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शी- नेटफ्लिक्स वेब सीरीज़ रिव्यू

मुंबई में एक बड़ा ड्रग पेडलर है सस्या. उसकी सिर्फ एक कमज़ोरी है लड़की या वेश्या (प्रॉस्टिट्यूट). एक रात वो वेश्यालय पहुंचता है, लड़की चुनने के लिए. दलाल उसे 8-10 लड़कियां दिखाता है, जो उसे ठीक नहीं लगती. फाइनली वो सस्या को दो पार्ट-टाइम ‘धंधा’ करने वाली लड़कियां दिखाता है. इनमें से एक लड़की है भूमि, जो सस्या को उकसाती और चैलेंज करती है. वो कहते हैं न सेक्स सिर्फ फिज़िकल प्लेज़र नहीं है, पावर गेम है. इन्हीं चक्करों में सस्या भूमि को अपने साथ लेकर जाता है. उसी रात पुलिस होटल पर रेड मारकर सस्या को गिरफ्तार कर लेती है.

ये ओपनिंग सीक्वेंस है नेटफ्लिक्स पर आई लेटेस्ट वेब सीरीज़ ‘शी’ (She) का. ये शो काफी चर्चा में है क्योंकि इससे इम्तियाज़ अली और ‘अनारकली ऑफ आरा’ फेम अविनाश दास जैसे फिल्ममेकर्स जुड़े हुए हैं. इम्तियाज़ ने इसे दिव्या जौहरी के साथ मिलकर लिखा है. डायरेक्ट किया है आरिफ अली (लेकर हम दीवाना दिल) और अविनाश दास की जोड़ी ने. किसी महिला को संबोधित करने के लिए जिस सर्वनाम का इस्तेमाल किया जाता है, उसी के ऊपर इस सीरीज़ का नाम रखा गया है ‘शी’. और जिस ‘शी’ की बात इस सीरीज़ में हो रही है, उसी का नाम है भूमिका परदेशी उर्फ भूमि, जिसका ज़िक्र हमने पहले किया था.

उस शेडी होटल में सस्या को उकसाती भूमि.
उस शेडी होटल में सस्या को उकसाती भूमि.

अब बात कर लेते हैं इस सीरीज़ की मोटा-मोटी कहानी के बारे में. इस रिव्यू की शुरुआत में हमने आपको सीरीज़ की ओपनिंग सीक्वेंस का सिर्फ एक पहलू बताया था. दूसरा पहलू ये है कि भूमि मुंबई पुलिस में कॉन्सटेबल है. उसके जिम्मे रजिस्टर के पन्नों पर लाइन खींचना और थाने की चाय-पानी का हिसाब रखने जैसे काम हैं. इन चीज़ों से फ्री होकर वो अपने घर जाती है, जहां बूढ़ी और बीमार मां उसका इंतज़ार कर रही होती है. उसकी एक छोटी बहन है रूपा, जिसकी लाइफ स्टाइल से परेशान रहने के बावजूद भूमि कहीं न कहीं उसके जैसी बनना चाहती है. भूमि का पति भी है, जिसका घर छोड़कर वो आ चुकी है. क्योंकि उसके पति को लगता है कि वो बिस्तर में बहुत ‘ठंडी’ है. एक दिन नार्कोटिक्स डिपार्टमेंट का ऑफिसर जेसन फर्नांडिज़ भूमि को देखता है और उसे एक सीक्रेट मिशन में शामिल कर लेता है. इस मिशन के लिए भूमि को वेश्या बनकर सस्या को पकड़वाना है.

लड़की एक किरदार दो.
लड़की एक, किरदार दो.

