ब्लेंडिंग के लिए ही बने हैं.
एथेनॉल ब्लेंड फ्यूल के इस्तेमाल पर वाहनों का माइलेज कम होने के बारे में मंत्रालय का कहना है कि रेगुलर पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम है जिससे माइलेज में मामूली कमी आती है. हालांकि, एफिशिएंसी के मामले में इस मामूली गिरावट को बेहतर इंजन ट्यूनिंग और E20-कम्प्लाएंट एलिमेंट के उपयोग के जरिये और भी कम किया जा सकता है.
ऐसे में इसका 21 फीसदी होना शायद और दिक्कत का सबब बन सकता है स्पेशली पुराने वाहनों के लिए. विशेषज्ञों का कहना है कि मिश्रण में और वृद्धि तभी अधिक प्रभावी होगी जब वाहन के इंजन विशेष रूप से उच्च इथेनॉल उपयोग के लिए डिज़ाइन किए जाएंगे. इस बीच, एथेनॉल उद्योग अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का हवाला देते हुए मिश्रण सीमा बढ़ाने के लिए दबाव बना रहा है. खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने हाल ही में कहा कि नवंबर में शुरू होने वाले अगले एथेनॉल आपूर्ति वर्ष से पहले इस संबंध में निर्णय की उम्मीद की जा सकती है.
कुरैशी फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFV) की बात भी कर रहे, जो 85% तक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चल सकते हैं. उन्होंने बताया कि ऐसे ईंधनों के अनुकूल दोपहिया और चारपहिया वाहन पहले से ही विकसित किए जा रहे हैं. देखते हैं क्या होता है.
वैसे एक बात जान लीजिए. अगर आपके पास पेट्रोल-CNG व्हीकल है तो गाड़ी को हफ्ते भर में कम से कम एक बार पेट्रोल पर जरूर चलाएं. ऐसा नहीं करने पर फ्यूल टैंक के पुर्जों में जंग लग सकता है. दरअसल, एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के लंबे समय तक इंजन में रहने से ये हवा से नमी सोखकर फ्यूल टैंक में अलग पानी की लेयर बना देता है. इसी से जंग लगने का डर होता है.
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