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शरद पवार ने अजित पवार की बगावत का जिम्मेदार कांग्रेस को क्यों बता दिया?

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महाराष्ट्र. महाविकास अगाड़ी के नेता के रूप में उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं. एक महीने से ज्यादा समय तक चला पॉलिटिकल ड्रामा लगभग खत्म हो चुका है. पर इस एक महीने में सब कुछ हुआ. तीन पार्टियों को सरकार बनाने का न्यौता दिया गया. सब फेल हुए तो राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. फिर जब शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस साथ आते दिखे तो रातों-रात देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. एनसीपी नेता अजित पवार के समर्थन से. लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाए. अंतत: सरकार गिर गई और फिर उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने. और अजित पवार की घर वापसी हो गई. लेकिन लोगों के मन में ढेर सारे सवाल हैं. ये सब हुआ कैसे? क्या एनसीपी शुरू से ही सरकार बनाना चाहती थी? अजित पवार के बीजेपी को समर्थन देने के बारे में शरद पवार को पता था? अजित पवार बागी क्यों हुए? और अब वापसी के बाद अब उनकी पार्टी और परिवार में क्या हैसियत है? सारे सवालों के जवाब दिए हैं एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने. इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में.

महाराष्ट्र के खेल में असली विजेता न शरद पवार को कहा जा रहा है और न ही उद्धव ठाकरे को.
महाराष्ट्र के खेल में असली विजेता न शरद पवार को कहा जा रहा है और न ही उद्धव ठाकरे को.

शरद से जब सवाल पूछा गया कि रिजल्ट आने के बाद जब बीजेपी-शिवसेना में खटपट दिखी, क्या तभी आप सरकार बनाने की सोचने लगे थे. तो शरद बोले –

जब रिजल्ट आया तो मैंने सार्वजनिक रुप से कहा कि हमें बहुमत नहीं मिला है. हम विपक्ष में बैठेंगे. अपने 52 साल के राजनीतिक जीवन में कई साल मैं सरकार में रहा और कई साल विपक्ष में. हमने यही तय किया कि हम विपक्ष के रूप में काम करेंगे. हमें इससे कोई दिक्कत नहीं. हम चाहते थे कि बीजेपी-शिवसेना को बहुमत मिला है तो वे सरकार बनाएं. हमारी शुभकामना है.
लेकिन दो हफ्ते बीत गए और सरकार नहीं बनी तो मुझे लगा कि कुछ तो गड़बड़ है. फिर मुझे पता चला कि दोनों के बीच ये अंडरस्टैंडिंग थी कि दोनों पार्टियां ढाई-ढाई साल सरकार चलाएंगी. पक्के तौर उन दोनों के बीच क्या तय हुआ था ये तो मुझे नहीं पता लेकिन जब बीजेपी लीडर्स का स्टेटमेंट आ गया कि ऐसा कोई कमिटमेंट नहीं था. तब मुझे लगा कि अब मुद्दा गंभीर हो गया है.
फिर मैंने शिवसेना लीडर्स का स्टेटमेंट सुना. कि हां हमारे बीच अंडरस्टैंडिंग थी. और बीजेपी ने इसका सम्मान नहीं किया. मैं शिवसेना नेताओं को बालासाहेब के समय से जानता हूं. वे एक बार जो ठान लेते हैं तो फिर पीछे नहीं हटते. 

3 दिन की सरकार में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री रहे देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार.
3 दिन की सरकार में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री रहे देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार.

जब शरद से अजित के विद्रोह के बारे में पूछा गया कि क्या आपको सब पहले से मालूम था. तो पवार ने कहा-

जब अजित ने फडणवीस के साथ जाकर शपथ ली तो मुझे झटका लगा. मैंने तत्काल अपने विधायकों से संपर्क किया. विधायकों ने मुझे निश्चिंत किया कि वे मेरे साथ हैं. अजित पवार के बीजेपी के साथ जाने में मेरी कोई भूमिका नहीं थी. अजित पवार ने शायद इसलिए बीजेपी के साथ जाने के लिए सोचा क्योंकि उन्हें लगा कि यह गठबंधन चल नहीं पाएगा. एक बार एनसीपी-कांग्रेस की मीटिंग चल रही थी तो नेताओं के बीच नोक-झोक हुई थी. मैं कुछ कह रहा था और कांग्रेस के नेता उसके ठीक उलट कह रहे थे. मेरी पार्टी के लोगों को ये ठीक नहीं लगा. प्रफुल्ल पटेल ने मुझसे कहा कि आप चले जाइए. अजित भी उस मीटिंग में थे. उन्हें लगा होगा कि आज इस समय ये लोग मेरे(शरद पवार) साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं तो फिर साथ में सरकार कैसे चला पाएंगे? ये सरकार काम कैसे कर पाएगी? तो मुझे लगता है इसीलिए उन्होंने बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया.

अजित पवार ने अपने चाचा से बगावत की. वो अब वापस आ गए हैं. मगर इस वापसी की बड़ी कहानी है.
अजित पवार ने अपने चाचा से बगावत की. वो अब वापस आ गए हैं. मगर इस वापसी की बड़ी कहानी है.

एक सबसे बड़ा सवाल कि अजित का भविष्य क्या होगा. क्या वो डिप्टी सीएम बनेंगे. इस पर जवाब देते हुए शरद पवार ने कहा –

अजित परिवार में ही थे और परिवार में ही हैं. परिवार और पार्टी को हम अलग रखते हैं. अजित ने पार्टी के लिए बहुत मेहनत की है. वे कार्यकर्ताओं के साथ हमेशा खड़े रहे हैं. और यही कारण है कि कैडर उनका बहुत सम्मान करते हैं. उन्होंने एक गलती की. उसे मान लिया और अब जो हो गया सो हो गया. अजित पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं. महाराष्ट्र सरकार में उनके पद पर फैसला बाद में लिया जाएगा.


वीडियो: महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पूरी कहानी

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