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भारत में ओबामा जैसा कूल लीडर सिर्फ एक है, और वो मोदी नहीं केजरीवाल है

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हम लोग भारत को विश्व गुरु बताते हैं. मोदी ने तो कह दिया कि गणेश जी को हाथी की सूंड लगाते हुए हमने सर्जरी इजाद कर ली थी. लेकिन आज के टाइम विश्व गुरु-वुरु कोई नहीं समझता. politics में वर्ल्ड लीडर कौन है? ये मोटी बात है. और वो एक ही है. अमेरिका. चाहे उसे वर्ल्ड लेवल का गुंडा कह दो या दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में दादागिरी करने वाला.

चूंकि हम भारतीय संस्कृति वाले चमत्कार को ही नमस्कार करते हैं इसलिए तमाम नरसंहारों और करोड़ों लोगों की हत्याओं के दोषी इस मुल्क के राष्ट्रपतियों को नमस्कार.

अमेरिकी राजनेताओं और इस टाइम में बराक ओबामा की प्रोफाइल में बहुत सी चीजें हैं जो दुनिया के किसी देश के राष्ट्राध्यक्षों में नहीं हैं. इन्हीं में से एक है कॉमेडी.

अपने मोदी समेत कोई वर्ल्ड लीडर नहीं हैं जो कूल चीजें करते हों. जैसे कि अमेरिकी करते हैं. वो भी कार्यकाल में रहते हुए. वे स्टैंड अप कॉमेडी करते हैं. स्पूफ वीडियो का हिस्सा बनते हैं. कॉमेडियन्स को इंटरव्यू देते हैं और अपनी फजीती करवाते हैं. और तो और अपना रोस्ट करवाते हैं, और दूसरों का रोस्ट करते हैं.

याद रखिए रोस्ट कॉमेडी की सबसे आपत्तिजनक विधा है. अर्जुन कपूर, रणवीर सिंह और करण जौहर पर एआईबी रोस्ट इवेंट में हिस्सा लेने के लिए केस हो गया था. लेकिन अमेरिकी लीडर ऐसा करते हैं.

अभी सोमवार की ही बात ले लीजिए. एक वीडियो रिलीज हुआ है जिसमें अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जो बाइडेन एक स्पूफ वीडियो में नजर आ रहे हैं. कॉमिक एक्टर एडम डवाइन और बाइडेन इस कॉमेडी वीडियो में साथ नजर आते हैं. डवाइन इसमें एक कॉलेज पार्टी में बिन बुलाए जाते हैं और उसमें उनके साथ होते हैं बाइडेन.

एक वाइस-प्रेसिडेंट का प्रोटोकॉल तोड़कर किसी कॉमेडी वीडियो में हिस्सा लेने का क्या मकसद हो सकता है? गंभीर मकसद है. दरअसल वे इसमें ये संदेश देते हैं कि कॉलेज जाने वाले युवाओं को कैंपस में जब भी sexual assault होता दिखे तो पूरी तत्परता से उसकी जानकारी देनी चाहिए. इसके लिए एक ऑनलाइन विकल्प भी दिया जाता है.

दरअसल बीते दिनों में अमेरिका में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी का यौन उत्पीड़न केस बहुत चर्चा में रहा. यहां के एक स्टूडेंट और एथलीट एलन टर्नर पर केस हुआ था. उसने नशे में अचेत एक लड़की पर यौन उत्पीड़न किया था. टर्नर को छह महीने की जेल हुई. ऐसे मामलों में स्टूडेंट्स में जागरूकता फैलाने के लिए वाइस-प्रेसिडेंट ने ऐसे कॉमेडी वीडियो का हिस्सा बनने और एक्टिंग करने का रास्ता चुना जिसमें ज्यादा से ज्यादा नई पीढ़ी की रुचि है.

जैसे 2014 में बराक ओबामा ने ऐसा किया था. राष्ट्रपति होने के बावजूद वे ज़ैक गैलिफियानकिस के शो Between Two Ferns में गए जहां हर गेस्ट को बहुत असहज और बेइज्ज़त करने वाले ट्रीटमेंट से गुजरना पड़ता है. किसी राजनेता का इसमें हिस्सा लेना किसी बुरे सपने जैसा है. लेकिन ओबामा ने इसमें हिस्सा लिया क्योंकि उन्हें जनता को अपनी सरकार की हेल्थकेयर से जुड़ी वेबसाइट के बारे में बताना था. उन्होंने यहां कहा कि अब ये वेबसाइट बहुत अच्छे तरीके से काम कर रही है और लोग अपनी स्वास्थ्य समस्याओं, इंश्योरेंस को लेकर इस पर जा सकते हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस साल होने जा रहे चुनावों में डैमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन भी पिछले महीने इसी शो पर गई थीं. उन्हें चुनाव प्रचार करना था और चाहे इसके लिए एक वर्ल्ड लीडर के तौर पर अपने कद को छोटा ही क्यों न करवाना पड़े.

रोस्ट जैसी कॉमेडी की विधा जिसमें कोई भी आसानी से बुरा मान जाता है, वो भी अमेरिका में हर साल राजनेताओं के बीच होती है. ओबामा जब सिर्फ सेनेटर थे तब एक फाउंडेशन के डिनर में सेनेटर जॉन मैक्केन ने ओबामा को रोस्ट किया था.

हर साल यहां White House Correspondents Dinner होता है जो राष्ट्रपति भवन कवर करने वाले पत्रकारों की संस्था आयोजित करती है. इसमें राष्ट्रपति भी भाषण देते हैं जिसमें पत्रकारों, राजनेताओं, सेलेब्रिटीज़, मसलों पर जोक होते हैं. ये रोस्ट की शक्ल में ही होता है.

पिछले साल इस डिनर इवेंट में ओबामा का ये गैग बहुत मज़ेदार रहा था. लोटपोट करने वाला. लेकिन तमाम विषयों पर आलोचनात्मक टिप्पणी भी इसमें थी.

इस साल के आयोजन में ओबामा ने राष्ट्रपति कार्यकाल के बाद अपने भविष्य, खुद को कठपुतली कहलाए जाने, हिलेरी क्लिंटन, डोनल्ड ट्रंप, 2016 के राष्ट्रपति चुनावों, मीडिया व जर्नलिज़्म और जो बाइडेन पर जुमले कहे थे.

वे Comedians in Cars Getting Coffee शो में नजर आए जो बहुत informal था. जिसमें जाने-माने कॉमेडियन जैरी साइनफील्ड उनसे ये तक पूछ लेते हैं, “आपके ड्रॉअर में सारी अंडरवियर क्या एक ही ब्रांड एक एक ही रंग की हैं.”

इस तरह का कूल स्वभाव और कॉमेडी अभी तक इंडिया में कोई नहीं कर पाया है. खासकर नरेंद्र मोदी जो पीएम हैं. वे जब सम्मेलनों में मिलते हैं तो ओबामा से गले मिलते हैं. याराना दिखाते हैं. लेकिन मोदी, ओबामा और अमेरिकन नेताओं जैसी इन कम्युनिकेशन स्किल्स में पूरी तरह पीछे हैं. पीएम बनने के बाद उन्होंने मुश्किल से एक-दो इंटरव्यू दिए हैं और उनमें भी उनका मजाक उड़ाना तो दूर आलोचना पूरी तरह गायब है. सारे सवाल प्रायोजित लगते हैं. चाहे अपनी नीतियों के बारे में बड़ी संख्या में जनता को बताने के लिए किसी कॉमेडी शो में जाना पड़े, तो मुश्किल ही है कि वे कभी जाएंगे.

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