अभिनव बिंद्रा के गोल्ड मेडल में राहुल द्रविड़ का ये रोल कम ही लोग जानते होंगे!
'दीवार के सहारे' जैक डेनियल पीकर भाई ने गोल्ड मेडल जीत लिया.

कमाल की बात है ना. हारना भी उतना ही जरूरी है जितना जीतना. और जाहिर है कि ये बात वही बोल सकता है, जिसे इन दोनों का अनुभव हो. और ऐसे अनुभवों वाले लोगों की लिस्ट में अभिनव बिंद्रा तो वॉक-इन कर ही सकते हैं ना भाई? तो इन भाईसाब ने वॉक-इन करते हुए ये बात बोली थी. और ऐसे ही चलते-चलते आज इनकी उम्र हो गई है ठीक चालीस साल.
दुनिया जानती है कि इन्होंने भारत के लिए ओलंपिक्स में पहला इंडिविजुअल गोल्ड मेडल जीता था. ये जीत इतनी बड़ी थी, कि इसके तमाम क़िस्से हैं. और आज इनके जन्मदिन पर हम ऐसे ही क़िस्सों में से दो आपको सुनाएंगे.
# द्रविड़ का सिंगल और मेडल पक्का!बात साल 2008 की है. बेजिंग ओलंपिक्स से क़रीबन सात महीने पहले की. इंडियन टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी. उनके खिलाफ एक T20I के साथ चार मैच की टेस्ट सीरीज़ खेलने. सीरीज़ का दूसरा मुकाबला सिडनी में हो रहा था. इस मैच में इंडियन वॉल द्रविड़ ने 18 रन बनाने के बाद 19वें रन के लिए 40 डॉट बॉल खेली थी.
उन्होंने गेंदबाजों से लेकर, दर्शकों तक… सबको खूब परेशान किया. और जब उनका 19वां रन आया, तो खुशी में दर्शकों ने द्रविड़ को स्टेंडिंग ओवेशन दे दिया. जिसको देखकर द्रविड़ ने भी अपना बल्ला हवा में लहरा दिया था. खैर, अब आप सोच रहे होंगे कि इस पारी का अभिनव से क्या कनेक्शन. तो कनेक्शन ये है कि इस पारी ने गोल्ड जीतने में अभिनव की मदद की थी. कैसे? वो ऐसे, कि अभिनव को शूटिंग टूर्नामेंट्स में पहला शॉट लेने में परेशानी हो रही थी.
वो नर्वस हो जाते थे, उनका हर्ट रेट बढ़ जाता था. वो बेताब हो जाते थे. और ऐसे में द्रविड़ की इस धैर्य भरी पारी ने उनकी मदद की थी. इन द पॉडकॉस्ट में द्रविड़ के साथ बात करते हुए अभिनव ने कहा था,
इसका जवाब देते हुए द्रविड़ ने अभिनव से कहा,
# जीत से पहले दो पेगफास्ट फॉरवर्ड करते हुए अब गोल्ड मेडल से पहले वाली रात पर आते है. अभिनव फाइनल से पहले बेचैन थे. वो अपने अंदर चल रहे इमोशंस से डील नहीं कर पा रहे थे, खुद को शांत नहीं रख पा रहे थे. ऐसे में उन्होंने अपने बैग से जैक डैनियल्स की दो मिनिएचर बोतल निकालीं और पी गए.
ये क़िस्सा इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बताते हुए अभिनव ने कहा,
# जीत के बाद भी डिप्रेशन होता है!गोल्ड मेडल. इंडिया का पहला इंडिविजुअल गोल्ड मेडल और अभिनव बिंद्रा. अभिनव इस मेडल के साथ और ज्यादा चमक गए थे. और जब आप स्पोर्ट्स का सबसे बड़ा मेडल जीत लेते हो, तो लगने भी लगता है कि अब तो ये बंदा टॉप पर होगा. लेकिन अभिनव के केस में ऐसा नहीं हुआ था.
मेडल के साथ उनका डिप्रेशन वाला दौर शुरू हो गया था. इस पर एक यूट्यूब इंटरव्यू में अभिनव ने कहा,
डिप्रेशन के लिए प्रोफेशनल हेल्प की मदद से अभिनव बिंद्रा ने यहां से वापसी की. और फिर इंडिया के लिए कई मेडल्स जीते. अभिनव को हमारी ओर से हैप्पी बर्थडे.
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