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राजस्थान में महाराणा प्रताप को लेकर फिर से हंगामा क्यों हो रहा है?

राजस्थान में महाराणा प्रताप को लेकर एक बार फिर हंगामा है. कुछ साल पहले अकबर महान या प्रताप महान को लेकर काफी विवाद हुआ था. अब राजस्थान बोर्ड की 10वीं की इतिहास की किताब में गलत जानकारी लिखे जाने का मामला सामने आया है. इसमें महाराणा उदय सिंह, हल्दीघाटी युद्ध से जुड़े कई तथ्य गलत हैं. साथ ही 10वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब में महाराणा प्रताप के युद्धकौशल पर सवाल खड़े किए गए हैं. किताब के लेखक बोर्ड पर गलतियों की जिम्मेदारी डाली जा रही है. बोर्ड पर इतिहास से छेड़छाड़ के आरोप लग रहे हैं. मामला सामने आने के बाद से राजस्थान बोर्ड बचाव में लगा है.

खामियां जो सामने आई

# राजस्थान बोर्ड की 10वीं कक्षा की इतिहास की किताब है. किताब का नाम है- ‘राजस्थान का इतिहास और संस्कृति’. पहला पाठ राजपूत वंशों पर है. इसमें महाराणा प्रताप के पिता उदयसिंह के बारे में गलत जानकारी लिखे जाने का आरोप है. किताब के पेज नंबर 11 पर लिखा है कि उदय सिंह साल 1537 में राजा बने. तीन साल बाद मावली के युद्ध में उन्होंने बनवीर की हत्या कर मेवाड़ की गद्दी हासिल की. बता दें कि बनवीर ने बचपन में उदय सिंह को मारने की कोशिश की थी. लेकिन पन्ना धाय ने उदय सिंह को बचा लिया था.

# इतिहासकारों का कहना है कि बनवीर की हत्या का कोई प्रमाण इतिहास में नहीं मिलता. ‘महाराणा उदयसिंह’ किताब के लेखक नारायण लाल शर्मा ने बताया कि बनवीर तो मावली के युद्ध में भी नहीं था. वह पहले ही भाग गया था. इतिहास के प्रोफेसर और महाराणा प्रताप पर शोध करने वाले डॉ. चंद्रशेखर शर्मा भी इस बात से सहमत हैं. उनका कहना है कि बनवीर तो महाराष्ट्र भाग गया था. वहीं उसकी मौत हुई.

10वीं की किताब में महाराणा उदय सिंह के बारे में दी गई जानकारी.
10वीं की किताब में महाराणा उदय सिंह के बारे में दी गई जानकारी.

हल्दीघाटी का नाम हल्दीघाटी क्यों है?

# किताब में लिखा है कि हल्दीघाटी में हल्दिया रंग की मिट्टी तो है भी नहीं. यहां पर युद्ध में हल्दी चढ़ी कई नव विवाहित महिलाएं पुरुषों के वेश में लड़ी थीं और मर गई थीं. इसी वजह से इस जगह का नाम हल्दीघाटी पड़ा. यह दावा ‘अजूबा भारत का’ नाम की किताब के हवाले से किया गया है. यह किताब डॉ. महेंद्र भानावत ने लिखी है. हालांकि यह नहीं बताया गया कि कौनसे यु्द्ध में नवविवाहित महिलाएं यहां पर लड़ी थीं. डॉ. भानावत का दावा है कि प्रताप जब युद्ध क्षेत्र से बाहर चले गए थे तब उनकी पत्नी के नेतृत्व में महिलाएं हल्दीघाटी युद्ध में लड़ी थीं.

# इतिहासकारों का कहना है कि प्रताप और अकबर के युद्ध की बात है तो इसमें महिलाओं के लड़ने की कोई जानकारी कहीं नहीं है. मुगल दस्तावेजों में भी महिलाओं के लड़ने का जिक्र नहीं होता. डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि हल्दीघाटी नाम इस युद्ध के पहले से चला आ रहा है. यहां पर हल्दू के पेड़ काफी संख्या में थे. ऐसे में हल्दीघाटी नाम पड़ने की वजह यहां के जंगल और जमीन है. राजस्थान का इतिहास लिखने वाले ब्रिटिश इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने भी हल्दीघाटी नाम का कारण पीली मिट्टी वाली पहाड़ी को ही बताया है.

