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ये UTI कौन सी बीमारी है, जो अटल बिहारी वाजपेयी को हुई बताई जाती है?

इसको लोग गुप्त रोग भी मानते हैं, मगर ऐसा है नहीं.

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12 जून 2018 (अपडेटेड: 12 जून 2018, 12:10 PM IST)
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी को ‘यूटीआई’ नाम का रोग हुआ है.
यूटीआई का फुल फॉर्म है – यूरिनेरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन. हिंदी में कहें तो मूत्र के रास्ते में होने वाला इन्फेक्शन. हमने इसके बारे में आर्काइव और किताबें छान के और डॉक्टर्स से बात करके जानकारी जुटाई है और उसे आम भाषा में पेश करने का प्रयास किया है. साथ ही हमारी रिसर्च के दौरान हेल्थलाइन
 वेबसाइट और अॉडनारी 
से हमें काफी सहायता मिली है.
सबसे पहली बात तो यूटीआई कोई गुप्त रोग नहीं है. यूटीआई दरअसल एक अंब्रेला टर्म है. अंब्रेला टर्म मतलब ये कोई एक बीमारी नहीं, बिमारियों का समूह है. दो कारणों के चलते -


# 1 - अंब्रेला टर्म यूं कि,

यूटीआई कोई के अंदर सूक्ष्मजीवों (माइक्रोब्स) से होने वाले वो सारे इन्फेक्शन आते हैं जो यूरिनेरी ट्रैक्ट यानी मूत्र के रास्ते में होते हैं.
माइक्रोब्स ऐसे जीव होते हैं जो नंगी आंखो से नहीं दिखते. ज़्यादातर यूटीआई बैक्टीरिया के चलते होते हैं लेकिन कुछ फंगस के चलते और कभी-कभी वायरस के चलते भी हो सकता है.
आइए सबसे पहले जानते हैं बैक्टीरिया, फंगस और वायरस क्या होते हैं –
वायरस दरअसल जीव और निर्जीव के बीच की कड़ी कही जा सकती है. विकास के क्रम में नहीं भी तो अपने आश्चर्यजनक चरित्र के चलते.
वायरस दरअसल जीव और निर्जीव के बीच की कड़ी कही जा सकती है. विकास के क्रम में नहीं भी तो अपने आश्चर्यजनक चरित्र के चलते.
# वायरस/विषाणु –
विषाणु ‘अकोशिकीय’ जीव हैं. अ-कोशिकीय मतलब इनके पास जीवन के सबसे बेसिक बिल्डिंग ब्लॉक ‘कोशिकाएं’ या सेल्स होते ही नहीं. जब तक ये किसी जीवित शरीर के संपर्क में न आ जाएं तब तक इन्हें मृत ही माना जा सकता है. और ये अपनी इस ‘मृत’ अवस्था में कई साल तक भी रह सकते हैं. जब किसी जीवित कोशिका का साथ इन्हें मिल जाता है तो ये जीवित हो जाते हैं और वंश वृद्धि भी करने लगते हैं.
सभी बैक्टीरिया एक कोशिकीय हैं, कुछ पैरासाईट बैक्टीरिया हैं, कुछ बैक्टीरिया लाभदायक हैं.
सभी बैक्टीरिया एक कोशिकीय हैं, कुछ पैरासाईट बैक्टीरिया हैं, कुछ बैक्टीरिया लाभदायक हैं.
# बैक्टीरिया/जीवाणु –
जीवाणु भी विषाणु की तरह ही माइक्रोस्कोपिक होते हैं. सिर्फ़ एक अंतर होता है कि ये एक कोशिकीय होते हैं. यानी ये जीवन के सबसे बेसिक ‘प्रकार’ होते हैं. और चूंकि इनमें एक कोशिका ही सही, लेकिन ‘अपने दम पर’ जीवन होता है इसलिए इन्हें जीवित रहने के लिए किसी पशु, पक्षी या मानव की आवश्यकता नहीं पड़ती. यानी ये नदी, पहाड़, पत्थर, समुद्र हर उस जगह पाए जाते हैं और पाए गए हैं जिस जगह की कल्पना की जा सकती है. हां यदि ये किसी शरीर में पाए गए तो इन्हें पेरासाईट बैक्टीरिया कहा जाएगा. मानव शरीर में भी ढेरों बैक्टीरिया हैं जो लाभदायक होते हैं. लेकिन अगर हानिकारक बैक्टीरिया हुए तो इंसान रोगी हो जाता है.
माइक्रोफंगस
माइक्रोफंगस
# फंगस –
जिस तरह वायरस और विषाणु सूक्ष्म-जीव हैं, उसी तरह फंगस सूक्ष्म-वनस्पति है.


