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मोदी कैबिनेट फेरबदल: शपथ लेने वाले 43 मंत्रियों के बारे में जानिए

केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार हो रहा है. कैबिनेट विस्तार के मद्देनजर 10 मंत्रियों का प्रमोशन किया गया है, जबकि मंत्रिमंडल में 33 नए चेहरों को शामिल किया गया है. इस लिस्ट में कई बड़े नामों को जगह दी गई है. मसलन, नारायण तातू राणे, सर्वानंद सोनोवाल, डॉ. वीरेंद्र कुमार, ज्योतिरादित्य सिंधिया,रामचंदर प्रसाद सिंह, अश्विनी वैष्णव, पशुपति कुमार पारस, किरेन रिजीजू, राज कुमार सिंह, हरदीप सिंह पुरी, मनसुख मांडविया समेत कई अन्य नेताओं  के नाम इस लिस्ट में शामिल हैं.

कैबिनेट मंत्री

नारायण तातू राणे-

सांसद हैं. पहली बार 1996 में राजस्व मंत्री बने थे. 1999 में 7 महीने के लिए महाराष्ट्र के सीएम बने. 2005 में शिवसेना से कांग्रेस गए. 2017 में कांग्रेस छोड़ अपनी पार्टी बनाई और 2019 में भाजपा में आ गए.

सर्बानंद सोनोवाल,

2016 से 2021 तक असम के सीएम रहे. फिलहाल वहां की माजुली सीट से विधायक हैं. इस बार पार्टी ने जब हिमंत बिस्व सरमा को सीएम बनाने का फैसला किया तो यही बात सामने आई थी कि सोनोवाल को अब दिल्ली बुलाया जा सकता है. वही हुआ.

डॉक्टर बीरेंद्र कुमार

टीकमगढ़ से सांसद हैं. चार दशक से राजनीति में सक्रिय हैं. उन्हें दूसरी बार नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में जगह मिली है. इससे पहले सितंबर, 2017 में उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया था. तब महिला एवं बास विकास और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी उन्हें दी गई थी.
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ज्योतिरादित्य सिंधिया

मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं. कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे सिंधिया 2020 में भाजपा में शामिल हुए थे. उनके भाजपा में आने के बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर गई थी. अब उन्हें मंत्री पद मिला है. यूपीए सरकार में मंत्री रह चुके हैं. राहुल के करीबी रहे हैं.

आरसीपी सिंह

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. पूर्व नौकरशाह रहे हैं. यूपी काडर के IAS अधिकारी. 2010 से राज्यसभा सांसद बने हुए हैं. कभी केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के निजी सचिव रह चुके हैं.  वह सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के ही रहने वाले हैं. जेडीयू की नीतियों को बनाने में भी उनकी अह्म भूमिका रहती है.

अश्विनी वैष्णव

राज्यसभा सांसद हैं.अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में पीएमओ में डिप्टी सेक्रेटरी रहे हैं. राजस्थान के जोधपुर के रहने वाले हैं.1994 बैच के IAS हैं. ओड़िशा के सीएम नवीन पटनायक के करीबी रह चुके हैं.

पशुपति पारस

लोजपा से हाजीपुर के सांसद. लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं. रामविलास पासवान के छोटे भाई हैं. लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं. साल 2019 में नीतीश मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे कर पारस हाजीपुर लोकसभा का चुनाव लड़ा और फिर जीत कर संसद पहुंचे.

किरेन रिजिजू

नॉर्थ ईस्ट से बीजेपी के बड़े चेहरे हैं. अरुणाचल प्रदेश से बीजेपी के सांसद हैं. वर्तमान में खेल राज्यमंत्री हैं. उन्हें प्रमोशन मिला है. किरण रिजिजू ने पहली बार 2004 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते. अगला चुनाव हार गए. लेकिन अगले चुनाव में फिर जीत हासिल की और गृह राज्यमंत्री बने.