भूमि ये मिशन तो सही से कंप्लीट कर लेती है लेकिन इस दौरान उसके और सस्या के बीच एक साइकोलॉजिकल कनेक्ट बन जाता है. ऑलमोस्ट वैसे ही जैसे आंग ली की ‘लस्ट, कॉशन’ में होता है. सस्या, भूमि से बहुत अट्रैक्ट हो जाता है. उसे लगता है कि वो भूमि जैसी ऐवरेज लड़की को जैसे देखता है वैसे कोई और नहीं देख सकता. अपनी इन्हीं तरह की बातों से वो भूमि के दिमाग में घुस जाता है. सस्या भूमि के चक्कर में इतना क्रेज़ी हो जाता है कि उसके सामने बैठते ही वो पूछताछ में सारी ज़रूरी इंफॉरमेशन पुलिस को दे देता है. इसी पूछताछ में नायक का नाम सामने आता है. नायक के बारे में पुलिस को ये भी नहीं पता कि वो आदमी है भी कि नहीं. लेकिन नायक इंडिया में ड्रग्स की बहुत बड़ी खेप जमा करके मुंबई को ड्रग कैपिटल बनाना चाहता है. अब नार्कोटिक्स डिपार्टमेंट नायक को पकड़ने में जुट जाता है. सस्या की ही तरह इस नायक की भी एक ही कमज़ोरी है- लड़की. पुलिस के नायक को पकड़ने और भूमि की सेल्फ डिस्कवरी की कहानी है ‘शी’.

इंटररोगेशन के दौरान भूमि के दिमाग में घुसने की कोशिश करता सस्या.
इंटररोगेशन के दौरान भूमि के दिमाग में घुसने की कोशिश करता सस्या.

ये सीरीज़ पूरी तरह से भूमि के कैरेक्टर के बारे में है. भूमि वो लड़की है, जिसके ‘भीतर क्रांति और मुंह पर शांति’ है. इसमें उसकी सेक्शुएलिटी और सोशल ट्रीटमेंट का बड़ा रोल है. ऊपर से मेल डॉमिनेटेड डिपार्टमेंट वाली नौकरी तो है ही. इस भूमि का रोल किया है अदिति पोहंकर ने. वो रितेश देशमुख की मराठी फिल्म ‘लय भारी’ के लिए जानी जाती हैं. कहने को तो वो इस सीरीज़ की नायक हैं लेकिन उनके किरदार को सीरीज़ हमेशा नायिका की ही तरह ट्रीट करती है. इसमें ज़ाहिर तौर पर अदिती की कोई गलती है नहीं है. ये राइटरों का फैलाया रायता है, जिसे वो चाहकर भी नहीं समेट पातीं. लेकिन जब तक आप उनकी परफॉरमेंस में नुख्स निकालने के ही मकसद से सीरीज़ देखने नहीं बैठेंगे, तब तक सीरीज़ उनकी परफॉरमेंस की बदौलत ही देखने लायक बनी रहती है. उनके घर से लेकर, कपड़े, दुविधा, एक्सप्रेशंस और चुप्पी सबकुछ सीरीज़ को एक अलग लेवल के रियल स्पेस में लेकर जाते हैं.

परेल के एक चॉल में रहने वाली पुलिस कॉन्स्टेबल भूमिका परदेशी उर्फ भूमि.
परेल के एक चॉल में रहने वाली पुलिस कॉन्स्टेबल भूमिका परदेशी उर्फ भूमि.

जिस सस्या से मुलाकात भूमि को झकझोर कर रख देती है, उसका रोल किया किया ‘गली बॉय’ वाले विजय वर्मा ने. इन्हें परफॉर्म करते देखकर आप समझ जाते हैं कि ये आदमी वो नहीं कर रहा, जो इसे कागज़ पर लिखकर दिया गया था. और इनका हैदराबादी एक्सेंट, तो माशाल्लाह! विजय की परफॉरमेंस की वजह से इस सीरीज़ को बड़ी वजनदार शुरुआत मिलती है लेकिन एक समय के बाद वो दरकिनार कर दिए जाते हैं. ये चीज़ बड़ी जोर से खलती है क्योंकि सारा एक्साइटमेंट मर जाता है. सीरीज़ का भी और देखने वालों का भी. कई बार औसत कॉन्टेंट को भी एक्टर्स अपनी परफॉरमेंस से खींचकर अलग लेवल पर लेकर चले जाते हैं. विजय यहां वो चीज़ कर सकते थे, अगर उन्हें और स्क्रीन टाइम दिया जाता तो.

ये रहा अपना तिकड़मबाज सस्या, जिसे लगता है कि वो इस कहानी का हीरो है.
ये रहा अपना तिकड़मबाज सस्या, जिसे लगता है कि वो इस कहानी का हीरो है.