# 2 – अंब्रेला टर्म मतलब यूं भी कि,

यूटीआई मूत्र पथ में कहीं भी हो सकता है. गुर्दे, यूट्रस, मूत्राशय या यूरेथ्रा में से कहीं भी. ऊपरी भाग (किडनी और यूट्रस) में होने वाले यूटीआई ज़्यादा दुर्लभ हैं, लेकिन वे ज़्यादा गंभीर भी हैं. निचले भाग (मूत्राशय और यूरेथ्रा) में होने वाले यूटीआई तुलनात्मक रूप से आम तो हैं लेकिन फिर घातक भी तुलनात्मक रूप से कम हैं.
UTI - 1



# लक्षण -

जैसा कि हमने बताया कि यूटीआई एक अंब्रेला टर्म है. इसलिए ही इसके लक्षण भी दो बातों पर निर्भर हैं – पहला वो किस माइक्रोब से हुआ है दूसरा वो मूत्र मार्ग के किस हिस्से में हुआ है.
निचले भाग (मूत्राशय और यूरेथ्रा) के यूटीआई के लक्षणों में शामिल है –
- पेशाब करते वक्त जलन महसूस होना. - पेशाब करने की आवृति में वृद्धि होना लेकिन हर बार बहुत कम मात्रा में पेशाब होना. - पेशाब के साथ खून का निकलना. - चाय या कोला के रंग का मूत्र निकलना. - मूत्र में तीव्र गंध का होना. - महिलाओं के पेट के सबसे निचले भाग में दर्द होना. - पुरुषों के मल-द्वार में दर्द होना.
ऊपरी भाग के यूटीआई गुर्दे (किडनी) को प्रभावित करते हैं. ये यूटीआई कभी-कभी बहुत खतरनाक हो जाते हैं. कभी-कभी है इन्फेक्शन बढ़ के, या बेक्टीरिया फैल के, किडनी से खून तक पहुंच जाते हैं. और इससे रोगी की मौत भी हो सकती है.
UTI - 2

ऊपरी भाग (किडनी और यूट्रस) के यूटीआई के लक्षणों में शामिल हैं:
- पीछे के ऊपरी हिस्से में दर्द और सूजन - कंपकपी - बुखार - जी मचलना - उल्टी



# उपचार -

यूटीआई का उपचार भी इसके कारणों पर ही निर्भर करता है. चूंकि ज़्यादातर यूटीआई बैक्टीरियल होते हैं इसलिए एंटीबायोटिक से इनका इलाज हो जाता है. लेकिन डॉक्टर ही ये निर्धारित करने में सक्षम होंगे कि आपको क्या ट्रीटमेंट दिया जाए. क्यूंकि वायरस के चलते यूटीआई होने पर एंटी-वायरल और फंगस के चलते यूटीआई होने पर एंटी-फंगल ट्रीटमेंट किया जाता है और ये तीनों ही ट्रीटमेंट बिल्कुल अलग हैं.


