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लखनऊ: कोरोना मरीज पिता की देखभाल के लिए वार्ड बॉय बना बेटा, 16 घंटे की शिफ्ट की

कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहे लखनऊ (Lucknow) शहर से एक दिल दुखाने वाली घटना सामने आई है. यहां पर एक बेटा अस्पताल में भर्ती अपने बुजुर्ग पिता से नहीं मिल पा रहा था, तो उसने अस्पताल में ही वार्ड बॉय की नौकरी कर ली. वो रोज 16 घंटे नौकरी करता. इस दौरान सिर्फ अपने पिता ही नहीं बल्कि दूसरे मरीजों की भी देखभाल करता. टॉयलेट तक साफ करता. इतनी मेहनत की कि उसके पैर में छाले पड़ गए. हालांकि, कोविड पॉजिटिव उसके पिता जिंदगी की जंग हार गए.

इंडिया टुडे से जुड़े आशीष श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक पेशे से व्यापारी सुरेश प्रसाद लखनऊ के कुर्सी रोड पर रहते थे. बीते दिनों अचानक से उनकी तबीयत बिगड़ गई. सांस लेने में दिक्कत हुई. कोरोना संक्रमण की शिकायत के बाद उन्हें DRDO के अस्थाई कोविड-19 अस्पताल में भर्ती कराया गया.

रिपोर्ट के मुताबिक सुरेश प्रसाद का बेटा चंदन, जो कि पढ़ाई के बाद बिजनेस में पिता का हाथ बटाता था, रोज अपने बीमार पिता से मिलने अस्पताल जाता था. हालांकि, हर बार उसे अस्पताल के बाहर ही रोक लिया जाता. फोन पर भी अपने पिता से उसकी बात नहीं हो पाती. जैसे-तैसे बेटा अस्पताल के पास के रैन-बसेरे में रहकर पिता के बारे में जानकारी जुटाता रहा. लेकिन यहां से भी उसे संतोषजनक जानकारी नहीं मिल पा रही थी. बेटा दिन ब दिन परेशान होता रहा.

फिर एक दिन बीमार पिता ने अपने बेटे तक एक संदेश पहुंचाया. बीमार पिता ने बेटे से कहा कि उन्हें बहुत अकेलापन महसूस हो रहा है और अस्पताल में उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है, वे घर आना चाहते हैं. इस संदेश के बाद बेटे ने अस्पताल वालों से अपने पिता को डिस्चार्ज करने को कहा. लेकिन उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया गया. बताया गया कि पिता वेंटिलेंटर पर हैं और ऐसे में उन्हें डिस्चार्ज नहीं किया जा सकता.

बेचैनी ने वार्ड बॉय बना दिया

आशीष श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक अपने बीमार पिता से ना मिल पाने के कारण चंदन लगातार बेचैन होता जा रहा था. उसे कुछ नहीं सूझा तो अस्थाई कोविड अस्पताल में वार्ड बॉय की नौकरी कर ली. चंदन नहीं चाहता था कि किसी और को इस बारे में पता चले तो वह अपने पिता को उतना ही समय देता था, जितना दूसरे मरीजों को. पिता के पास ज्यादा समय गुजार सके इसलिए चंदन ने डबल शिफ्ट की. यानी दिन में 16 घंटे काम किया.

चंदन अपने पिता के साथ दूसरे मरीजों की भी समान सेवा भाव से देखभाल करता. बहुत ज्यादा काम करने की वजह से उसके पैर में छाले पड़ गए. उसने शीट बदलीं, टॉयलेट साफ किए. आखिर में 6 दिन बाद उसके पिता इस दुनिया से चल बसे. चंदन ने बताया कि उसके पिता ढंग से खाना नहीं खा पाते थे और बार-बार कहते थे- बेटा, मुझे यहां से ले चलो!


 

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