जेसन फर्नांडिज़ का रोल किया है हॉटस्टार सीरीज़ ‘सिटी ऑफ ड्रीम्स’ में दिख चुके विश्वास किनी ने. ये वो किरदार है, जो दिखता तो सीनियर और मजबूत है लेकिन कुछ चीज़ें ऐसी करता हैं, जिस पर आपको विश्वास नहीं होता. जैसे सीरीज़ में एक सीन है, जहां सस्या कहता है कि उसके सामने भूमि को ले आओ फिर वो सारे जवाब देगा. ये आदमी अपने सीनियर से लड़कर भूमि को लेकर आता है. बड़े सुविधाजनक (कंवीनिएंट) तरीके से वो सब कर तो दिया जाता है लेकिन आप इस सीन के बाद उस किरदार का साथ छोड़ देते हैं.

जेसन फर्नाांडिज़ उर्फ विश्वास किनी. इस आदमी के साथ सीरीज़ ने सबसे बुरा बर्ताव किया है.
जेसन फर्नाांडिज़ उर्फ विश्वास किनी. इस आदमी के साथ सीरीज़ ने सबसे बुरा बर्ताव किया है.

सबसे मज़ेदार किरदार है भूमि की बहन रूपा का. रूपा से उसकी मां और बहन दोनों परेशान हैं. क्यों- क्योंकि वो अपने हिसाब से चीज़ें करती है. बने-बनाए ढर्रे पर नहीं चलती. जब मां पूछती है कि लोग क्या कहेंगे, तो कहती है- ‘कह देना लड़की हाथ से निकल गई’. उसके फंडे भी स्प्राइट की टैगलाइन की तरह हैं- क्लीयर. ये रोल किया है शिवानी रंगोले ने. शिवानी अपनी चीज़ें बड़े एफर्टलेस तरीके से करती दिखाई देती हैं, इसलिए काफी रिलेटेबल हो जाती हैं. उस लड़की को पता है कि वो इतनी सुंदर है कि उसे हर मर्द देखता है लेकिन उसे ये भी पता है कि उस अटेंशन को कैसे हैंडल करना है. ये कैरेक्टर जितनी बार दिखता है, आप एंजॉय करते हैं.

 छोटी बहन रूपा के साथ भूमि. भूमि के मेकअप वाले सलाह पर रूपा कहती है, अब तू बताएगी मेक अप कैसे करते हैं.
छोटी बहन रूपा के साथ भूमि. भूमि के मेकअप वाले सलाह पर रूपा कहती है, ‘अब तू बताएगी मेक अप कैसे करते हैं’.

सीरीज़ सबसे ज़्यादा खटकने वाली चीज़ है इसके डबल स्टैंडर्ड्स. सबसे पहले तो ये कहानी को ऐसे अप्रोच करती है, जैसे वुमन एंपावरमेंट की सारी ज़िम्मेदारी इसी के कंधों पर है. वहीं दूसरी तरफ ये अपनी फीमेल लीड को काफी कंफ्यूज़िंग तरीके से लेकर चलती है. ये किरदार एक कॉन्स्टेबल का है, जिसके आस पास के मर्द हमेशा यही जताने-बताने की कोशिश में लगे रहते हैं कि पुलिस की नौकरी महिलाओं के लिए नहीं है. उसे एक सीक्रेट में मिशन में ये कहकर शामिल किया जाता है कि वो ‘फेमिनीनली अट्रैक्टिव’ नहीं है. उसे उस मिशन में ही सिर्फ इसलिए लिया जाता है क्योंकि वो एक महिला है. एक महिला ही तो वेश्या का रूप धारण करके हनी ट्रैप बिछाकर एक बड़े क्रिमिनल को पकड़वा सकती है न! लेकिन सीरीज़ अपने इस कदम को सही साबित करने के लिए भूमि की सेक्शुएलिटी का मसला उठाती है. ये दिखाती है कि जिस समस्या ने भूमि को परेशान कर रखा है, उससे वो इन्हीं हनी ट्रैप्स और मिशन की मदद बाहर निकल सकती है. भूमि कॉन्फिडेंट होती है लेकिन उसमें भूमि से ज़्यादा सस्या का रोल है. ये सीरीज़ हमें बताती है.

इस कॉन्स्टेबल को मिशन के लिए सिर्फ इसलिए चुना जाता है क्योंकि ये अट्रैक्टिव नहीं है. ये बात सीरीज़ के बैकड्रॉप में काफी कॉन्ट्रडिक्ट्री है.
इस कॉन्स्टेबल को मिशन के लिए सिर्फ इसलिए चुना जाता है क्योंकि ये अट्रैक्टिव नहीं है. ये बात सीरीज़ के बैकड्रॉप में काफी कॉन्ट्रडिक्ट्री है.

