कोवैक्सिन पर CDSCO ने 24 घंटों में अपना फैसला क्यों बदल दिया?
कई विशेषज्ञों ने अनुमति देने के तरीके पर ऐतराज़ जताया है.
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भारत बायोटेक की बनाई कोवैक्सीन को अमेरिका में मंजूरी मिलने का रास्ता क्या पूरी तरह बंद हो गया है, जान लीजिए. फाइल फोटो-PTI
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भारत बायोटेक के कोवैक्सिन को भारत में आपात इस्तेमाल की अनुमति मिल गई है. लेकिन अनुमति मिलने के बाद से ही विवाद इस टीके का पीछा नहीं छोड़ रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस अखबार में प्रभा राघवन की रिपोर्ट के मुताबिक कोवैक्सिन को अनुमति न देने पर 24 घंटों के भीतर Central Drugs Standard Control Organization माने CDSCO की सबजेक्ट एक्सपर्ट कमेटी SEC ने अपना निर्णय बदल लिया. Central Drugs Standard Control Organization केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन काम करता है और ये भारत में दवाओं और टीकों की गुणवत्ता को प्रमाणित करने वाली सर्वोच्च संस्था है. टीकों और दवाओं को भारत में इस्तेमाल की अनुमति देने वाले ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया इसी संस्था के विभागाध्यक्ष माने हेड ऑफ डिपार्टमेंट होते हैं.
प्रभा राघवन की रिपोर्ट में 1 और 2 जनवरी को हुई सबजेक्ट एक्सपर्ट कमेटी की बैठकों के मिनिट्स के आधार पर बताया गया है कि जब 1 जनवरी को SEC ने भारत बायोटेक के आवेदन का अध्ययन किया, तब समिति ने ये माना कि कोवैक्सिन में कोरोना वायरस से लड़ने की ताकत है. लेकिन भारत बायोटेक द्वारा आवेदन के साथ वैक्सीन के ट्रायल्स की जो जानकारी दी गई, उसे सीमित इस्तेमाल के लिए आपात अनुमति देने के लिए काफी नहीं माना गया. लेकिन एक ही दिन बाद माने 2 जनवरी को SEC की एक और बैठक हुई जिसमें कोवैक्सिन टीके के असर की उस जानकारी पर गौर किया गया जिसमें नॉन ह्यूमन प्राइमेट्स पर एक चैलेंज स्टडी हुई थी. नॉन ह्यूमन प्राइमेट्स का मतलब बंदर और लंगूर जैसे जानवरों से होता है. इंसान भी एक प्राइमेट है. लेकिन यहां बात इंसान को छोड़कर दूसरे प्राइमेट्स की हो रही है. इन नॉन ह्यूमन प्राइमेट्स पर हुए प्रयोग के आधार पर SEC ने कोवैक्सीन के सीमित इस्तेमाल के लिए आपात अनुमति की सिफारिश कर दी. अगले दिन माने 3 जनवरी को DCGI ने टीके के सीमित इस्तेमाल की आपात अनुमति दे भी दी. जबकि दो ही दिन पहले SEC कह रही थी कि भारत बायोटेक को ट्रायल के लिए तेज़ी से वॉलेंटियर जुटाने और टीके के असर पर अंतरिम नतीजे जुटाने के लिए कह रही थी, ताकि उसके आवेदन पर विचार किया जा सके.
आप ये जानिए कि SEC ने टीके की सिफारिश लोकहित में और तमाम सावधानियों के साथ क्लीनिकल ट्रायल मोड में की थी. भारत बायोटेक ने 2 जनवरी को और जानकारी भी दी, लेकिन इस जानकारी में क्या था, ये हम नहीं जानते.
सरकारी अनुमति का बचाव करने वाले कह रहे हैं कि इससे पहले इबोला और निपाह वायरस के मामले में भी टीके को इसी तरह आपात अनुमति दी थी. लेकिन टीकों की दुनिया में चोटी की शख्सीयत मानी जाने वाली प्रोफेसर गगनदीप कांग जैसे कई विशेषज्ञों ने अनुमति देने के इस तरीके पर ऐतराज़ जताया है. अब ये सवाल किया जा रहा है कि क्या भारत में भी टीके को उसी तरह अनुमति दे दी गई है, जैसे चीन और रूस में. इन दो देशों में टीकों को अनुमति मिली है, लेकिन चूंकि इनके असर से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, इन्हें पूरी दुनिया में निर्विवाद रूप से असरकारी नहीं माना जाता है. इन सारी बातों के सामने आने के बाद अब ये बहुत ज़रूरी हो गया है कि सरकार और भारत बायोटेक पहले देसी टीके को लेकर सारी बातें लोगों के सामने रखें, ताकि किसी भी तरह का संशय दूर हो.

