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इटली के दो नौसैनिकों ने 2012 में दो मछुआरों की हत्या की थी, अब कोर्ट ने फैसला सुनाया है

इटली के दो नौसैनिकों पर साल 2012 में केरल में दो मछुआरों की हत्या का आरोप लगा था. इस मामले की सुनवाई इंटरनेशनल कोर्ट में चल रही थी. अब भारत ने ये केस जीत लिया है. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत ने इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल में इतालवी नौसैनिकों का मुकदमा जीत लिया है. ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुसार, दो इतालवी नौसैनिकों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए पकड़ा गया था. इटली ने संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन ऑन द सी ऑफ सी (UNCLOS) के तहत भारत की नेविगेशन की स्वतंत्रता का उल्लंघन किया. ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत इस नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा पाने का हकदार है.

हेग  में चल रही थी सुनवाई

हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (पीसीए) में इतालवी मरीन मामलों की सुनवाई चल रही थी. हालांकि इस मामले में अंतिम सुनवाई पिछले साल जुलाई में पूरी हो गई थी. आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल का गठन UN Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) के तहत 26 जून 2015 को किया गया था. यह 15 फरवरी, 2012 की मछुआरों पर गोली चलाने की घटना के संबंध में इटली के अनुरोध पर आधारित था. इटली के जहाज एनरिका लेक्सी पर सवार नौसैनिक मैसीमिलियानो लातूरे और सल्वातोरे गिरोने पर साल 2012 में केरल में दो भारतीय मछुरों की हत्या करने का आरोप है.

दोनों देशों का क्या कहना था?

भारत और इटली के बीच विवाद की प्रमुख वजह क्षेत्राधिकार को लेकर थी. भारत का तर्क था कि यह मामला उसके अधिकार क्षेत्र में आता है, क्योंकि मारे गए मछुआरे भारतीय थे. इसलिए इस मामले को भारतीय कानूनों के अनुसार डील किया जाना चाहिए. वहीं इटली का कहना था कि गोली भारत के जल क्षेत्र के बाहर चली है. मरीन इटली के झंडे लगे जहाज पर तैनात थे. इटली का तर्क था कि इसलिए यह उसके अधिकार क्षेत्र में आता है. इटली का ये भी कहना था कि वे अंतराराष्ट्रीय जल सीमा में थे और इटली के ऑयल टैंकर की सुरक्षा कर रहे थे.

क्या कहा कोर्ट ने?

सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने माना कि इतालवी सैन्य अधिकारियों की कार्रवाई से भारत की नेविगेशन की स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ. अधिकार क्षेत्र के सवाल के संबंध में ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत और इटली ने इस घटना पर “समवर्ती क्षेत्राधिकार” और मरीन के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही के लिए एक वैध कानूनी आधार था.

ट्रिब्यूनल ने मरीन को हिरासत में रखने के बदले मुआवजे के इटली के दावे को खारिज कर दिया. हालांकि यह पाया कि सरकारी अधिकारियों की तरह नौसिनकों को मिली छूट भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र के लिए अपवाद है, इसलिए उन्हें नौसैनिकों के खिलाफ फैसला करने से रोक दिया. इसके अलावा ट्रिब्यूनल ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि इटली ने इस मामले की अपराधिक जांच की बात कही थी. भारत के पक्ष में ट्रिब्यूनल ने फैसला किया वह मुआवजे का हकदार है. साथ ही कहा कि भारत को कितना मुआवजा देना है, इसके लिए दोनों पार्टियों को आपस में एक-दूसरे के साथ बातचीत करनी चाहिए.


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