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मरीजों की संख्या कम दिखाने के लिए गुजरात सरकार कोरोना के कम टेस्ट कर रही है?

गुजरात. महाराष्ट्र के बाद दूसरा राज्य, जहां कोरोना के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. राज्य में 15 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं. मौते हुई हैं 938. इस बीच गुजरात सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि कोरोना के मरीजों की तादाद कम करने के लिए सरकार कम टेस्टिंग कर रही है. गुजरात सरकार की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़े तो यही बता रहे हैं. आप ये चार्ट देखिए.

Test

 

कांग्रेस ने भी इस मसले पर गुजरात सरकार को घेरा है. कम टेस्ट कर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है. कांग्रेस प्रवक्ता जयराज सिंह परमार का कहना है कि सरकार ने प्राइवेट लैब के कोरोना टेस्ट करने पर पाबंदी लगाई है. प्राइवेट लैब को टेस्ट करने से पहले सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है. ज्यादा टेस्ट होंगे, तो करोना के मामले ज्यादा दिखेंगे. इसे छिपाने के लिए सरकार ने ऐसा किया है.

प्राइवेट लैब में टेस्ट बंद

गुजरात के प्राइवेट अस्पताल में कई ऐसे मरीज हैं, जिन्हें अलग-अलग बीमारी है, लेकिन कोरोना टेस्ट न होने के कारण उनका इलाज नहीं हो पा रहा है. अहमदाबाद हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉक्टर भरत गढ़वी ने आरोग्य सचिव जयंति रवि को एक लेटर लिखा है और पूछा कि प्राइवेट लैब में टेस्ट क्यों बंद किया गया है.

डॉक्टर भरत गढ़वी का कहना है कि प्राइवेट लैब में टेस्ट होने से फायदा होता था. मरीजों की रिपोर्ट जल्दी आ जाती थी और उसके बाद उसकी लाइन ऑफ ट्रीटमेन्ट तय हो पाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा है.

टेस्ट कम क्यों हो रहे हैं? उठ रहे सवाल

अहमदाबाद नर्सिंग होम एसोसिएशन एक्‍जीक्‍यूटिव कमेटी के सदस्‍य डॉ. वसंत पटेल का कहना है कि आईसीएमआर की गाइडलाइंस के मुताबिक, किसी भी मरीज की सर्जरी से पहले उसका COVID-19 टेस्‍ट कराना जरूरी है. लेकिन गुजरात सरकार COVID-19 टेस्‍ट को काफी हल्‍के में ले रही है. वे कम संख्‍या में टेस्‍ट क्‍यों कर रहे हैं, ये लोगों और डॉक्‍टरों की समझ से अब भी परे है.

डॉ. वसंत पटेल ने बताया-

“मैंने कल (27 मई) को एक पेशेंट की डिलीवरी के लिए अप्‍लाई किया था. इसे 24 घंटे से अधिक हो चुके हैं. लेकिन अभी तक मुझे उसके COVID-19 टेस्‍ट की अनुमति नहीं मिली. अहमदाबाद के सभी डॉक्‍टर इसी परेशानी से जूझ रहे हैं. इसके कारण मरीज परेशान हैं. यह गुजरात सरकार की खराब नीति का नतीजा है.”

डॉ. वसंत पटेल ने बताया कि कम संख्‍या में COVID-19 टेस्‍ट करने को लेकर अहमदाबाद मेडिकल एसोसिएशन ने गुजरात हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई है. याचिका को अहमदाबाद नर्सिग होम एसोसिएशन ने भी समर्थन दिया है. हाईकोर्ट में इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी.

अहमदाबाद मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मोना देसाई का कहना है कि डॉक्टरों को मरीज के COVID-19 टेस्ट के लिए फॉर्म भरना पड़ता है. इसे सीडीएचओ को भेजना होता है. ICMR के दिशा निर्देश के आधार पर हां या ना में जवाब दिया जता है. जवाब आने में 4 से 5 दिन लगते हैं. अगर कोई आपातकालीन ऑपरेशन होता है, तो मरीज और डॉक्टर पर इस का खतरा बना रहता है.

क्या कहा था हाईकोर्ट ने?

पिछले हफ्ते गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तुरंत अधिक से अधिक टेस्टिंग किट खरीदने का निर्देश दिया था. साथ ही निजी लैब को सरकारी दरों पर परीक्षण करने में सक्षम बनाने के लिए कहा था. सरकार के उद्देश्यों पर सवाल खड़ा करते हुए हाईकोर्ट का कहना था-

‘यह तर्क कि अधिक संख्या में टेस्ट होने से 70 फीसदी आबादी ही पॉजिटिव निकलेगी, यह डर टेस्ट को नकारने या सीमित कर देने का आधार नहीं होना चाहिए.’

कोर्ट ने यह भी कहा था कि उन्होंने देखा है कि टेस्टिंग किट की कमी नहीं है, लेकिन टेस्ट के लिए राज्य सरकार की अनिवार्य अनुमति की शर्त के चलते डॉक्टर टेस्ट नहीं कर पा रहे हैं. अदालत ने आगे कहा था कि किसी कोविड मरीज के लिए 3-5 दिन का इंतजार घातक साबित हो सकता है.


BJP प्रवक्ता संबित पात्रा में COVID- 19 के लक्षण मिले हैं

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