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JNU हिंसा: ABVP की कोमल शर्मा को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी यानी JNU. 5 जनवरी को यहां हिंसा हुई. इस हिंसा के कई वीडियो वायरल हुए. मामले की जांच दिल्ली पुलिस कर रही है. जनवरी में ही पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिंसा में शामिल स्टूडेंट्स की जानकारी दी थी. पुलिस ने वायरल वीडियो में दिखने वाली नकाबपोश लड़की की पहचान दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट कोमल शर्मा के तौर पर की थी, जो ABVP से जुड़ी हुई है. कोमल एक वीडियो में चेक शर्ट पहने हुए, हाथ में डंडा लिए और नकाब पहने हुए दिख रही हैं.

अब क्या पता चला है?

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, कोमल शर्मा ने जांच करने वाली टीम को बताया था कि वो हिंसा के दौरान कैंपस में मौजूद नहीं थी. अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि कोमल शर्मा से मार्च के दूसरे हफ्ते में ही क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम ने पूछताछ की थी.

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तस्वीर पांच जनवरी की है. जगह- JNU कैंपस, जो तोड़-फोड़ और हिंसा के बाद ऐसा दिख रहा था. (फोटो- ANI)

जेएनयू में 5 जनवरी को मास्क लगाए लगभग 100 लोगों ने करीब चार घंटे तक हिंसा की थी. इनमें 36 छात्र, टीचर और स्टाफ घायल हुए थे. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि वीडियो में दिखी लड़की कोमल शर्मा है कि नहीं. सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जांच टीम ने पहले कोमल को फोन पर नोटिस भेजकर जांच में शामिल होने के लिए कहा. लेकिन उसका फोन बंद था. इसके बाद उस पते पर नोटिस भेजा जहां वो किराए के मकान में रहती थी लेकिन वो वहां भी नहीं मिली.

मार्च में हुई थी पूछताछ

सूत्रों ने बताया कि मार्च के दूसरे सप्ताह में एसआईटी ने पूछताछ के लिए कोमल को बुलाया था. पांच-छह अधिकारियों की एक टीम ने उससे पूछताछ की. बयान दर्ज किया. इसमें, उसने दावा किया कि कुछ लोग उसे फ्रेम करने की कोशिश कर रहे थे. कोमल ने हिंसा में शामिल होने से इनकार किया. उसने दावा किया कि वह उस दिन कैंपस में नहीं थी.

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बाएं से दाएं: पुलिस प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए. सबसे ज्यादा वायरल होने वाली तस्वीर दाएं में हैं, लेकिन पुलिस ने इस पर कुछ भी नहीं कहा था.

जेएनयू हिंसा मामले में पुलिस ने 9 जनवरी को नौ संदिग्धों के नाम जारी किए थे. सभी छात्र थे. इनमें से सात की पहचान पुलिस ने वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्य के रूप में की थी. वहीं दो की पहचान ABVP के सदस्यों के रूप में हुई थी. हालांकि पुलिस ने संगठन का नाम नहीं लिया था. अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

कितनी आगे बढ़ी जांच?

इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद 20 पुलिसकर्मियों की एसआईटी ने जेएनयू एडमिन ब्लॉक के अंदर ऑफिस खोला था. लेकिन फरवरी में दिल्ली में हुई हिंसा की जांच की जिम्मेदारी इसी टीम दी गई. इसके बाद इसी टीम को निजामुद्दीन में तबलीगी जमात मामले में मौलाना साद और सात अन्य के खिलाफ जांच की जिम्मेदारी दी गई.

एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि एसआईटी ने अब तक 80 लोगों से पूछताछ की है. इनमें 10 संदिग्ध हैं जिनकी तस्वीरें एसआईटी प्रमुख डीसीपी जॉय तिर्की ने जारी की थीं. तब से कोई ब्रीफिंग नहीं बुलाई गई है. एसआईटी ने घायल छात्रों, शिक्षकों, वार्डन, सुरक्षा गार्ड और छात्रों के बयान दर्ज किए हैं.


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