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ऑनलाइन क्लास जारी, पर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रफेसर सोना और जमीन बेचने को मजबूर क्यों?

हमें ये पता है कि कोरोना वायरस ने लोगों की जेब पर बहुत बुरा असर डाला है. मुंबई में कई इंजीनियरिंग कॉलेज के टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को लॉकडाउन के बीच सैलरी नहीं मिल रही. यहां तक कि कई प्रफेसर्स को घर का सोना बेचना पड़ा. कई जगह तो पिछले एक साल से सैलरी नहीं मिली है. हालांकि टीचर्स के संगठन का दावा है कि इन कॉलेजों के पास पर्याप्त पैसा है, क्योंकि फीस एडवांस में ली गई है.

मुंबई मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई यूनिवर्सिटी सीनेट मीटिंग के बाद बॉम्बे यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स यूनियन (BUCTU) ने ऐसे 48 इंजीनियरिंग कॉलेज के बारे में बताया है. 57 वर्षीय एक प्रफेसर ने बताया,

मैंने अपना इमरजेंसी फंड तोड़ा है. मेरी बेटी की शादी जून में थी. मुझे अपना सोना बेचना पड़ा. अब मैंने गांव की एक ज़मीन बेचने का फैसला किया है. अब तक इतनी देरी कभी नहीं होती थी. मेरी उम्र में दूसरी नौकरी भी नहीं मिलती. 

‘अगस्त तक की फीस ले रखी है’

मुंबई यूनिवर्सिटी सीनेट के सदस्य प्रफेसर चंद्रशेखर कुलकर्णी कहते हैं, ”कॉलेजों ने अगस्त 2020 तक की फीस ले रखी है. ऐसे में इतनी देरी की कोई वजह नहीं है.” कुलकर्णी के मुताबिक, एसी पाटिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, खारघर और राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RGIT) अंधेरी ने अपने शिक्षकों को लॉकडाउन के दौरान पैसे नहीं दिए. दूसरों ने भी दो से तीन महीने की सैलरी नहीं दी या सैलरी का कुछ हिस्सा दिया. BUCTU ने कहा कि स्थायी टीचर्स के अलावा कॉन्ट्रैक्ट वाले लोगों को भी सैलरी नहीं मिल रही.

फिर भी ऑनलाइन क्लास ले रहे प्रफेसर

मुंबई मिरर के मुताबिक, कुलकर्णी ने डायरेक्टरेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (DTE) को भी लिखा लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. एसी पाटिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में प्रफेसर को जून 2020 में पिछले साल मई, 2019 तक के सैलरी एरियर मिले. कुछ दिनों पहले जून, 2019 की सैलरी का कुछ हिस्सा मिला. एक प्रफेसर का कहना है कि इसके बाद हमें सैलरी नहीं मिली. कहा गया है कि एक टीचर का करीब 10 लाख रुपए बकाया है. एक प्रफेसर ने बताया कि पैसों की तंगी की वजह से प्रफेसर्स को उधार लेना पड़ रहा है. इसके बावजूद जुलाई से वो ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं.

कॉलेज क्या कह रहे हैं 

राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RGIT) के प्रिंसिपल डॉक्टर विजयकुमार एन पवार ने मुंबई मिरर को बताया कि SC, ST, OBC छात्रों का तीन करोड़ से ज्यादा का स्कॉलरशिप फंड सरकार की तरफ से रुका हुआ है. साथ ही उन्होंने कहा कि वित्तीय बोझ के चलते पिछले साल कॉलेज की 147 सीटें खाली रह गई थीं. एसी पाटिल कॉलेज और डायरेक्टरेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (DTE) की तरफ से मुंबई मिरर को कोई जवाब नहीं दिया गया.


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