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इसरो के चंद्रयान को लेकर नासा ने ये बड़ी खबर दे दी है

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इसरो का चंद्रयान. चांद तक तो पहुंचा. 6 सितम्बर की रात. लेकिन चांद तक पहुंचते-पहुंचते चंद्रयान के विक्रम लैंडर से इसरो का संपर्क टूट गया. तब से लेकर अब तक विक्रम लैंडर से संपर्क की कोशिशें जारी हैं.

इस कोशिश में अब NASA यानी National Aeronautics and Space Administration – अमरीका की स्पेस एजेंसी –  भी जुट गयी है. NASA की जेट प्रपल्शन लैब (यानी राकेट का अध्ययन करने वाली प्रयोगशाला) और Deep Space Network (DSN) (यानी सुदूर अन्तरिक्ष में रीसर्च करने वाला नेटवर्क) की मदद से ये कोशिश की जा रही है.

कैसी कोशिश? चांद की सतह पर टेढ़ा पड़े विक्रम लैंडर को Deep Space Network की मदद से रेडियो सिग्नल भेजे जा रहे हैं. अगर विक्रम लैंडर सिग्नल का जवाब देगा तो लगभग खो चुके लैंडर से सम्पर्क साध लिया जाएगा. Times of India से NASA में मौजूद सूत्रों ने कहा है,

“ISRO से हुए समझौते के मुताबिक़, NASA विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित करने की लगातार कोशिश में है.”

नासा के DSN के स्टेशन अमरीका के साउथ कैलिफोर्निया में, स्पेन के मैड्रिड में, और ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में मौजूद हैं. ये तीनों स्टेशन एक दूसरे से 120 डिग्री के एंगल पर हैं. और स्पेस में मौजूद किसी भी सैटलाइट से संपर्क करने की क्षमता रखते हैं. हरेक स्टेशन पर चार एंटीना मौजूद होते हैं. हर एंटीना 25 से 70 मीटर की क्षेत्रफल में फैला हुआ है. ये एंटीना एक साथ कई सैटेलाइट्स से संपर्क करने की क्षमता रखते हैं.

यही नहीं, खबरें बता रही है कि चांद पर पहले से मौजूद नासा का सैटलाइट उस स्थान तक जाएगा, जहां विक्रम लैंडर की लैंडिंग हुई थी.

नासा के प्रवक्ता की न्यूयॉर्क टाइम्स से हुई बातचीत के मुताबिक़, वहां की पहले और बाद की तस्वीरें नासा इसरो के साथ साझा करेगा. जिससे इसरो को मदद मिलेगी.

DSN के ऑपरेटर रिचर्ड स्टीफेंसन ने भी ट्विटर पर लिखा है कि DSN इसरो के लैंडर से सम्पर्क साधने की कोशिश में है.

इसरो द्वारा भेजे गए चंद्रयान के ऑर्बिटर से अलग होकर लैंडर चांद की सतह की ओर यात्रा कर रहा था. इस लैंडर के पेट में था प्रज्ञान रोवर. लैंडर उतरता और उसके भीतर से रोवर निकलता. 14 दिनों तक चंद्रमा पर रीसर्च करता. लेकिन लैंडिंग के समय ही लैंडर से इसरो का संपर्क टूट गया. चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर ऊपर. और अब तक ये प्रयास जारी है.

चूंकि चांद पर 14 दिनों के दिन और 14 दिनों की रातें होती हैं. और लैंडर-रोवर को अपना काम 14 दिनों के सुबह के भीतर ही पूरा करना था. और ये समय पूरा हो रहा है. 21 तारीख तक ये मियाद पूरी हो जाएगी. फिर होगी रात. और चांद पर पड़ेगी ठण्ड. बेहद ज्यादा ठण्ड. लैंडर-रोवर को ठण्ड सहने के लिए नहीं बनाया गया है. इसलिए अब तक जितना समय बचा है, उसके भीतर ही लैंडर से संपर्क हो सकता है. उसके बाद शायद ही मुमकिन हो कि लैंडर फिर से मिल सके.


लल्लनटॉप वीडियो : ISRO के पास बहुत विक्रम लैंडर से संपर्क के लिए सिर्फ 14 दिन बचा है, जानिए कैसे?

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