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पुुरी के शंकराचार्य ने क्यों कहा? 'अयोध्या नहीं जाएंगे, मेरे पद की भी मर्यादा है.'

जगन्नाथपुरी मठ के शंकराचार्य ने अयोध्या जाने से मना कर दिया है. शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह के एक अहम हिस्से पर ऐतराज जताया है.

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स्वामी जगन्नाथपुरी मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती (फोटोसोर्स- आजतक)
4 जनवरी 2024 (Updated: 15 जनवरी 2024, 13:14 IST)
Updated: 15 जनवरी 2024 13:14 IST
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अयोध्या (ayodhya) में 22 जनवरी को राम मंदिर में 'प्राण प्रतिष्ठा' (ram mandir pran pratishtha) समारोह होना है, मुख्य यजमान PM नरेंद्र मोदी (PM Modi) होंगे. वही रामलला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा (ramlala pran pratishtha) करेंगे. देश भर के कई संत और मठाधीश कार्यक्रम में शामिल होने अयोध्या पहुंच रहे हैं. लेकिन जगन्नाथपुरी मठ के शंकराचार्य ने अयोध्या जाने से मना कर दिया है. उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा ये भी आरोप लगाया कि ‘राम मंदिर पर राजनीति हो रही है, धर्म स्थलों को पर्यटन स्थल बनाया जा रहा है.’

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शंकराचार्य क्या-क्या बोले?

अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की तैयारियां जोरों से चल रही हैं. भव्य समारोह रखा गया है. यूपी सरकार और उसका प्रशासन पूरे दम-ख़म से इसकी तैयारियों में जुटे हैं. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से PM मोदी को प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में मुख्य यजमान के तौर पर आमंत्रित किया गया है. आम तौर पर मुख्य यजमान ही प्राण-प्रतिष्ठा करते हैं. यानी पूजा-अर्चना के साथ गर्भ गृह में मूर्ति को विराजमान करवाते हैं.

रतलाम में ओडिशा के जगन्नाथपुरी मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, ‘हिंदू जागरण सम्मेलन’ को संबोधित करने आए थे. इसी दौरान उनसे पत्रकारों ने सवाल किया. आजतक से जुड़े विजय मीणा की खबर के मुताबिक, उन्होंने कहा कि वह 22 जनवरी 2024 को होने वाले प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अयोध्या नहीं जाएंगे.

स्वामी निश्चलानंद ने कहा,

'मोदी जी (PM मोदी) लोकार्पण करेंगे, मूर्ति का स्पर्श करेंगे तो मैं वहां तालियां बजाकर जय-जयकार करूंगा क्या? मेरे पद की भी मर्यादा है. राम मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा शास्त्रों के अनुसार होनी चाहिए, ऐसे आयोजन में मैं क्यों जाऊं?'.

पत्रकारों ने उनसे राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से मिले निमंत्रण के बारे में पूछा. इस पर शंकराचार्य ने कहा,

'मुझे जो आमंत्रण मिला है उसमें लिखा है कि शंकराचार्य आना चाहें तो अपने साथ एक और व्यक्ति के साथ आ सकते हैं. इसके अलावा हमसे किसी तरह का अब तक संपर्क नहीं किया गया है, वो सौ व्यक्तियों के लिए कहते तो भी नहीं जाता'.

शंकराचार्य ने कहा कि ‘राम मंदिर पर जिस तरह की राजनीति हो रही है, वह नहीं होनी चाहिए. इस समय राजनीति में कुछ सही नहीं है.’ उन्होंने धर्म स्थलों पर बनाए जा रहे कॉरिडोर की भी आलोचना की.

'धर्म स्थलों को पर्यटन स्थल बनाया जा रहा है’

स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने ये भी कहा कि 'आज सभी प्रमुख धर्म स्थलों को पर्यटन स्थल बनाया जा रहा है. इस तरह इन्हें भोग-विलासता की चीजों से जोड़ा जा रहा है, जो ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि दुनिया में चाहे जिस भी धर्म के लोग हों, उन सभी के पूर्वज हिंदू थे. भगवद्कृपा से गैर हिंदू देशों में भी मेरे संदेश का प्रसारण होता है. '

बता दें कि निश्चलानंद सरस्वती पुरी के श्रीगोवर्धन पीठ के 145वें जगद्गुरु शंकराचार्य हैं. उनका जन्म 1943 में बिहार के मधुबनी जिले में हुआ था. वह दरभंगा के महाराजा के राज-पंडित के पुत्र हैं. 

वीडियो: राम मंदिर के कार्यक्रम में नहीं शामिल होंगे सनातन धर्म के ये सर्वोच्च धर्मगुरू, वजह भी बता दी

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