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21 जून को दिखेगा साल का पहला सूर्यग्रहण, जानिए कहां-कहां दिखेगा 'रिंग ऑफ फायर'

साल 2020 का पहला सूर्यग्रहण 21 जून को दिखाई देगा. सीधी सी बात कि चंद्रमा, धरती और सूरज के बीच में आ जाएगा. नेहरू प्लेनेटेरियम का कहना है कि ये एनुलर सोलर एक्लिप्स (सूर्यग्रहण) है. मतलब चंद्रमा सूरज के बीचों-बीच आकर 70 फीसदी हिस्सा ढक लेगा. इसीलिए ऐसे सूर्यग्रहण को ‘रिंग ऑफ फायर’ कहते है. मतलब चंद्रमा के अगल-बगल से सूरज की रोशनी छनकर दिखेगी. अंगूठी जैसा आग का गोला बनेगा. 21 जून को धरती के नॉर्थ पोल पर सबसे लंबा दिन भी होता है. वैसे, इस दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी पड़ता है.

कहां-कहां, कितने बजे तक

देश के लगभग सभी हिस्सों में सूर्यग्रहण दिखेगा. इसके अलावा एशिया के कई दूसरे देशों, अफ्रीका, प्रशांत और हिंद महासागर, यूरोप के कुछ हिस्सों और ऑस्ट्रेलिया में भी दिखेगा. भारत में इसकी शुरुआत सुबह 10 बजे से होगी. चंद्रमा पहले सूरज के ऊपरी हिस्से को कवर करेगा. दिन में 11.30 बजे तक ये पूरी तरह दिखेगा और दोपहर डेढ़ बजे तक ढलान पर होगा.

नेहरू प्लेनेटेरियम के मुताबिक, सबसे पहले ये गुजरात के भुज में दिखेगा. सुबह 9.58 बजे. और असम के डिब्रूगढ़ में ढाई बजे के आस-पास खत्म होता हुआ दिखेगा. साथ ही ये अनूपगढ़, सूरतगढ़, सिरसा, जाखल, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, देहरादून, तपोवन और जोशीमठ जैसे इलाकों से दिखेगा. इसके बाद भारत में अगले 28 महीनों तक कोई सूर्यग्रहण नहीं दिखेगा. अगला सूर्यग्रहण भारत में 25 अक्टूबर, 2022 को दिखाई देगा. इससे पहले 26 दिसंबर, 2019 को भारत में सूर्यग्रहण दिखा था. 2020 का दूसरा सूर्यग्रहण दिसंबर महीने में पड़ेगा लेकिन वो भारत से नहीं, दुनिया के दूसरे हिस्सों से दिखेगा.

अगर सूरज की दूरी ज्यादा हुई तो कई बार चंद्रमा पूरी तरह सूरज को ढक लेता है. लेकिन इस बार चंद्रमा आंशिक तौर पर सूरज को ढकेगा. फोटो: NASA
अगर सूरज की दूरी ज्यादा हुई तो कई बार चंद्रमा पूरी तरह सूरज को ढक लेता है. लेकिन इस बार चंद्रमा आंशिक तौर पर सूरज को ढकेगा. फोटो: NASA

ऐसे देखें और इन फर्ज़ी बातों से दूर रहें

सूर्यग्रहण दूरबीन, स्पेशल गॉगल्स या किसी स्क्रीन (मोबाइल, शीशा) से देखना चाहिए. सीधे देखने पर आंखों के रेटिना पर असर पड़ता है. क्यों? इसके पीछे की पूरी साइंटिफिक बात जानने के लिएयहां क्लिक करें. लेकिन सूर्यग्रहण को लेकर तमाम तरह की फर्ज़ी बातें भी बताई जाती हैं. जैसे- इसका प्रेगनेंट महिलाओं पर असर पड़ता है, खाना नहीं बनाना चाहिए, ना ही खाना चाहिए. सोना नहीं चाहिए वगैरह-वगैरह. खड़े रहना चाहिए या बैठना, इस बारे में नहीं बताया गया है. कुल मिलाकर इस दौरान सिर्फ एक काम करना चाहिए. इन फर्ज़ी बातों से दूर रहना चाहिए.

क्या होता है सूर्यग्रहण?

धरती, सूरज के इर्द-गिर्द घूम रही है. चंद्रमा धरती के चक्कर लगा रहा है. सब सोलर सिस्टम का खेल है. होता ये है कि कई बार ये तीनों एक सीधी लाइन में आ जाते हैं. कई बार चंद्रमा सूरज और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूरज को ढक लेता है. सूरज की पूरी रोशनी धरती तक नहीं पहुंच पाती. बस यही है सूर्यग्रहण या सोलर एक्लिप्स.

तीन तरह के सूर्यग्रहण होते हैं. पहला, आंशिक सूर्य ग्रहण. इसमें चंद्रमा सूरज के कुछ हिस्से को ही ढक पाता है. दूसरा, पूर्ण सूर्यग्रहण. इसमें चंद्रमा पूरी तरह से सूरज को ढक देता है. तीसरा एनुलर सूर्यग्रहण. इसमें चंद्रमा सूरज के बीचों-बीच आ जाता है. लेकिन उसे पूरी तरह से ढकता नहीं है. एक चमकता हुआ गोला आस-पास से दिखता रहता है. यही वाला सूर्यग्रहण इस वक्त पड़ रहा है.


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