आरके सिंह

ऊर्जा मंत्री स्वतंत्र प्रभार थे. भारत के पूर्व गृह सचिव रहे हैं. बिहार के आरा से बीजेपी के सांसद हैं. नौकरशाह से राजनेता बने सिंह ने मोदी सरकार के बिजली क्षेत्र में सुधार एजेंडा को आगे बढ़ाया.  सितंबर, 2017 में विद्युत राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी. अगली सरकार में भी यही जिम्मेदारी मिली.

हरदीप सिंह पुरी

नागरिक उड्डयन मंत्री हैं. आवास और शहरी विकास का जिम्मा भी दिया गया था.  कोरोना के समय विदेश में फंसे भारतीयों को देश लाने में उनके मंत्रालय के वंदे भारत मिशन की तारीफ हुई थी. उनके काम को देखते हुए उनका प्रमोशन हुआ है. 1974 बैच के IAS ऑफिसर UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि रहे हैं. दिल्ली से पढ़ाई हुई है.

मनसुख मंडाविया

गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं. मोदी के मौजूदा कैबिनेट में केंद्रीय रसायन और उर्वरक में राज्यमंत्री थे. इस बार उनका प्रमोशन हुआ है. मंडाविया करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं. बावजूद इसके उनको सादगी के ल‍िए खासतौर पर पहचाना जाता है. मंडाव‍िया की एक पहचान साइकिल से संसद आने वाले सांसद के रूप में भी है.

भूपेंद्र यादव

2012 से राज्यसभा सांसद हैं. बिहार भाजपा के प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महामंत्री हैं. लोकसभा चुनाव में बिहार भाजपा को शानदार जीत दिलाने और विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को बिहार में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनाने में बड़े रणनीतिकार की भूमिका भूपेंद्र ने निभाई थी. 25 संसदीय कमेटी के सदस्य. एलएलबी किया है और राजनीति में आने से पहले सुप्रीम कोर्ट में वकील थे. अजमेर से आते हैं.

पुरुषोत्तम रुपाला

गुजरात से आते हैं. तीन बार विधायक रहे हैं. गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं. कृषि मंत्रालय में राज्यमंत्री हैं. मोदी और अमित शाह के करीबी हैं.

जी किशन रेड्डी

मौजूदा समय में गृह राज्यमंत्री हैं. आंध्र प्रदेश के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष रह चुके हैं. सिंकदराबाद से बीजेपी के सांसद हैं. रेड्डी ने 1977 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत युवा नेता के तौर पर की थी तब वह जनता दल से जुड़े थे. 1980 में भाजपा के अस्तित्व में आने के बाद वह उससे जुड़ गए.

अनुराग ठाकुर

वित्त राज्य मंत्री हैं. हमीरपुर से सांसद हैं. BCCI के अध्यक्ष रह चुके हैं. हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे हैं. 2005 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष का जिम्मा संभाला. 2019 में चौथी बार लोकसभा सांसद बने.

राज्यमंत्री

पंकज चौधरी

उत्तर प्रदेश से आते हैं. महाराजगंज से सांसद हैं. पहली बार 1989-91 में नगर निगम गोरखपुर में पार्षद चुने गये थे. इसके बाद 1990-91 तक वे गोरखपुर नगर निगम में ही उप-महापौर रहे. इसी साल उन्हें प्रदेश भाजपा में कार्यकारिणी समिति में सदस्य बनाया गया. इसी साल हुए लोकसभा के चुनाव में उन्हें टिकट भी मिल गया और वे जीत भी गये.

अनुप्रिया पटेल

मिर्जापुर से सांसद हैं. बीजेपी की सहयोगी अपना दल की नेता हैं. पहली सरकार में स्वास्थ्य राज्यमंत्री रह चुकी हैं. कुर्मी समुदाय की नेता हैं. पिता सोनेलाल पटेल के निधन के बाद पार्टी का मुख्य चेहरा हैं. अनुप्रिया पर मां की अनदेखी करने और खुद को पार्टी का असली वारिस बताने का आरोप लगा. मां-बेटी के बीच पार्टी के अधिकार को लेकर विवाद हुआ और मां कृष्णा पटेल अपना गुट लेकर अलग हो गईं.