किताब में हल्दीघाटी की लड़ाई और हल्दीघाटी के बारे में दी गई जानकारी.
किताब में हल्दीघाटी की लड़ाई और हल्दीघाटी के बारे में दी गई जानकारी.

प्रताप में बताई धैर्य और संयम की कमी

# वहीं 10वीं की सामाजिक विज्ञान की ई-बुक में महाराणा प्रताप में धैर्य, संयम और योजना की कमी बताई गई है. यह बातें बच्चों को बांटी गई गई किताब में नहीं है. लेकिन बोर्ड की वेबसाइट पर मौजूद किताब में है. किताब के ‘संघर्षकालीन भारत’ पाठ में लिखा है कि सेनानायक में प्रतिकूल परिस्थितियों में जिस धैर्य, संयम और योजना की आवश्यकता होनी चाहिए, प्रताप में उसका अभाव था. आगे लिखा है कि हल्दीघाटी की लड़ाई में कुछ इतिहासकारों का मानना है कि कोई नतीजा नहीं निकला था. कुछ इतिहासकारों का मानना था कि प्रताप की हार हुई.

# साल 2017 में बीजेपी सरकार के समय हल्दीघाटी के युद्ध में प्रताप को विजयी बताया गया था. लेकिन साल 2019 में कांग्रेस सरकार आने के बाद किताब में बदलाव हुए. इसके तहत प्रताप को विजयी बताने वाला हिस्सा हटा लिया गया. साथ ही युद्ध में कौन जीता, इस पर कुछ नहीं लिखा गया.

महाराणा प्रताप में रणकौशल की कमी के बारे में 10वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब में लिखा गया है.
महाराणा प्रताप में रणकौशल की कमी के बारे में 10वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब में लिखा गया है.

बोर्ड ने कहा- गलती ठीक करेंगे

10वीं की किताब पर सवाल उठने के बाद राजस्थान शिक्षा बोर्ड ने जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही ई-बुक को हटाने की बात भी कही है. बोर्ड के चेयरमैन डीपी जारोली ने कहा कि जो भी गलती है, उसे ठीक किया जाएगा. किताब में जो बदलाव हुए हैं, वे संशोधन समिति ने किए हैं. यह समिति उनके चेयरमैन बनने से पहले से काम कर रही है. उन्होंने कहा,

मैंने फरवरी में बोर्ड चेयरमैन का पद संभाला. इसके बाद परीक्षाएं चल रही थीं और फिर लॉकडाउन हो गया. बोर्ड की वेबसाइट पर जो किताब है, उसे हटाया जाएगा. मैं खुद किताब की जांच करूंगा.

किताब के लेखक बोले- मेरा नाम हटा दो

वहीं किताब लिखने वाले डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने भी प्रताप में धैर्य की कमी बताए जाने पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि इस तरह की बातें उन्होंने नहीं लिखी. शर्मा ने कहा,

किताब में जो बातें मैंने नहीं लिखी, उनमें मेरा नाम लिखना गलत है. मैंने नहीं लिखा कि महाराणा प्रताप में सेनापति के लिए जरूरी गुण नहीं थे. मैंने तो उनकी वीरता के बारे में लिखा था. मैंने कहा था कि हल्दीघाटी की लड़ाई से अकबर का मकसद पूरा नहीं हुआ था. यह तो प्रताप की जीत थी. बाद में इस बात को हटा दिया गया. मुझे लगता है कि मेरी बात को ही हटा दिया गया है तो मेरा नाम भी किताब पर नहीं होना चाहिए.

स्कूली किताबों में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ पर मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार ने भी नाराजगी जाहिर की है उदयपुर के लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि महाराणा प्रताप स्वतंत्रता और स्वाभिमान के प्रतीक हैं. उन्होंने सबको एक सूत्र में बांधा था. पाठ्यक्रम में सही जानकारियां नहीं दी गईं तो बच्चे गौरवशाली इतिहास को कैसे जानेंगे?


Video: राजस्थान का वो सीएम जिसका सीधा संबंध महाराणा प्रताप से था

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