# यूटीआई का डायग्नॉसिस -

यदि ऊपर दिए गए कोई भी लक्षण लगते हैं तो व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. यूटीआई के डायग्नॉसिस के लिए मूत्र परीक्षण की आवश्यकता होती है.
# क्लीन कैच -
मूत्र परिक्षण के लिए सेंपल ‘क्लीन कैच’ होना चाहिए. क्लीन कैच मतलब मूत्र प्रवाहित करते हुए शुरूआती या आखरी प्रवाह को एकत्रित नहीं करना है. केवल बीच वाले प्रवाह को एकत्रित करने से शरीर की बाहरी त्वचा में उपस्थित माइक्रोब्स से सेंपल प्रदूषित नहीं होता.
# यूरिन कल्चर -
इसके बाद ‘यूरिन कल्चर’ किया जाएगा. यूरिन कल्चर मतलब उसे कुछ देर के लिए छोड़ दिया जाएगा, ताकि उसमें उपस्थित बैक्टीरिया या फंगस को फलने फूलने का समय मिले और डायग्नॉसिस में उनकी पुष्टि हो सके.
अगर बैक्टीरिया या फंगस के बदले इन्फेक्शन किसी वायरस के चलते होनी की आशंका है तो कई तरह के विशिष्ट परीक्षणों की ज़रूरत पड़ सकती है.
अगर ऊपरी भाग का यूटीआई होने की आशंका है तो ब्लड-टेस्ट भी किया जा सकता है.


# यूटीआई के खतरे निम्न कुछ कारकों के चलते बढ़ जाते हैं -

# उम्र यूटीआई रोग में सबसे अहम भूमिका अदा करती है. जितनी अधिक उम्र होगी, यूटीआई के होने की संभावना उतनी अधिक होगी.
# आरामतलबी या लंबे समय तक बेड रेस्ट के चलते शरीर की गतिशीलता में कमी आना. ये ‘बिस्तर में पड़े रहना’, बुरी आदत के चलते भी हो सकता है और हो सकता है कि बीमारी या किसी ऑपरेशन के चलते डॉक्टर ने आपको आराम करने को कहा है.
# यदि पथरी की समस्या है/थी तो साथ में यूटीआई के होने की संभावना भी बढ़ जाती है.
# पहले कभी यूटीआई हो चुका है तो उसके दोबारा होने की संभावना अधिक होती है.
# मूत्र-पथ (यूरिनेरी ट्रैक्ट) में किसी अवरोध के चलते - जैसे प्रोस्टेट ग्लैंड का बढ़ जाना, गुर्दे की पथरी, और कुछ विशिष्ट तरह के कैंसर.
# मधुमेह/डायबिटीज़
# गर्भावस्था में भी यूटीआई होने का खतरा बढ़ जाता है.
# जन्म से ही कोई असामान्यता.


# यूटीआई से बचाव -

कई ऐसे काम करके आप यूटीआई के खतरे को कम कर सकते हैं -
# रोजाना छह से आठ गिलास पानी पीएं.
# लंबे समय तक पेशाब को रोककर न रखें.
# दिनचर्या और खान पान को नियमित रखें.
# साफ़ अंडरगारमेंट्स पहनें. सिंथेटिक और लेसी अंडरवेयर न पहनें. बहुत कसे हुए और पोलिएस्टर जैसे चिपकने वाले मटेरियल से बने अंडरगारमेंट्स (खास तौर पर अंडरवेयर) न पहनें. कॉटन अंडरवेयर सबसे बेहतरीन विकल्प है.
# प्राइवेट पार्ट्स की साफ़ सफाई रखें. अपने आगे के हिस्से की सफाई पहले करें और पीछे की बाद में, जिससे शौच से होने वाले संक्रमण से बचा जा सके.
# सेक्स के बाद एक बार पेशाब ज़रूर कर लें, चाहे प्रेशर हो या नहीं. संभव हो तो नहा भी लें.


यूटीआई के जुड़े कुछ और फैक्ट्स जो आपको इसके बारे में और जागरूक करेंगे -
# पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यूटीआई होने की संभावना 8 गुना अधिक होती है.
# लोगों को एक से ज़्यादा बार भी यूटीआई हो सकता है.
# बहुत से लोग ऐसा मानते हैं कि क्रैनबेरी से यूटीआई सही हो जाता है. ये एक ग़लतफ़हमी है. हां लेकिन ये भी सही है कि यदि अभी यूटीआई नहीं हुआ है तो क्रैनबेरी उसके होने की प्रायिकता कम कर देता है.


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