एसपी सिंह बघेल

आगरा से सांसद. चौथी बार लोकसभा सांसद बने हैं. एक बार राज्यसभा सांसद रहे हैं. यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. एसपी सिंह बघेल मूलतः पाल/ गडेरिया जाति से हैं. इटावा, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, मथुरा, आगरा में इस जाति का अच्छा दबदबा है.

राजीव चंद्र शेखर

कर्नाटक से राज्यसभा सांसद. बड़े कारोबारी के तौर पर पहचान. कंप्युटर साइंस से एमटेक किया है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पासआउट हैं. टेलीकॉम सेक्टर के एक्सपर्ट माने जाते हैं. TRAI को स्थापित करने में अहम भूमिका रही थी.

शोभा करंदलाजे

कर्नाटक के उडुप्पी से सांसद हैं. बतौर सांसद दूसरा कार्यकाल है. 2004 में एमएलसी बनकर सियासत शुरू की. येदियुरप्पा सरकार में मंत्री रहीं. तटीय कर्नाटक में शोभा की अच्छी लोकप्रियता है. इनकी आक्रामक नेताओं में गिनती होती है.

भानुप्रताप सिंह वर्मा

उत्तर प्रदेश से आते हैं. विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं. 2019 में 5वीं बार लोकसभा सांसद बने हैं. पहली बार 1996 में सांसद बने थे. फिलहाल जालौन से भाजपा सांसद हैं. दलितों की कोरी जाति से आते हैं. कोरी जाति भी दलितों में भाजपा की खास समर्थक जाति है, जिससे खुद राष्ट्रपति भी हैं.

दर्शना जरदोश

सूरत से सांसद हैं. गुजरात में जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए वहां का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है. लगातार तीसरी बार सांसद बनी हैं. भाजपा महिला मोर्चा की महासचिव भी हैं.

मीनाक्षी लेखी

नई दिल्ली सीट से लगातार दो बार सांसद चुनी गई हैं. पेशे से वकील. इससे पहले भाजपा की प्रवक्ता भी रही हैं. 2010 से राजनीति में हैं. तेज-तर्रार नेताओं में गिनती होती है. 7RCR का नाम बदलकर 7 लोक कल्याण मार्ग कराने में बड़ी भूमिका थी.

अन्नपूर्णा देवी

झारखंड से आती हैं. पहली बार सांसद हैं. चार बार विधायक रही हैं. झारखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं. बिहार सरकार में भी मंत्री रही हैं. सिंचाई, महिला एवं बाल कल्याण जैसे विभागों की मंत्री रही हैं. रांची विवि से इतिहास में एमए किया है.

ए नारायणस्वामी

कर्नाटक के चित्रदुर्ग से सांसद हैं. चार बार विधायक रहे हैं. कर्नाटक सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं. इनकी कर्नाटक में दलित वोट बैंक पर जबरदस्त पकड़ मानी जाती है.

कौशल किशोर

उत्तर प्रदेश के दलित नेता और लखनऊ की मोहनलालगंज सीट से सांसद. पासी समुदाय से आते हैं. यूपी में मंत्री रह चुके हैं. 2013 में भाजपा में आने से पहले निर्दलीय लड़ते रहे हैं.1989 में पहली बार चुनाव लड़ा लेकिन जीते पहली बार 2002 में.

अजय भट्ट

उत्तराखंड से आते हैं. पहली बार सांसद बने हैं. नैनीताल से सांसद हैं. ब्राह्मण नेता की छवि है. उत्तराखंड भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. अजय भट्ट पेशे से वकील हैं.

बीएल वर्मा

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद. लोधी ओबीसी समुदाय से आते हैं. कल्याण सिंह के करीबी रहे हैं. उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष हैं. फिलहाल यूपी भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं. पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी इसी बिरादरी से रहे हैं और इसे भाजपा का बड़ा समर्थक माना जाता है.

