जब मौत के दो महीने बाद मुस्कुराने लगे थे बौद्ध भिक्षु
अनुयायियों ने तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर दी थीं.
Advertisement

फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
मूल रूप से कंबोडिया निवासी बौद्ध भिक्षु लुआंग फोर पियान की 16 नवंबर, 2017 को थाईलैंड की राजधानी बैंकाक के एक अस्पताल में बीमारी के बाद मृत्यु हो गई थी. पियान ने अपना अधिकांश समय लुपबरी के केंद्रीय थाई प्रांत में एक बौद्ध गुरु के रूप में बिताया और मृत्यु के बाद भी अंतिम संस्कार के लिए उनके शव को वहीं ले जाया गया था.
दो माह बीत जाने के बाद यानी जनवरी, 2018 के दूसरे पखवाड़े में जब उनके शव को स्वच्छ करने और नए कपड़े पहनाने के लिए ताबूत से बाहर निकाला गया तो उनके अनुयायी ये जानकार हतप्रभ हो गए कि उनका शरीर अब तक भी क्षय नहीं हुआ था और पियान अब भी मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहे थे.

मृत्यु के बाद उनका शव लुपबरी के केंद्रीय थाई प्रांत में स्थित एक बौद्ध मंदिर में रखा गया है
उनके अनुयायियों ने इस अविश्वसनीय पल की तस्वीरें लेकर सोशल मीडिया पर साझा कर दीं. मृत्यु के दो महीने बाद भी उनके शरीर की वही स्थिति थी जैसी किसी एक-दो दिन पहले ही मृत हुए व्यक्ति की होती है. पीन के इस शांत शरीर और मुस्कुराते हुए चेहरे को देखकर कहा जा रहा है कि उन्होंने 'मोक्ष' प्राप्त कर लिया था.

उनका शरीर ऐसा लग लगता है मानो एक-दो दिन ही हुए उनकी मृत्यु को
पीन के अनुयायी ने 100 दिन तक उनके लिए प्रार्थना जारी रखी और सौवें दिन उनका अंतिम संस्कार किया गया. मृत्यु के समय लुआंग फोर पियान की आयु 92 वर्ष की थी.

लुआंग फोर पियान की मृत्यु से पूर्व की एक फोटो
लल्लनटॉप में पढ़िए एक कविता रोज़:
‘मेरी मां मुझे अपने गर्भ में पालते हुए मज़दूरी करती थी, मैं तब से ही एक मज़दूर हूं’
बड़े लोग इसी काम के लिए बेदांता नाम के हस्पताल में जाते हैं
किन पहाड़ों से आ रहा है ये किस समन्दर को जा रहा है, ये वक़्त क्या है?
‘पंच बना बैठा है घर में फूट डालने वाला’
पाब्लो नेरुदा की कविता का अनुवाद: अगर तू मुझे भूल जाए
एक कविता रोज़: इसीलिए खड़ा रहा कि तुम मुझे पुकार लो
सुनो परम ! पैदल चलना, हाथ से लिखना और सादा पानी पीना…
Video देखें:
कुमार विश्वास के साथ खेल कहां हुआ:
दो माह बीत जाने के बाद यानी जनवरी, 2018 के दूसरे पखवाड़े में जब उनके शव को स्वच्छ करने और नए कपड़े पहनाने के लिए ताबूत से बाहर निकाला गया तो उनके अनुयायी ये जानकार हतप्रभ हो गए कि उनका शरीर अब तक भी क्षय नहीं हुआ था और पियान अब भी मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहे थे.

मृत्यु के बाद उनका शव लुपबरी के केंद्रीय थाई प्रांत में स्थित एक बौद्ध मंदिर में रखा गया है
उनके अनुयायियों ने इस अविश्वसनीय पल की तस्वीरें लेकर सोशल मीडिया पर साझा कर दीं. मृत्यु के दो महीने बाद भी उनके शरीर की वही स्थिति थी जैसी किसी एक-दो दिन पहले ही मृत हुए व्यक्ति की होती है. पीन के इस शांत शरीर और मुस्कुराते हुए चेहरे को देखकर कहा जा रहा है कि उन्होंने 'मोक्ष' प्राप्त कर लिया था.

उनका शरीर ऐसा लग लगता है मानो एक-दो दिन ही हुए उनकी मृत्यु को
पीन के अनुयायी ने 100 दिन तक उनके लिए प्रार्थना जारी रखी और सौवें दिन उनका अंतिम संस्कार किया गया. मृत्यु के समय लुआंग फोर पियान की आयु 92 वर्ष की थी.

लुआंग फोर पियान की मृत्यु से पूर्व की एक फोटो
लल्लनटॉप में पढ़िए एक कविता रोज़:
‘मेरी मां मुझे अपने गर्भ में पालते हुए मज़दूरी करती थी, मैं तब से ही एक मज़दूर हूं’
बड़े लोग इसी काम के लिए बेदांता नाम के हस्पताल में जाते हैं
किन पहाड़ों से आ रहा है ये किस समन्दर को जा रहा है, ये वक़्त क्या है?
‘पंच बना बैठा है घर में फूट डालने वाला’
पाब्लो नेरुदा की कविता का अनुवाद: अगर तू मुझे भूल जाए
एक कविता रोज़: इसीलिए खड़ा रहा कि तुम मुझे पुकार लो
सुनो परम ! पैदल चलना, हाथ से लिखना और सादा पानी पीना…
Video देखें:
कुमार विश्वास के साथ खेल कहां हुआ:

.webp?width=60&quality=30)