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जमीन-जायदाद के केस अब जल्दी निपट सकेंगे, सरकार ने किया है ऐसा इंतजाम

अपने देश में जमीन-जायदाद को लेकर किस तरह के झगड़े फसाद और फ्रॉड होते हैं, ये किसी के छिपा नहीं है. कई बार केस अदालत तक चले जाते हैं और लंबे समय तक लटके रहते हैं. ऐसे में बड़े प्रोजेक्ट भी लटक जाते हैं. ऐसे ही जमीनी विवादों को पारदर्शिता से हल करने और समयबद्ध तरीके से निपटाने की दिशा में एक अहम कोशिश सरकार की ओर से शुरु की गई है. केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन को नेशनल ज्युडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) से जोड़ा जाएगा.

जमीन के केस सबसे ज्यादा डिले

हमारे देश में लाखों केस पेंडिंग रहना एक पुराना और बड़ा मुद्दा है. जजों की कमी. स्टाफ का अभाव भी इसकी कुछ वजहें बताई जाती हैं. लोकसभा में पेश किए गए डेटा के मुताबिक, 31 जनवरी 2019 तक कुल 42 लाख केस अलग-अलग हाईकोर्ट्स में पेंडिंग थे. सुप्रीम कोर्ट में 57,000 मामले फैसले के इंतजार में हैं.

डेटा बताता है कि ज़मीन से जुड़े केस फाइनल होने में सबसे ज़्यादा समय लेते हैं. अक्सर कहा जाता है कि जमीन का केस एक बार शुरु हो जाए तो दादा से लेकर पोते तक सभी लड़ते रहते हैं. जुलाई 2019 के  नेशनल ज्युडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) डेटा के मुताबिक, ज़मीन से जुड़े महज 14.66 फीसदी केसों का एक साल में निपटारा हुआ. 18.14 फीसदी केसों को निपटने में एक से तीन साल लग गए. 27.21 फीसदी केसों में फैसला आने में पांच से दस साल का वक्त लगा. और 24.51 फीसदी केसों के निपटारे में 10 साल से भी ज्यादा समय लगा.

नेशनल ज्युडीशियल डेटा ग्रिड क्या है?

18 सितंबर, 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ज्युडिशियल डेटा ग्रिड की शुरुआत की थी. ई-कोर्ट सिस्टम का हिस्सा है. ये बेसिकली एक पोर्टल है. इसका मकसद न्यायालयों में लंबित मामलों को ट्रैक करना है ताकि प्राथमिकता के आधार पर पुराने केसों को जल्द से जल्द निपटाया जा सके. यह जस्टिस डिलीवरी सिस्टम में पारदर्शिता लाने का एक उपाय कहा जाता है. NJDG एक मॉनीटरिंग टूल की तरह काम करता है. इस पोर्टल का ऐड्रेस है njdg.ecourts.gov.in

एक और मकसद है इसका

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन को नेशनल ज्युडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) से जोड़ने के पीछे एक और मकसद बताया जा रहा है. वो है, ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार. ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस मतलब, देश में व्यापार करने की सहूलियत का पैमाना. साल 2020 में वर्ल्ड बैंक की ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस लिस्ट में भारत का 63वां नंबर रहा. 2016 में 190 देशों की लिस्ट में भारत 130वें पायदान पर था. मतलब स्थिति काफी सुधरी है. इसे और भी बेहतर बनाने की कोशिश में सरकार जुटी है.


विडियो: तब्लीगी जमात पर मीडिया कवरेज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

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