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जब अटल ने इंदिरा से कहा, 'पांच मिनट में आप अपने बाल तक ठीक नहीं कर सकतीं'

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के किस्से देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ भी हैं, उनकी बेटी इंदिरा गांधी के साथ भी हैं, इंदिरा के बेटे राजीव गांधी के साथ भी हैं और देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तो हैं ही.

इंदिरा अपने समय की सख्त छवि वाली नेता रही हैं. संसद में उन्हें घेरना आसान नहीं होता था, लेकिन अटल ये काम बखूबी कर लेते है. अटल और इंदिरा का एक किस्सा है साल 1970 का. तब भाजपा नहीं, जनसंघ हुआ करता था और अटल सांसद थे.

26 फरवरी 1970 को इंदिरा ने सदन में एक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भारतीयता के मुद्दे पर जनसंघ को घेरा था. इंदिरा ने कहा, ‘मैं जनसंघ जैसी पार्टी से पांच मिनट में निपट सकती हूं.’ इंदिरा का ये बयान अटल को अच्छा नहीं लगा.

जवाब में अटल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री महोदया कहती हैं कि वो जनसंघ से पांच मिनट में निपट सकती हैं. क्या कोई लोकतांत्रिक प्रधानमंत्री ऐसा बोल सकता है? मैं कहता हूं कि पांच मिनट में आप अपने बाल भी ठीक नहीं कर सकती हैं. फिर हमसे कैसे निपटेंगी!’

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इसके बाद अटल ने इसी बहस में इंदिरा के पिता पंडित नेहरू का ज़िक्र किया. अटल ने कहा, ‘जब नेहरूजी गुस्सा होते थे, तो वो कम से कम अच्छा भाषण दिया करते थे. हम उनकी चुटकी लेते थे. लेकिन हम इंदिराजी के साथ ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि वो खुद गुस्सा हो जाती हैं.’

जिस मुद्दे पर बहस हो रही थी, वो थी जनसंघ की ‘भारतीयता’ की अवधारणा. इस पर अटल ने इंदिरा को जवाब दिया, ‘वह भारतीयता के मायने ठीक से नहीं समझती हैं. भारतीयता सिर्फ मुस्लिमों से जुड़ी नहीं है. इसमें 52 करोड़ भारतवासी समाहित हैं.’

वैसे अटल और इंदिरा के बीच इस तरह की बहसें संसद और संसद के बाहर आम रहीं. एक मौके पर अटल ने इंदिरा सरकार को ‘सपेरे’ की संज्ञा देते हुए कहा था कि जैसे सपेरा हमेशा अपने सांप को बक्से में बंद रखता है, वैसे ही ये सरकार समस्याओं को एक बक्से में बंद रखती है और सोचती है कि ये अपने आप हल हो जाएंगी.

ये किस्सा किंगशुक नाग की अटल पर लिखी किताब ‘अटल बिहारी वाजपेयी: अ मैन फॉर ऑल सीज़ंस’ से लिया गया है.


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