मॉडर्न कारें तमाम तरीके के एडवांस फीचर्स के साथ आती हैं और इसमें से एक है कनेक्टेड कार फीचर. ऐप बेस्ड ऐसा फीचर जिसकी मदद से कार को दूर से कंट्रोल किया जा सकता है. दूर खड़े होकर कार स्टार्ट की जा सकती है तो उसमें बैठने से पहले AC ऑन किया जा सकता है. बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से लेकर जीपीएस ट्रैकिंग जैसे कमाल फीचर इसका हिस्सा होते हैं. ये फीचर पढ़ने में जितने अच्छे लगते हैं, इस्तेमाल में उससे कहीं ज्यादा मजेदार हैं. लेकिन तभी तक, जब तक इनके लिए पैसा नहीं देना पड़ता. पैसा यानी सब्सक्रिप्शन आते ही सब बे-कार हो जा रहा है.
कार कनेक्ट ऐप से कन्नी क्यों काट रहे गाड़ी मालिक?
कार मालिक कनेक्टेड कार फीचर का इस्तेमाल करें इसलिए मारुति सुजुकी, हुंडई मोटर इंडिया, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी प्रमुख कंपनियां ग्राहकों से पैसे लेने से पहले एक से चार साल तक के लिए कनेक्टेड प्लेटफॉर्म की सुविधा मुफ्त देती हैं. मगर जब बात पैसे देकर सब्सक्रिप्शन लेने की आती है तो यूजर कनेक्टेड कार ऐप्स से कन्नी काट रहे.


भारत के कनेक्टेड-कार मार्केट में सॉफ़्टवेयर बेचना तो आसान है, लेकिन उससे पैसे कमाना मुश्किल. जैसे-जैसे नई गाड़ियों में इंटरनेट-इनेबल्ड फ़ीचर्स आम होते जा रहे हैं, कार बनाने वाली कंपनियों के लिए ग्राहकों को मुफ़्त सब्सक्रिप्शन खत्म होने के बाद भी कनेक्टेड सर्विसेज़ के लिए पैसे देते रहने के लिए मनाना बहुत मुश्किल हो रहा है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जब मुफ़्त सब्सक्रिप्शन खत्म हो जाते हैं, तो कुछ कंपनियों में रिन्यूअल रेट 20 फीसदी से भी कम हो जाते हैं.
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कारों में सॉफ्टवेयर लगाना कार कंपनियों का बड़ा दांव माना जाता है. इसे कारों का फ्यूचर भी माना जा रहा है. कार बनाने वाली कंपनियां टेलीमैटिक्स, क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म और डिजिटल सेवाओं पर खूब पैसा लगा रही हैं. कार मालिक इनका इस्तेमाल करें इसलिए मारुति सुजुकी, हुंडई मोटर इंडिया, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी प्रमुख कंपनियां ग्राहकों से पैसे लेने से पहले एक से चार साल तक के लिए कनेक्टेड प्लेटफॉर्म की सुविधा मुफ्त देती हैं. Jato Dynamics के रवि भाटिया के मुताबिक कनेक्टेड गाड़ियों का पहला चरण इंजीनियरिंग था, दूसरा चरण कस्टमर एंगेजमेंट है और तीसरा चरण मॉनेटाइज़ेशन है.

इंजीनियरिंग का काम तो तकरीबन पूरा हो चुका है. दुनिया में 35 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां आजकल कनेक्टेड फीचर्स के साथ सड़कों पर हैं, जिसमें से एक चौथाई इंडिया में दौड़ रही हैं. उदाहरण के लिए ह्युंदई Bluelink फीचर वाली 8 लाख से ज्यादा कारें इंडिया में चल रही हैं मगर जब बात पैसे देकर सब्सक्रिप्शन लेने की आती है तो पांच में से एक कस्टमर ही पाले में आता है.
क्या है कनेक्टेड कार फीचर?ह्युंदई Bluelink से समझते हैं. ब्लू लिंक को सबसे पहले 2019 में वेन्यू के साथ लॉन्च किया गया था. इन-बिल्ट कनेक्टेड कार प्लेटफॉर्म है, जो मालिकों को अपने वाहनों को दूर से मैनेज करने, निगरानी करने और उससे बतियाने तक की सुविधा देता है. इस सिस्टम को MyHyundai ऐप की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है. ब्लू लिंक को डिजिटल ड्राइवर कह सकते हैं जो पार्किंग में आपकी कार की लोकेशन से लेकर दुर्घटना की सूचना आपातकालीन सेवाओं को खुद से भेज सकता है. रिमोट इंजन स्टार्ट/स्टॉप, डोर लॉक/अनलॉक, लाइव ट्रैफ़िक, कम फ्यूल अलर्ट जैसे फीचर्स इस ऐप का हिस्सा हैं. मुफ़्त वाला टाइम पीरियड खत्म होने के बाद इसे 2000 से 5000 हजार रुपये साल के हिसाब से सबस्क्राइब किया जा सकता है.

कार हमेशा से एक हार्डवेयर प्रोडक्ट रहा है. गियर लगाने से लेकर एस्केलेटर पर पैर दबाने और म्यूजिक के लिए बटन की मुंडी घुमाने का सुख अलग ही है. पिछले कुछ सालों से सब डिजिटल और टच स्क्रीन हुआ तो लेकिन यूजर को इसमें कुछ खास मजा आया नहीं. युरोपियन देशों में तो फिर से सारे फीचर्स को मैकेनिकल करने की बात हो रही. ऐसे में कार चलाने के लिए ऐप किसी वीडियो गेम से ज्यादा लगता नहीं. मुफ़्त में मिलने पर भी कार मालिक इसे ज्यादा चलाते नहीं. ऐसे में पैसे देकर कनेक्ट होना उसे बे-कार लग रहा.
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