‘शी’ रेगुलर सीरीज़ से अलग यूं है कि ये हमारी सोसाइटी में जो सेक्शुएलिटी को लेकर टैबू है, उस पर बात करती है. हमारे यहां महिलाओं के केस में सेक्स का मतलब सिर्फ बच्चा पैदा करने से है. उसे इच्छा या प्लेज़र की तरह देखा ही नहीं जाता. आपको अलाउड ही नहीं है कि आप अपनी सेक्शुएलिटी के साथ प्रयोग कर सकें, या जो करना चाहें कर सकें. यहां ‘शी’ इस मसले को उठाने भर का काम करती है, उस कॉन्सेप्ट में ज़्यादा कुछ जोड़ती नहीं. इस सीरीज़ में एक सीन है, जहां भूमि धीली नाइटी पहनकर आइने के सामने खड़ी होती है और अपने कपड़ों को स्थान विशेष से खींचकर टाइट करके देखती है. वो एक बड़ा मोमेंट होता है भूमि के लिए क्योंकि उसे खुद पर एक तरह का भरोसा आता है कि वो भी अट्रैक्टिव दिख सकती है. इम्तियाज़ अली अपने किरदारों के दिमाग में घुसते हैं और वो बातें निकालकर ले आते हैं, जिसके बारे में इंसान सिर्फ खुद से बात कर सकता है. वो चीज़ यहां भी है लेकिन उसको ज़्यादा एक्सप्लोर करने की कोशिश नहीं की गई है.

ये वो बड़ा मौका है, जब भूमि अपनी सेक्शुएलिटी को लेकर थोड़ी गंभीरता दिखाती है.
ये वो बड़ा मौका है, जब भूमि अपनी सेक्शुएलिटी को लेकर थोड़ी गंभीरता दिखाती है.

ये सीरीज़ दिखना किसी थ्रिलर की तरह चाहती है, जिसमें एक बड़े मसले पर बात हो रही है. इसलिए अपने बैकग्राउंड स्कोर से माहौल बनाने की कोशिश करती है. छोटे-छोटे कट्स वाले शॉट में खेलती है. हर एपिसोड ऐसे मोड़ पर खत्म किए गए हैं कि आप अगला एपिसोड देखने के लिए बेताब हो जाएं. लेकिन ऐसा हो सिर्फ एक एपिसोड में पाता है. सीरीज़ देखकर बताइए कि आपको ऐसा किस एपिसोड में लगा. आप महिला सशक्तिकरण की बात कर रहे हैं और आपके दो मेन विलेन की इकलौती कमज़ोरी ही लड़की हैं. ये चीज़ सीरीज़ के कॉज़ तो धक्का देती ही है साथ में दोहराव जैसा भी लगता है. ‘शी’ की सबसे इंट्रेस्टिंग बात है सस्या और भूमि के बीच का इक्वेज़न, जिसे आप ‘रमन राघव 2.0’ से जोड़कर देख सकते हैं.

सस्या और भूमि के बीच जो कुछ भी होता है, वो इस सीरीज़ का बेस्ट पार्ट है.
सस्या और भूमि के बीच जो कुछ भी होता है, वो इस सीरीज़ का बेस्ट पार्ट है.

‘शी’ को देखने का ओवरऑल अनुभव ये है कि ये इंडियन कॉन्टेंट के लिहाज़ से थोड़ा नयापन देती है. शुरू ऐसे होती है, जैसे सबकुछ तोड़फोड़ देने वाली है. हालांकि शुरुआती तीन-चार एपिसोड्स के बाद थकने लगती है. लेकिन तब तक आप भूमि की कहानी में इतना घुस चुके होते हैं कि बीच से वापस आ पाना संभव नहीं होता, इस प्रेशर में आप सातों एपिसोड खत्म कर लेते हैं. आखिरी एपिसोड में ये क्लिफहैंगर टाइप समथिंग क्रिएट करने की कोशिश करती है लेकिन ऐसा कुछ छोड़कर नहीं जाती, जिसके लिए आप इसके सेकंड सीज़न का इंतज़ार करते रहें.


 

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