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'12 साल की थी जब सबकी नजरों में रोल मॉडल मेरे भाई ने मुझे गलत जगह छुआ था'

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इस पोस्ट को प्रियंका ट्रीज़ा मिल्टन ने अक्कड़-बक्कड़ के लिए लिखा था. हम इसे वेबसाइट की इजाज़त से ट्रांसलेट कर आपको पढ़ा रहे हैं.


मैं एक ईसाई परिवार से आने वाली लड़की हूं. मेरे पिता के अलावा घर में सभी लोग धार्मिक हैं. मैं बहुत समय पहले नास्तिक बन गई थी. और ऐसा मेरे जीवन के सबसे बुरे अनुभव की वजह से हुआ. जब मेरे जीवन की सभी चीजें बर्बाद हो गईं, मेरा हर चीज से विश्वास उठ गया. फिर चाहे वो ईश्वर हो, उम्मीद, भविष्य या लोग.

मैं अब 21 साल की हूं और उस अनुभव की बात कर रही हूं, जो मेरे साथ तब हुआ, जब मैं 12 साल की थी.

मैं बहुत बड़े परिवार से हूं. मेरे दादा (पिताजी) 7 भाइयों और 3 बहनों के साथ बड़े हुए. जब मैं 12 और मेरी बहन 8 साल के थे, हमारे मम्मी-पापा विदेश में थे और हमें बुआ के पास छोड़ गए. बुआ की 2 बेटियां थीं. जुड़वा. हमारा एक कजिन हमसे मिलने आया करता था. वो उस समय 18 साल का था.

ये तब शुरू हुआ, जब वो मुझे और मेरी बहन को स्कूल से लाने के लिए अक्सर तैयार हो जाता. वो दुपहिया से आता. मेरी बहन उसके आगे बैठती और मैं पीछे. वापस लौटते हुए वो मुझसे उसे कसकर पकड़कर बैठने को कहता. और हाथ पीछे करके अक्सर अपनी पीठ छुआ करता.

ये मुझे कई साल बाद महसूस हुआ कि वो अपनी पीठ नहीं छू रहा होता, बल्कि मेरे ब्रेस्ट दबा रहा होता था.

और धीरे-धीरे उसके हाथ इधर-उधर जाने लगे. वो मेरी जांघें छूने लगा. मुझे बुरा तो लगता, लेकिन मैं असमंजस में रहती कि जो हो रहा है, उसके खिलाफ बोलना सही है या नहीं. मुझे नहीं पता था क्या बोलना है. मैंने अपनी बुआ को ये सब बताया.

उन्होंने कहा, ‘उसके बारे में ऐसी बात मत कहो. वो बहुत अच्छा भाई है. पता है, वो पेंटेकोस्ट (ईस्टर के 40वें दिन मनाया जाने वाला त्यौहार) के दिन पैदा हुआ था. उसके बारे में झूठ मत कहो.’

उस दिन मैं समझ गई कि पूरे परिवार में कोई मेरी बात नहीं मानेगा, क्योंकि वो कजिन सब भाई-बहनों के लिए रोल मॉडल था. बाहर और सबके सामने वो एक अच्छा लड़का था, इस बारे में कोई दो राय नहीं है. लेकिन कोई नहीं जानता उसने लोगों से छिपकर मेरे साथ शारीरिक और मानसिक तौर पर क्या किया. मुझे मालूम ही नहीं था कि मेरा मोलेस्टेशन हुआ है. मुझे ये सोचने और महसूस करने में बहुत वक़्त लगा और इसके बारे में बात करने में और भी ज्यादा.

मैंने आखिरकार अपने दादा को इसके बारे में बताया. आश्चर्य की बात ये है कि उन्होंने भी मेरा विश्वास करने से मना कर दिया. मैं इस समय इतनी अकेली हो गई थी कि मुझे डिप्रेशन ने घेर लिया. और आज जब मैं ये लिख रही हूं, कहीं न कहीं ये उम्मीद साथ है कि एक दिन मेरे घर वाले मेरा विश्वास करेंगे. आज भी हर रात मैं रोते हुए सोती हूं.

इस बात को पूरे 9 साल हो गए हैं, जब मेरे ‘पवित्र भाई’ ने मुझे पहली बार बुरे ढंग से छुआ था और मैं आज भी उससे उबर नहीं पाई हूं.

इस वक़्त मुझे लग रहा है कि मुझे सच में भूलने की बीमारी होती, तो अच्छा होता. मुझे उम्मीद है मेरे दादा कभी तो मेरा विश्वास करेंगे. कोई भी सिर्फ मजाक के लिए लोगों से एेसी बातें नहीं करता है.

जब भी कोई बच्चा किसी बड़े से बताता है कि उसे गलत ढंग से छुआ गया है, कोई उसका विश्वास नहीं करता. और इस तरह उसके बारे में बहुत हिम्मत लगती है. यकीन मानिए.


 (इस लेख को प्रतीक्षा ने ट्रांसलेट किया है) 


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