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अफसरों का हौसला बढ़ाते हुए अदालत की अवमानना पर ये क्या बोल गए त्रिपुरा के सीएम बिप्लब देब

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री हैं बिप्लब देब. अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. हाल ही में उन्होंने अदालत की अवमानना को लेकर टिप्पणी की है. अधिकारियों से कहा कि आप लोग अदालत की अवमानना की चिंता किए बिना लोगों के लिए काम करें. गिरफ्तारी करना आसान नहीं होता क्योंकि मुख्यमंत्री ही पुलिस का प्रभारी होता है. सीएम के इस बयान का वीडियो वायरल है. विपक्षी पार्टियां भी उन पर निशाना साध रही हैं. तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने तो उन्हें देश पर धब्बा तक करार दे दिया है.

क्या कहा सीएम बिप्लब देब ने?

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब सिविल सर्विस ऑफिसर्स एसोसिएशन के 26वें सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. उसी दौरान उन्होंने अधिकारियों से कहा कि

“मैंने अधिकारियों को कहते सुना है कि हम खास काम करने का जोखिम नहीं उठा सकते. सिस्टम में दिक्कत होगी और अदालत की अवमानना होगी… त्रिपुरा में अदालत की अवमानना के लिए कौन जेल गया है? मैं यहां हूं. अगर तुम जेल जाओगे तो उससे पहले मैं जाऊंगा. तुम्हें जेल भेजना इतना आसान नहीं है. जेल भेजने के लिए पुलिस की जरूरत होती है और पुलिस मुख्यमंत्री के अंडर में आती है. वे ऐसे ही किसी को जेल नहीं भेज सकते.”

सीएम ने आगे कहा कि सत्ता सरकार चलाने वाले मुख्य व्यक्ति के पास होती है. सारी शक्ति जनता के पास है. हम लोगों की सरकार हैं. कोर्ट की नहीं.

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का हवाला देते हुए त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने आगे कहा कि

“अदालत विधायिका में बने कानूनों को लागू करने की संस्था है. अदालतें लोगों के लिए हैं न कि लोग अदालतों के लिए. एक बार पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने यह बात तब कही थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने 11 सांसदों को पदों से हटा दिया था. फिर उन्होंने कहा था कि ये सांसद बने रहेंगे. अदालत कानून लागू करने के लिए है.”

TMC ने बताया देश के लिए धब्बा

टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने ट्वीट करते हुए बिप्लब देब के बयान की तीखी आलोचना की. उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए लिखा

“बिप्लब देब पूरे देश के लिए एक धब्बा हैं. वह बेशर्मी से लोकतंत्र और माननीय न्यायपालिका का मजाक उड़ाते हैं. क्या सुप्रीम कोर्ट उनकी टिप्पणियों पर संज्ञान लेगा?”

त्रिपुरा CPI(M) के जितेंद्र चौधरी ने भी मुख्यमंत्री की टिप्पणियों की निंदा की. उन्होंने कहा कि यह बयान बहुत आश्चर्यजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है. किसी राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक पद को संभालने वाला व्यक्ति ऐसी टिप्पणी कैसे कर सकता है जो पूरी तरह से संविधान की भावना के खिलाफ हो. एक मुख्यमंत्री के तौर पर अदालत और कानून के शासन को उन्होंने कमजोर किया है.

त्रिपुरा कांग्रेस के अध्यक्ष बिरजीत सिन्हा ने मुख्यमंत्री बिप्लब देब के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को न्यायपालिका का सम्मान करना चाहिए. उसके आदेश का पालन करना चाहिए. लोकतंत्र में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव नहीं होना चाहिए.

बिप्लब देब का विवादों से पुराना नाता

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देब अक्सर चौंकाने वाले बयान देते रहे हैं. अगस्त 2018 में उन्होंने कहा था कि जब बतख पानी में तैरती हैं, तो जलाशय में ऑक्सीजन का स्तर अपने आप बढ़ जाता है. इससे ऑक्सीजन रिसाइकिल होता है. पानी में रहने वाली मछलियों को ज्यादा ऑक्सीजन मिलता है. इस तरह मछलियां तेजी से बढ़ती हैं. देखिए ये बयान.

अप्रैल 2018 में उन्होंने दावा किया था कि इंटरनेट और सैटेलाइट आज की नयी तकनीक नहीं है बल्कि यह महाभारत काल के जमाने से अस्तित्व में है. उनका कहना था कि इंटरनेट और सैटलाइट के जरिए ही संजय धृतराष्ट्र को कुरुक्षेत्र की लड़ाई का पूर्ण विवरण दे पा रहे थे.

जुलाई 2020 में बिप्लब देब ने पंजाबी सरदारों और हरियाणा के जाटों लेकर बेतुका बयान दिया था. प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम में बोलते हुए वह कह गए थे कि भारत के सभी सम्प्रदायों की अपनी ख़ासियत है. बंगालियों को उनकी बुद्धि पर चुनौती नहीं दी जा सकती है, वहीं पंजाबियों और जाट समुदाय के लोगों की शारीरिक ताक़त को चुनौती नहीं दी जा सकती है. हां, लेकिन उनके पास दिमाग़ थोड़ा कम होता है. पढ़िए उन्होंने क्या कहा था. हालांकि इस बयान पर काफी विवाद की स्थिति पैदा हो गई थी जिसके बाद उन्होंने माफी भी मांगी थी.

(आपके लिए यह ख़बर हमारे साथी साजिद ने लिखी है )


विडियो – त्रिपुरा के जिस गमछे का ट्रेंड चला, उसकी खासियत जान खरीदने दौड़ पड़ेंगे

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