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'भावनाएं आहत होती हैं तो कुछ और पढ़ें', सलमान खुर्शीद की किताब पर बैन की मांग खारिज

कोई चीज या व्यक्ति अगर आपको पसंद नहीं है, तो आप क्या करते हैं, जाहिर है कि आप उससे दूरी बना लेंगे. ऐसा ही कुछ दिल्ली हाई कोर्ट ने एडवोकेट विनीत जिंदल से कहा है जिन्होंने कोर्ट से सलमान खुर्शीद की किताब पर बैन लगाने की मांग की थी. कोर्ट ने कहा, ‘अगर किताब से भावनाएं आहत होती हैं, तो इससे बेहतर किताब पढ़ सकते हैं.’ गुरुवार 25 नवंबर को इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने विनीत जिंदल की याचिका खारिज कर दी.

विनीत जिंदल ने अपनी याचिका में क्या कहा था?

इंडिया टुडे की रिपोर्टर नलिनी शर्मा के मुताबिक इस याचिका में हाई कोर्ट से सलमान खुर्शीद की किताब ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ के प्रकाशन, बिक्री, खरीद और वितरण पर बैन लगाने की मांग की गई थी. एडवोकेट विनीत जिंदल का कहना था कि फ्रीडम ऑफ स्पीच और एक्सप्रेशन’ के नाम पर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. खुर्शीद की किताब संविधान के आर्टिकल-19 और 21 के तहत दिए गए मूल अधिकारों का सीधा-सीधा उल्लंघन करती है. याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि इस किताब की वजह से देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क सकते हैं.

कोर्ट में सारे तर्क फेल हो गए

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार 25 नवंबर को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने किताब पर बैन लगाने को लेकर जो भी तर्क दिए, वे सभी फेल हो गए. कोर्ट ने दंगे भड़कने वाली बात पर कहा कि अब तक इस किताब की वजह से देश में कोई सांप्रदायिक घटना नहीं हुई है. ऐसे में दंगे होने की बात करना महज एक आशंका है. किताब पर बैन लगाने की मांग पर कोर्ट ने कहा,

“आप लोगों को यह किताब खरीदने और पढ़ने से क्यों नहीं मना करते? आप उन्हें बताइए कि किताब में लिखी हुई बातें सही नहीं हैं, वे इसे न पढ़ें. उनसे कहिए कि अगर इसे पढ़ने से उनकी भावनाएं आहत होती हैं, तो वे कोई बेहतर किताब पढ़ सकते हैं.”

दिल्ली हाई कोर्ट का सुनवाई के दौरान यह भी कहना था,

“मामला किताब के एक अंश का है, न कि पूरी किताब का. अगर आप पब्लिशर का लाइसेंस कैंसिल करवाना चाहते हैं, तो यह अलग मामला है. हमारे सामने पूरी किताब के बजाय उसका केवल एक अंश पेश किया गया है.”

विवाद पर सलमान खुर्शीद ने दी थी सफाई

बीते 10 नवंबर को सलमान खुर्शीद की किताब लांच हुई थी. लॉन्चिंग के बाद से ही इस पर सियासी बवाल मच गया. आरोप है कि इस किताब में खुर्शीद ने हिंदुत्व की तुलना ISIS से की है. हालांकि, खुर्शीद ने इसे लेकर सफाई भी दी थी. उनके मुताबिक उन्होंने हिंदुत्व की तुलना आतंकी संगठनों से नहीं की है. खुर्शीद ने आगे कहा,

“मैंने दोनों को ‘Similar’ बताया है, न कि ‘Same’ कहा है. मैंने यह नहीं लिखा कि हिंदू धर्म बिल्कुल ISIS और बोको हरम की तरह है…मुझे अफ़सोस है कि मैंने इस किताब को अंग्रेजी में लिखा है, जिस के चलते कुछ लोग (सही मतलब) समझ नहीं पा रहे हैं.”


वीडियो-नेता नगरी: सलमान खुर्शीद ने किताब में हिंदुत्व-RSS पर ऐसा क्या लिखा कि एक्सपर्ट्स ही भिड़ गए?

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