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जिन राज्यों में कोरोना की वजह से पंचायत चुनाव लटके हैं, वहां अब क्या होगा?

कोविड-19 की वजह से काफी कुछ रुका हुआ है. चुनाव भी. देश में तमाम ग्राम पंचायत हैं, जिनका कार्यकाल इसी बीच पूरा हो रहा है. वो क्या करें? महाराष्ट्र में इसका अपना तरीका निकाला गया है. जिन पंचायतों का कार्यकाल इस कोविड क्राइसिस के बीच पूरा हो रहा है, वहां एक एडमिनिस्ट्रेटर यानी प्रशासक नियुक्त किया जाएगा. ये सलाह राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को दी है. प्रशासक तब तक ग्राम पंचायत की व्यवस्था संभालेंगे, जब तक कि चुनाव नहीं हो जाते.

अब 13 जुलाई को एक राज्य सरकार ने इसमें एक क्लॉज़ और जोड़ दिया. कि प्रशासक की नियुक्ति जिला परिषद सीईओ की तरफ से की जाएगी. सरकार की इसी बात से राज्य की तमाम पंचायतें नाखुश हैं और तमाम सरपंचों ने मिलकर कोर्ट में याचिका लगाई है.

आधी पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो रहा है

महाराष्ट्र में 28 हज़ार से ज़्यादा ग्राम पंचायतें हैं. इनमें से आधी यानी 14 हज़ार के करीब पंचायतों का कार्यकाल नवंबर तक खत्म होने वाला है. अखिल भारतीय सरपंच परिषद के महाराष्ट्र के सदस्यों का कहना है कि सरकार का ये फैसला अपनी राजनीति चमकाने के लिए है. वे जिला परिषद सीईओ द्वारा अपनी पसंद के प्रशासकों की गांवों में नियुक्ति कराना चाहती है.

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के सामने ये मामला है. लातूर जिले के एक गांव के सरपंच तो बॉम्बे हाईकोर्ट में दूसरी याचिका भी लगाने की तैयारी में हैं. इसमें वो इस प्रक्रिया के साथ-साथ ख़ास तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं. कह रहे हैं कि जिला परिषद सीईओ के ज़रिये नियुक्ति कराना ग़लत है.

सरपंच कह रहे हैं कि उन्होंने कोविड क्राइसिस के बीच फरवरी-मार्च से ही गांव में तमाम काम किए हैं. अपनी सेहत को जोखिम में डालकर बाहर से आ रहे लोगों को क्वारंटीन कराने, लोगों को जागरूक करने जैसे काम किए हैं. अब प्रशासक चुनने का अधिकार तो उन्हें मिलना ही चाहिए.

बाकी राज्य क्या कर रहे हैं?

राजस्थान और हरियाणा में भी तमाम पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. दोनों राज्यों ने अलग-अलग तरह से इस स्थिति को हैंडल किया.

राजस्थान में 3,859 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल जुलाई अंत तक पूरा हो रहा है. अगस्त में चुनाव होने थे, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग कोविड की वजह से तारीखों का ऐलान नहीं कर पाया. अब आयोग को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है कि चुनाव अक्टूबर तक कराए जा सकते हैं.

वहीं हरियाणा में सरकार ने विधेयक लाकर ये कानून बना दिया है कि पंचायतों का कार्यकाल उस दिन से शुरू माना जाएगा, जिस दिन गठन की अधिसूचना जारी हुई थी, न कि जिस तारीख से सरपंच बनता है. इससे हुआ क्या कि जिन पंचायतों का कार्यकाल इस जुलाई में खत्म हो रहा था, उनका कार्यकाल जनवरी-2021 तक बढ़ गया है.


अब तक ऐसा फैसला तो सिर्फ खाप पंचायत ही सुनाया करती थीं

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