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TMC सांसद ने 'अंकल जी' कहकर क्या गंभीर आरोप लगाए कि बंगाल के गवर्नर को सफाई देनी पड़ गई

पश्चिम बंगाल में चुनाव खत्म होने के बाद भी राज्यपाल बनाम TMC नेताओं की जंग जारी है. ताज़ा विवाद राज्यपाल जगदीप धनखड़ और सीएम ममता बनर्जी की पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा के बीच का है. महुआ ने गवर्नर जगदीप धनखड़ पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वो अपने पद का दुरुपयोग करते हुए राजभवन में परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं. राज्यपाल ने आरोपों को बेबुनियाद बताया. इसके बाद भी महुआ नहीं रुकीं, और अंकलजी कहकर धनखड़ पर झूठ बोलने का आरोप लगा दिया. आइए बताते हैं, पूरा मामला.

महुआ मोइत्रा ने क्या आरोप लगाए?

TMC की सांसद महुआ मोइत्रा ने 6 जून रविवार को राज्यपाल जगदीप धनखड़ को ‘अंकल जी’ कहते हुए आरोप लगाए. दावा किया कि राजभवन में जिन 5  व्यक्तियों को विशेष कार्याधिकारी (OSD) नियुक्त किया गया है, वो उनके परिवार के सदस्य और परिचित ही हैं.

महुआ ने अपने ट्विटर अकाउंट से बाकायदा एक लिस्ट शेयर की. इस लिस्ट में राज्यपाल के OSD अभ्युदय शेखावत, OSD समन्वय अखिल चौधरी, OSD प्रशासन रुचि दुबे, OSD प्रोटोकॉल प्रशांत दीक्षित, OSD आईटी कौस्तव एस. वलिकर और नव-नियुक्त OSD किशन धनखड़ के नाम हैं.

TMC सांसद ने इन नामों के साथ कथित तौर पर ये भी बताया कि इनका राज्यपाल से क्या रिश्ता है. महुआ ने आरोप लगाते हुए कहा कि

# अभ्युदय शेखावत, राज्यपाल धनखड़ के बहनोई के बेटे हैं.
# अखिल चौधरी, राज्यपाल धनखड़ से करीबी पारिवारिक रिश्ते रखते हैं.
# रुचि दुबे, पूर्व एडीसी मेजर गोरांग दीक्षित की पत्नी हैं.
# प्रशांत दीक्षित, पूर्व एडीसी मेजर गोरांग दीक्षित के भाई हैं.
# कौस्तव एस. वलिकर, धनखड़ के मौजूदा एडीसी जनार्दन राव के बहनोई हैं.
# किशन धनखड़, राज्यपाल धनखड़ के एक और करीबी रिश्तेदार हैं.

गवर्नर ने आरोपों को गलत बताया

महुआ मोइत्रा के इन गंभीर आरोपों के बाद गवर्नर साहब का क्या जवाब आया. ये भी जान लीजिए. राज्यपाल धनखड़ ने ट्वीट किया,

”महुआ मोइत्रा ने ट्वीट के माध्यम से मीडिया में कहा है कि राजभवन में रिश्तेदारों को पर्सनल स्टाफ के तौर पर OSD के रूप में नियुक्त किया गया है, जो पूरी तरह से गलत है.”

राज्यपाल ने आगे कहा,

”ये OSD तीन राज्यों से हैं, और चार अलग-अलग जातियों से संबंध रखते हैं. इनमें से कोई भी परिवार या फिर करीबी रिश्तेदारी का हिस्सा नहीं है. इनमें चार तो न मेरी जाति के हैं, और न ही मेरे राज्य से हैं.’’

लेकिन महुआ के हमले जारी रहे

राज्यपाल जगदीप धनखड़ के सफाई देने के बाद भी मामला ठंडा नहीं हुआ. महुआ ने फिर से ट्वीट किया और अंकलजी कहकह राज्यपाल से ये बताने को कहा कि ये सभी राजभवन में कैसे पहुंचे. महुआ ने लिखा,

”मैं अंकल जी (धनखड़) से सिर्फ ये पूछना चाहती हूं कि इन नियुक्तियों का अतीत क्या है, और ये सभी राजभवन में कैसे पहुंचे. अभी इसका जवाब दीजिए.

अंकल जी, इस बार बीजेपी की आईटी सेल भी आपको इससे नहीं बचा सकती. मुझे नहीं लगता कि उप-राष्ट्रपति भी आपके लिए कुछ करने वाले हैं.”

बीजेपी की ओर से बंगाल के महासचिव सांयतन घोष ने राज्यपाल का बचाव किया. उन्होंने महुआ के आरोपों को झूठ का पुलिंदा बताया. इस पर महुआ ने पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी उनका (धनखड़ का) बचाव क्यों कर रही है? वो राज्यपाल हैं या बीजेपी के कार्यकर्ता? महुआ ने राज्यपाल को चुनौती दी कि वह चाहें तो उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर सकते हैं.

OSD आखिर होते कौन हैं?

तृणमूल सासंद और गवर्नर साहब के बीच जिन OSD को लेकर विवाद है, आखिर वो होते कौन हैं और उनका काम क्या होता है? आइये समझते हैं.

OSD की फुल फॉर्म होती है ऑफ़िसर ऑन स्पेशल ड्यूटी. बड़े पदाधिकारियों को अपना काम निपटाने में मदद के लिए कुछ लोगों की जरूरत होती है. इसी के लिए खास अफसर रखे जाते हैं. राज्यों में ऐसा ही अधिकार गवर्नर के पास भी होता है. राज्यपाल के अलावा मुख्यमंत्री को भी OSD रखने का अधिकार होता है. इनके अलावा निगम के कमिश्नर जैसे अधिकारी भी अपनी सहायता के लिए OSD रख सकते हैं. राज्यों में राजभवन के लिहाज से देखें तो वहां स्पीच राइटर, पब्लिसिटी मैनेजर, प्रेस रिलेशन्स जैसे तमाम कामों के लिए OSD की नियुक्ति हो सकती है. ये OSD राज्यपाल के पर्सनल स्टाफ की कैटिगरी में आते हैं. गवर्नर किसी को भी OSD बनाने की सिफारिश कर सकते हैं. लेकिन OSD का चयन करते समय संबंधित विभाग की जानकारी और प्रशासकीय अनुभव होना चाहिए. लेकिन सिक्योरिटी से जुड़े OSD की नियुक्ति आमतौर पर केंद्र सरकार करती है. इनके लिए तय मानदंड होते हैं.

राज्यों के अलावा केंद्र में भी OSD की तैनाती होती है. कभी-कभी किसी को बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार करने के लिए भी OSD बनाया जाता है. इसके लिए रघुराम राजन और एस. रंगनाथन का उदाहरण लिया जा सकता है. रघुराम राजन को RBI गवर्नर बनाने से पहले केंद्रीय वित्त मंत्रालय में OSD नियुक्त किया गया था. ऐसा ही एस. रंगनाथन के केस में भी देखा गया था. उन्हें नियंत्रक और महालेखा परीक्षक बनाने से पहले उस वक्त के CAG ए.के. रॉय का OSD बनाया गया था.


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