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सीट नहीं बदली होती तो इस अम्पायर को आतंकवादियों की गोली लग जाती

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स्टुअर्ट ब्रॉड की छह गेंदों पर युवराज के 6 छक्के. टी-20 विश्वकप में एमएस धोनी का ट्रॉफी उठाना. साल 2011 विश्वकप फाइनल पर 28 साल बाद कब्ज़ा. इन तमाम मैचों के साथ भारतीय टीम की पिछले दो दशकों की सबसे सुनहरी यादें जुड़ी हैं. इन तमाम मौकों पर टीम के साथ-साथ एक ऐसा ‘लकी मैस्कट’ भी चल रहा था. जो भारत के पिछले कई अहम पलों का हिस्सा रहा है.

हम बात कर रहे हैं लगातार पांच सालों तक अंपायर ऑफ़ द इयर का खिताब जीतने वाले साइमन टॉफेल की. साइमन इन दिनों अपनी किताब के लॉन्च के मौके पर भारत में हैं. किताब ‘फाइनडिंग द गेप्स’ के लॉन्च पर साइमन ने 1 मार्च 2009 को लाहौर में श्रीलंकाई टीम पर हुए आतंकवादी हमले का दर्दनाक किस्सा शेयर किया. उन्होंने बताया कि कैसे उस दौरे पर अपनी बस की सीट छोड़ने की वजह से उनकी जान बच पाई थी.

उन्होंने इस मौके पर हरभजन सिंह से बात की. और भज्जी ने उनसे सवाल पूछे.

साइमन ने उस दिल दहला देने वाली यात्रा का ज़िक्र किया. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक उन्होंने बताया कि वो सुपरस्टीशन में विश्वास रखते हैं. खेल के दौरान वो कई अंधविश्वास वाली चीज़ें भी करते थे.

उन्होंने कहा,
वो जब भी कभी ड्यूटी पर होते थे तो अपनी बस की सीट नहीं बदलते थे. लेकिन इस अंधविश्वास को छोड़ने से ही उनकी जान बची.

टॉफेल ने खुलासा किया, जिस बस पर आतंकवादियों ने हमला किया, उसमें वो और मैच के चौथे अंपायर अहसान रज़ा भी मौजूद थे. अकसर अपनी सीट नहीं बदलने वाले साइमन टॉफेल ने उस मैच में अपनी सीट बदलने का फैसला किया. अपनी जगह पर अहसान रज़ा को बैठाया और खुद उनकी सीट पर जा बैठे.

साइमन आगे बताते हैं,

उस दौरान बहुत सारी चीज़ें हो रही थी. जिस बस में हम सफर कर रहे थे, उस पर हमला हुआ. आतंकियों ने हमारे ड्राइवर को मार दिया. इसके बाद एक गोली आकर रज़ा के कंधे पर लगी और दूसरी रज़ा के पेट में लग गई. इसके बाद बस में डर का माहौल था और मैं पीटर मैनुअल्स का हाथ पकड़कर नीचे बैठ गया. मुझे अहसास हुआ कि अगर आज मैंने अपना अंधविश्वास नहीं छोड़ा होता तो वो गोली मुझे लगती.

इस घटना में दिग्गज कुमार संगाकारा समेत श्रीलंका के 6 खिलाड़ी घायल हुए थे. जिसके बाद श्रीलंका के कई खिलाड़ियों को मैदान पर वापसी करने में 4 महीने से एक साल का वक्त भी लगा. भज्जी ने टॉफेल से पूछा कि उन्होंने कैसे इस घटना के बाद वापसी की.

टॉफेल ने कहा,

इस घटना के बाद दो हफ्ते अपने परिवार के साथ रहने के बाद मैं न्यूज़ीलैंड चला गया. जहां पर लोगों ने बार-बार मुझसे उस घटना के बारे में पूछा. आखिर में मैंने इस घटना को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने का फैसला किया.

टॉफेल ने आगे बताया. इसके बाद सिडनी जाते वक्त एक फ्लाइट में इस घटना के ज़ख्म फिर से ताज़ा हो गए और वो फ्लाइट में ही सिसक-सिसक कर रोने लगे.

साइमन ने बताया कि

फ्लाइट में अपनी बिज़नेस क्लास सीट पर बैठे थे. तभी एक अटेंडेंट वहां आई और साइमन को सपोर्ट ऑफर किया. जिसके बाद साइमन फिर से 2009 के उस दर्दनाक हादसे की यादों में चले गए और तकिये से अपना चेहरा ढककर रोने लगे.

साइमन टॉफेल का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 14 साल लंबा करियर है. जिसमें उन्होंने 74 टेस्ट, 174 वनडे और 34 टी-20 में अंपायरिंग की है. ऐसे में साइमन की इस किताब में कई और मज़ेदार किस्से और राज़ खुलना तय है.

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