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लक्षद्वीप में लोगों के विरोध के बीच किस कानून को वापस लेने का ऐलान किया गया है

लक्षद्वीप. अरब महासागर में 36 द्वीपों का एक समूह. पिछले कुछ समय से यहां के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. अजब-गजब तरीकों से. वजह है लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल की ओर से प्रस्तावित कुछ नियम-कानून. इन्हीं में एक था मछुआरों के बोट पर सरकारी कर्मचारियों की तैनाती का आदेश. इस आदेश के पीछे मकसद बताया गया था कि इससे खुफिया जानकारी जुटाने में आसानी रहेगी. लेकिन कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद अब इस आदेश को वापस ले लिया गया है.

पोर्ट, फ़िशिंग और नेविगेशन विभाग के डायरेक्टर सचिन शर्मा ने नए फैसले के बारे में सभी अधिकारियों और पोर्ट के सुरक्षा से जुड़े CISF जैसे विभागों को ईमेल लिखा है. इसमें 28 मई को जारी आदेश को वापस लेने की बात कही गई है. और पुराने नियम को फिर से लागू करने को कहा गया है. लेकिन बाकी प्रस्तावित कानून के बारे में कुछ नहीं कहा गया है.

और किन कानूनों पर विवाद है?

जिस कानून के मसौदे को लेकर विवाद हो रहा है, उनमें प्रमुख तौर पर चार हैं. पहला है LDAR (Lakshadweep Development Authority Regulation 2021). हिन्दी में कहें तो लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन का मसौदा. दूसरा है असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम यानी कि PASA. तीसरा है पंचायत अधिसूचना का मसौदा. और चौथा लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन, 2021 का मसौदा. इसके अलावा शराब बिक्री पर से रोक हटाने जैसे मुद्दे भी हैं.

लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल जब ये बदलाव लेकर सामने आए, तो विपक्ष ने उनकी आलोचना की. कहा कि ये फैसले लक्षद्वीप में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं के खिलाफ़ है. राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने भी पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर इन बदलावों को वापिस लेने की मांग की. कांग्रेस के अलावा केरल की सत्ताधारी पार्टी CPM और तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK ने भी इन प्रस्तावित कानूनों को वापस लेने की मांग की. ये मसला अदालत तक भी पहुंच गया.

शराब पर रोक हटाने का भी विरोध

CPM सांसद करीम दावा ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी में आरोप लगाया कि प्रफुल पटेल ने लक्षद्वीप के लोगों की पारंपरिक और सांस्कृतिक विविधता को नष्ट करने के लिए ये कदम उठाए हैं. शराब पर प्रतिबंध हटाने सहित कई ऐसे फैसले पटेल ने लिए हैं, जिससे लोग आहत हैं. दरअसल लक्षद्वीप इकलौता ऐसा केंद्र शासित प्रदेश था, जहां शराब के सेवन पर प्रतिबंध था. 36 द्वीपों में से सिर्फ एक द्वीप बंगारम में शराब पर प्रतिबंध नहीं था. हालांकि प्रफुल पटेल की नियुक्ति के बाद ये प्रतिबंध हटा दिया गया.

लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल ने भी इन प्रस्तावित क़ानूनों को जनता के साथ एक भद्दा मज़ाक़ बताया था. वह इस बारे में 31 मई को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे. फैज़ल के मुताबिक़, अमित शाह ने उन्हें आश्वासन दिया था कि स्थानीय लोगों और नेताओं से बिना मशवरा किया कोई भी क़ानून लागू नहीं किया जाएगा.

इस प्रस्तावित कानून के खिलाफ स्थानीय लोगों के कई अनोखे तरीक़े से विरोध किया था. देखिए-

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समुद्र के अंदर कुछ लोगों ने प्रतीकात्मक विरोध दर्ज़ कराया था. इसमें लक्षद्वीप बचाओ, लोकतत्र बचाओ जैसे नारे लिखे थे (फ़ोटो- ट्विटर)

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कानून के विरोध में लक्षद्वीप के घर-घर में लोगों ने विरोध किया. (फ़ोटो-ट्विटर)

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एक युवती की फोटो भी आई, जिसने पोस्टर पकड़ा हुआ था, जिस पर लिखा था हम अंधे नहीं हैं. (फ़ोटो-ट्विटर)

प्रशासक ही यहां कर्ताधर्ता

इस विवाद के केंद्र में लक्षद्वीप के नए प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल हैं. दरअसल, लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश है. यहां चुनी हुई राज्य सरकार नहीं है. यहां प्रशासक ही सरकार में सबसे बड़ा पद होता है. इन प्रस्तावित कानूनों को लेकर विरोध को प्रफुल पटेल ख़ारिज करते रहे हैं. वेबसाइट ‘द प्रिंट’ से बातचीत में उन्होंने LDAR के मसौदे पर कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के विकास के लिए इसे पेश किया जा रहा है. विकास कार्यों के लिए जो जमीन ली जा रही है, उसे लेकर लोगों की चिंता गैरवाजिब है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इसे लेकर अपना अजेंडा चला रहे हैं.


वीडियो-  लक्षद्वीप में ऐसा क्या हुआ कि ‘सेव लक्षद्वीप’ जैसे कैंपेन चलने लगे?

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