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चाइनीज़ कम्पनी वीवो के साथ IPL का करार खत्म करने पर BCCI ने ये क्या कह दिया?

भारत-चीन सीमा पर मचे विवाद के बीच देश में चाइनीज प्रोडक्ट्स के बॉयकॉट की मांग जोरों से चल रही है. इस बीच लोगों का यह भी कहना है कि हमें चाइनीज कंपनियों से सारे संबंध तोड़ लेने चाहिए. इस मसले पर अब इंडियन क्रिकेट बोर्ड (BCCI) का बयान भी आ गया है. बोर्ड के ट्रेजरार अरुण धूमल ने कहा है कि BCCI अगली बार से अपनी स्पॉन्सरशिप पॉलिसी पर विचार करने के लिए तैयार है. हालांकि उन्होंने साफ किया कि वो IPL की टाइटल स्पॉन्सर वीवो को हटाने का कोई प्लान नहीं बना रहे.

धूमल ने कहा कि वीवो से पैसा आ रहा है और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है. उन्होंने कहा कि चाइनीज कंपनियों द्वारा IPL जैसे इवेंट्स स्पॉन्सर करने से भारत का ही फायदा है.

# भारत का फायदा कैसे?

VIVO के साथ हुई डील के मुताबिक, BCCI को चाइनीज कंपनी से हर साल 440 करोड़ रुपये मिलते हैं. धूमल ने इस बारे में PTI से कहा,

‘जब आप भावुकता में बात करते हैं तो तार्किकता पीछे रह जाती है. हमें चाइनीज कंपनी को चाइनीज फायदे के लिए सपोर्ट करने और चाइनीज कंपनी की मदद से भारत को सपोर्ट करने के बीच का अंतर समझना होगा. जब भी हम चाइनीज कंपनियों को भारत में उनका सामान बेचने की अनुमति देते हैं, तो वे भारतीय ग्राहकों से जो भी पैसा ले रहे हैं, उसका कुछ हिस्सा BCCI को दे रहे हैं. उस पैसे पर बोर्ड 42 परसेंट टैक्स भारत सरकार को देता है, इसलिए इससे भारत का फायदा है चीन का नहीं.’

पिछले साल सितंबर तक चाइना की ही मोबाइल कंपनी ओप्पो भारतीय क्रिकेट टीम की स्पॉन्सर थी. बाद में बेंगलुरु स्थित एजुकेशनल टेक्नॉलजी कंपनी Byju’s ने ओप्पो की जगह ले ली थी. जानने लायक है कि ओप्पो और वीवो दोनों कंपनियों की पैरेंट कंपनी BBK इलेक्ट्रॉनिक्स है. यह चाइनीज कंपनी कई नामों के साथ अपने मोबाइल्स भारत में बेचती है.

Arun Dhumal Sourav Ganguly Jay Shah
BCCI प्रेसिडेंट Sourav Ganguly और Jay Shah के साथ खड़े Arun Dhumal

धूमल ने कहा कि वह चाइनीज प्रोडक्ट्स पर निर्भरता कम करने के पक्ष में हैं. लेकिन साथ ही अगर चाइनीज कंपनियां भारत में बिजनेस कर रही हैं तो उनके द्वारा IPL जैसे इवेंट्स को स्पॉन्सर करने में कोई बुराई नहीं है. धूमल ने कहा,

‘अगर वे IPL को सपोर्ट नहीं करेंगे तो वह पैसा भी चाइना जाएगा. अगर वह पैसा यहां रुकता है, तो हमें खुशी होनी चाहिए. हम उस पैसे से अपनी सरकार की मदद कर रहे हैं. अगर मैं एक क्रिकेट स्टेडियम बनाने के लिए किसी चाइनीज कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट देता हूं, तब मैं चाइनीज इकॉनमी का फायदा करा रहा हूं.

गुजरात क्रिकेट असोसिएशन (GCA) ने मोटेरा में दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनाया और उसका कॉन्ट्रैक्ट एक भारतीय कंपनी L&T को दिया गया था. पूरे देश में हजारों करोड़ लगाकर क्रिकेट से जुड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाया गया लेकिन इससे जुड़ा एक भी कॉन्ट्रैक्ट हमने चाइनीज कंपनी को नहीं दिया.’

इधर इंडियन ओलंपिक असोसिएशन (IOA) ने भी इस मसले पर कमेंट किया है. गौरतलब है कि IOA का जर्सी स्पॉन्सर चाइनीज कंपनी लि निंग है. इस मसले पर IOA के जनरल सेक्रेटरी राजीव मेहता ने साफ किया कि जरूरत पड़ने पर वह लि निंग से कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने से पीछे नहीं हटेंगे. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी उनका ऐसा कोई प्लान नहीं है.


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