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देश के आईटी मिनिस्टर ने फेसबुक को लिखी चिट्ठी में क्या चेतावनी दी?

देश के आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क ज़करबर्ग को एक ख़त लिखा है. कब लिखा- 1 सितंबर को. क्यों लिखा है- क्योंकि भारत में फेसबुक को लेकर इधर दिनों तमाम विवाद चल रहे हैं. क्या लिखा- चलिए जानते हैं.

ख़त की शुरुआत यहां से है–

“आज पूरी दुनिया कोरोना से जूझ रही है. आपकी और आपके परिवार की अच्छी सेहत के लिए कामना. फेसबुक का उद्देश्य रहा है दुनिया को करीब लाना. लेकिन पिछले कुछ महीने में जो कुछ हुआ है, वो फेसबुक के उद्देश्य से हदूर है.”

आगे रविशंकर प्रसाद ने जो कुछ लिखा, उनमें से ख़ास-ख़ास बातें ये हैं –

# मुझे ये जानकारी दी गई है कि लोकसभा चुनाव, 2019 के वक्त फेसबुक इंडिया ने राइट विंग की विचारधारा से जुड़े कुछ यूजर्स और पेजों को हटाया, डिलीट किया. कुछ की रीच कम की गई. और यही नहीं, उन्हें अपील करने तक का मौका नहीं दिया गया.

# तमाम देशों के लोग ये डिजिटल प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करते हैं. इस नाते फेसबुक को हर विचारधारा के लोगों के प्रति न्यायपूर्ण और तटस्थ होना चाहिए. किसी भी संस्थान में काम करने वाले लोगों की अपनी पसंद-नापसंद हो सकती है. लेकिन संस्थान पर उसकी झलक नहीं दिखनी चाहिए.

# ये पक्षपात फेसबुक इंडिया टीम के लोगों के राजनीतिक झुकाव का नतीजा है. हमें कुछ मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि फेसबुक इंडिया की मैनेजिंग डायरेक्टर से लेकर अन्य सीनियर अधिकारियों तक, सबकी एक ख़ास राजनीतिक विचारधारा है.

# इस राजनीतिक विचारधारा को देश में लगातार चुनावी हार मिली हैं. सभी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हार के बाद अब वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये देश के लोकतंत्र और लोगों की राय को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं.

# ये भारी समस्या की बात है कि फेसबुक के कुछ कर्मचारी ऑन-रिकॉर्ड देश के प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों को अपशब्द कह रहे हैं. जब कुछ लोगों का पक्षपातपूर्ण रवैया करोड़ों लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करने लगे, तो ये बिल्कुल अस्वीकार्य है.

# ये सब और कुछ नहीं, बल्कि आपकी कंपनी के अंदर की एक लड़ाई है कि किस तरह अपनी विचारधारा को आगे बढ़ाया जाए.

# वहीं दूसरी तरफ आपकी कंपनी के भीतर से सोचे-समझे तरीके से कुछ बातें लीक कराई गईं, जिससे बाहर ये धारणा बने कि असलियत इससे ठीक उलट है. भारत की राजनीति में इस तरह के दख़ल की हम निंदा करते हैं. ये फेसबुक के कुछ कर्मचारियों की इंटरनेशनल मीडिया के साथ मिलकर भारत के महान लोकतंत्र की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है.

# इसके अलावा, हम देख रहे हैं कि कुछ अराजक और कट्टरपंथी लोग फेसबुक का ग़लत तरीके से इस्तेमाल करते हुए सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं. इस पर भी फेसबुक की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई. क्या वही लोग आपको कार्रवाई करने से रोक रहे हैं, जिनका इस तरह की हिंसा भड़काने और देश को अस्थिर करने में ही हित छिपा है?

# फेसबुक के साथ एक और दिक्कत है. ये फैक्ट चेकिंग का काम थर्ड पार्टी फैक्ट चेकर्स से करा रहा है. यूज़र को ग़लत जानकारियों से बचाना आपकी ज़िम्मेदारी है. आप इससे बचकर ये काम ऐसी संस्थाओं को दे रहे हैं, जिनकी कोई विश्वसनीयता नहीं. हमने भारत में देखा है कि इन फैक्ट चेकर्स का भी स्पष्ट राजनीतिक झुकाव है. कायदे से तो कुछ वॉलंटियर्स रखकर इन फैक्ट चेकर्स का ही फैक्ट चेक कराना चाहिए.

# फैक्ट चेकिंग को लेकर इतनी बातें करने के बाद भी कोविड-19 को लेकर फेसबुक के ज़रिये तमाम मिस इंफॉर्मेशन फैलीं. फेसबुक जैसा संस्थान इन बातों से मुंह नहीं फेर सकता.

ये सारी वो बातें हैं, जो रविशंकर प्रसाद ने अपनी चिट्ठी में लिखीं.

फेसबुक विवादों में क्यों आया था?

एक तो ये आरोप कि अपने बिज़नेस की ख़ातिर बीजेपी से जुड़े यूज़र्स और ग्रुप्स की हेट पोस्ट को रोका नहीं. अमेरिका के अख़बार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने अपनी रिपोर्ट में ये आरोप लगाए.

दूसरा आरोप ये कि फेसबुक पर फैली तमाम गंद की आप शिकायत करते रह जाइए, कोई सुनने वाला नहीं.

ख़ैर, अब आईटी मिनिस्टर ने चिट्ठी लिखी है और कई अलग-अलग बातें भी उठाई हैं. इसका ज़करबर्ग कोई जवाब देते हैं, तो वो भी हम आपको बताएंगे.


फेसबुक पर गाली वाली पोस्ट, फेक अकाउंट की कंप्लेंट करते रहिए, उस तरफ सुनने वाला कोई नहीं है!

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