अजय कुमार

बीएल वर्मा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं. वे लोधी ओबीसी समुदाय से आते हैं. कल्याण सिंह के करीबी रहे हैं और फिलहाल उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं. पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी इसी बिरादरी से रहे हैं और इसे भाजपा का बड़ा समर्थक माना जाता है.

देवुसिंह चौहान

गुजरात से हैं. लगातार दूसरी बार लोकसभा सदस्य बने हैं. 2002 तक AIR में इंजीनियर थे. दो बार गुजरात में विधायक भी रहे हैं.

भगवंत खुबा

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक हैं. कर्नाटक के बीदर से सांसद हैं. लोकसभा सदस्य के तौर पर दूसरा कार्यकाल है.

कपिल पाटिल

महाराष्ट्र से सांसद हैं. कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन रहे हैं. एनसीपी छोड़कर भाजपा में आए थे. दो बार के सांसद हैं. ठाणे जिला परिषद के अध्यक्ष भी रहे हैं.

प्रतिमा भौमिक

त्रिपुरा से आती हैं. बायो साइंस से ग्रेजुएट हैं. त्रिपुरा पश्चिम सीट से सांसद हैं. खेती किसानी करने वाली और सादगी पसंद सांसद की छवि है.

सुभाष सरकार

पश्चिम बंगाल के बांकुरा से सांसद. गायनेकोलॉजिस्ट और कल्याणी एम्स बोर्ड के सदस्य हैं. राम कृष्ण मिशन से जुड़े हैं.

भागवत किसनराव कराड

महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद. दो बार औरंगाबाद के मेयर रहे हैं. संगठन के मामलो में माहिर माने जाते हैं.

डॉक्टर राजकुमार रंजन सिंह

मणिपुर से लोकसभा सांसद हैं. प्रोफेसर हैं. भूगोल में एमए और पीएचडी हैं.

डॉक्टर भारती पवार

मध्य प्रदेश के डिंडोरी से भाजपा सांसद हैं. पेशे से डॉक्टर हैं. जिला परिषद की सदस्य रही हैं.

बिश्वेबर टुडू

ओडिशा से लोकसभा सांसद हैं. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की है. वॉटर रिसोर्स विभाग में सीनियर इंजीनियर थे.

शांतुन ठाकुर

पश्चिम बंगाल के बनगांव से बीजेपी सांसद हैं. मतुआ समुदाय से आते हैं और इस बार के बंगाल चुनाव में मतुआ समुदाय खासा निर्णायक रहा था. पिता हरिचंद्र ठाकुर समाज सुधारक रहे हैं.

डॉ. महेंद्र मुंजपरा

महेंद्र मुंजपरा गुजरात से सांसद हैं. डॉक्टरी की पढ़ाई की है. कार्डियोलॉजिस्ट हैं. वे कोली समुदाय से आते हैं. फिलहाल स्वास्थ्य मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य भी हैं.

जॉन बारला

पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार से सांसद हैं. चाय बागान के मुद्दे को उठाने को लेकर चर्चा में रहते हैं. चाय बागान के श्रमिकों के लिए काम करते रहे हैं. चाय श्रमिकों के लिए लगातार काम करते रहते हैं.

डॉ. एल मुरुगन

डॉ एल मुरुगन तमिलनाडु से सांसद हैं. पेशे से वकील हैं. मद्रास हाईकोर्ट में हैं. इन्होंने वकालत में पीएचडी भी की है. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष रहे हैं.

निसिथ प्रमाणिक

पश्चिम बंगाल से सांसद हैं. बतौर सांसद पहला कार्यकाल है. प्राइमरी स्कूल में असिस्टेंट टीचर रहे हैं. निसिथ प्रमाणिक 35 साल के हैं और मोदी कैबिनेट में एंट्री पाने वाले सबसे युवा चेहरा हैं.


सोशल लिस्ट: मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में बदलाव के पहले क्या बातें चलीं?

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