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2 किलोमीटर लंबी ट्रेन दौड़ाकर इंडियन रेलवे ने रिकॉर्ड बना दिया है

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दुष्यंत कुमार की लिखी पंक्ति है कि तू किसी रेल सी गुजरती है, मैं किसी पुल सा थरथराता हूं. मशहूर कविता की इस पक्ति का दूसरा वर्जन मसान फिल्म में गाने की शक्ल में सामने आ चुका है. 90’s में पैदा हुए लोगों का इस गाने के साथ खास कनेक्शन है. जब भी कान में पड़ जाए तो दिन बन जाए. चूंकि गाने की इस पंक्ति से ही गाने का भाव बिल्कुल स्पष्ट है, इसीलिए इसमें जोड़-घटाव नहीं करते हैं.

यहां कवि ने माशूका को एक रेल का पर्याय माना है, जिनके गुज़रने से आशिक का दिल और दिमाग किसी पुल सा थरथरा जाता है. दुष्यंत कुमार ने पुराने दौर में इस पंक्ति को उस जमाने की रेल से जोड़कर लिखा है. अगर ये कविता आज की तारीख में लिखी जाती को कुछ इस तरह का होता- तू किसी रेल से गुज़रती है और मैं किसी पुल सा लगातार-बारंबार थरथराता हूं. क्योंकि रेलवे ने 2 किलोमीटर लंबा रेल चलाकर नया रिकॉर्ड बना दिया है. अमूमन रेल की लंबाई 700-750 मीटर की होती है, लेकिन 2 किलोमीटर की रेल चलने के बाद अगर ये पुल से गुज़रेगी तो सोचिए बेचारा कितनी देर तक थरथराएगा.

वैसे, भूमिका ज्यादा हो गई अब सीधा खबर पर आते हैं. साउथ-ईस्ट सेंट्रल रेलवे ने 2 किलोमीटर लंबा रेल चलाकर रिकॉर्ड बनाया है. इस रेल में एक नहीं 2 नहीं बल्कि 3 मालगाड़ी एक साथ जोड़े गए थे. रेलवे ने इस रेल को एनाकोंडा नाम दिया. जिस भी स्टेशन से भी ये रेल गुजरी वहां खड़े यात्री और लोग बस देखते रह गए. क्योंकि उनके सामने से चल रही रेल खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी.

ये दरअसल भारतीय रेल का नए टाइप का प्रयोग था. जिसमें 3 मालगाड़ी को जोड़कर चलाया गया. 2 किलोमीटर लंबी मालगाड़ी में 178 डिब्बे थे जो कि एक ही ड्राइवर चला रहा था. वहीं मालगाड़ी में ड्राइवर के साथ एक सहायक और एक गार्ड था. जबकि इससे पहले जब भी 3 मालगाड़ी जोड़कर चलाए गए तब तीनों मालगाडी पर तीन अलग-अलग लोग तैनात किए गए थे. इस ट्रेन ने 27 मई को भिलाई से कोरबा तक का सफर तय किया.

इसके लिए रेलवे ने नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया, जिसे लोको ट्राल या फिर DPCS कहते हैं. इसके जरिए बीच के दोनों इंजन को सेंसर के ज़रिए से कंट्रोल किया गया. ये अपने आप में पहला प्रयोग था. चूंकि ये एक तरह का ट्रायल था इसीलिए सुरक्षा को देखते हुए इसे खाली चलाया गया.

इसे चलाने से पहले हर एक स्टेशन को इसकी सूचना दी गई थी. ताकि वह मालगाड़ी के गुजरते समय खास अलर्ट रहे. इतनी लंबी मालगाड़ी को स्टेशनों से सुरक्षित निकालना रेलवे के लिए चुनौती भरा था. लेकिन रेलवे की मेहनत से काम समय पर और ठीक से पूरा हुआ.

178 वैगन की इस मालगाड़ी ने भिलाई से कोरबा तक की दूरी तय की. भिलाई से शाम साढ़े 5 बजे निकलने के बाद ये देर रात कोरबा पहुंची. रेलवे की भाषा में इसे लॉन्ग हॉल ट्रेन कहते हैं. इस ट्रेन को चलाने का मकसद स्टाफ की बचत करना है. साथ ही साथ प्रयोग सफल होने के बाद रेलवे इस प्रणाली का इस्तेमाल खाली वैगन को लोडिंग प्वाइंट तक जल्दी पहुंचाने में इस्तेमाल करेगी.


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