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लॉकडाउन से हवा इतनी साफ हो गई कि बिहार के गांव से माउंट एवरेस्ट दिखने लगा!

लॉकडाउन में लोगों को भले ही लाख दिक्कतें हो रही हों, लेकिन प्रकृति को राहत का मौका मिल रहा है. प्रदूषण न होने की वजह से काफी हद तक हवाएं साफ हो गई हैं. इतनी साफ कि भारत के गांव से 200 किलोमीटर दूर माउंट एवरेस्ट दिखाई देने का दावा किया गया. ये गांव बिहार के सीतामढ़ी ज़िले में आता है. नाम सिंहवाहिनी है. यहां ग्राम पंचायत की मुखिया रितु जायसवाल ने खुद ये तस्वीर डाली है.

रितु ने 4 मई को एक फोटो डालते हुए बताया,

‘हम सीतामढ़ी जिले के अपने गांव सिंहवाहिनी में अपनी छत से माउंट एवरेस्ट देख सकते हैं आज. प्रकृति खुद को संतुलित कर रही है. नेपाल के नज़दीक वाले पहाड़ तो बारिश के बाद साफ मौसम में कभी-कभी दिख जाते थे. असल हिमालय के दर्शन अपने गांव से आज पहली बार हुए.’

तस्वीर सुंदर है. प्यारी है. शांति और सुकून दे रही है. सफेद पहाड़ खुशी दे रहे हैं.

रितु ने अगले ट्वीट में जानकारी दी कि उनके गांव से माउंट एवरेस्ट की हवाई दूरी 194 किलोमीटर है. आगे ये भी बताया कि उन्होंने कई सारी तस्वीरें लीं, लेकिन जो उन्होंने पोस्ट की, वो सबसे बढ़िया थी.

और भी कई बातें बताईं

रितु की तस्वीर पर लोगों ने दनादन रिएक्शन दिए. एक ने पूछा कि क्या ये तस्वीर लेने से पहले उनके गांव में बारिश हुई थी. रितु ने जवाब में कहा कि बारिश हुई ज़रूर थी, लेकिन पहले जब कभी भी बारिश हुई, तब भी एवरेस्ट नहीं दिखाई दिया. तब केवल 40 किलोमीटर की दूरी की पहाड़ियां थोड़ी-बहुत दिख पाती थीं, लेकिन पहली बार एवरेस्ट अभी दिखा, जो कि एक चमत्कार है. प्रदूषण न होने की वजह से आसमान साफ हुआ, तभी एवरेस्ट दिखना मुमकिन हुआ.

माउंट एवरेस्ट की ये तस्वीर लोगों को काफी पसंद आ रही है. अभी ये वायरल है.

लोगों को हुआ डाउट

ट्विटर पर लोगों ने सवाल पूछने शुरू किए. कि क्या ये वाकई माउंट एवरेस्ट है? जवाब में रितु ने बताया,

‘हां है. क्योंकि जब हमें हिमालय के बर्फ वाली पहाड़ियां दिखती हैं, तो हम उन्हें ही देख पाते हैं, जो सबसे ऊंची होती हैं. और एवरेस्ट हमारे गांव के नॉर्थ-ईस्ट की तरफ है. ये तस्वीर भी उसी तरफ की है. मेरे पति भी अपने बचपन में 80 के दशक के दौरान गांव से एवरेस्ट देख पाते थे. इसलिए हमें यकीन है कि ये एवरेस्ट है.’

एक IFS (इंडियन फॉरेस्ट सर्विस) अधिकारी हैं प्रवीण कासवान. उन्होंने भी ट्वीट करके कहा कि ये तस्वीर एवरेस्ट की है. लोगों के सवाल के जवाब भी दिए. लगातार चार-पांच ट्वीट किए. एक किताब के दो पन्नों की तस्वीर डाली और कहा कि एवरेस्ट को मुजफ्फरपुर से देखा जा चुका है.

लेखक जॉन की (John Keay) की किताब ‘दी ग्रेट आर्क’ के पन्ने डाले. जिसके मुताबिक-

एंड्रयू स्कॉट वॉ (Andrew Scott Waugh) ने दार्जिलिंग से माउंट एवरेस्ट को देखा था. 1847 के आस-पास. उसी दौरान एंड्रयू के अंडर काम करने वाले जॉन आर्मस्ट्रॉन्ग ने बिहार के मुज़फ्फरपुर से एवरेस्ट को देखा था. उस वक्त तक एवरेस्ट की खोज नहीं हुई थी. तब तक कंचनजंघा को सबसे ऊंची पहाड़ी चोटी माना जाता था. भारत के कई हिस्सों से कंचनजंघा के अलावा एक दूसरी ऊंची चोटी दिख रही थी, इसलिए सवाल खड़े हो रहे थे. खोज की जाती रही और कुछ साल बाद कन्फर्म हुआ कि ये चोटी दुनिया की सबसे ऊंची पहाड़ी चोटी है. इसे नाम दिया गया माउंट एवरेस्ट. सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर. वो भूगोल-शास्त्री थे और भारत के सर्वेयर जनरल भी थे. इन्हीं के बाद एंड्रयू स्कॉट वॉ भारत के सर्वेयर जनरल बने थे. उन्होंने ही सबसे ऊंची पहाड़ी का नाम माउंट एवरेस्ट रखा था.

इस किताब का रेफरेंस देने के अलावा प्रवीण कासवान ने पृथ्वी की गोलाई पर उठ रहे सवाल का जवाब दिया. कई लोगों ने पूछा था कि क्या पृथ्वी की गोलाई के बाद भी माउंट एवरेस्ट सिंहवाहिनी से दिख सकता है? जवाब में प्रवीण ने लिखा,

‘पृथ्वी की गोलाई भी इस जगह (सिंहवाहिनी) से माउंट एवरेस्ट के दृश्य को अलाऊ करती है. लेकिन ऐसा तब ही होता है, जब दृष्टिक्षेत्र (विजिबिलिटी) परमिशन दे. अभी भी मैं ये नहीं कह रहा हूं कि ये एवरेस्ट ही है, लेकिन इसके अलावा और कोई भी ज्यादा सही थ्योरी नहीं मिल रही है.’

इसके अलावा एक यूज़र ने गूगल अर्थ का सहारा लिया. सिंहवाहिनी से एवरेस्ट की तरफ देखने पर क्या दिखेगा, इसकी गूगल अर्थ वाली तस्वीर डाली. साथ ही रितु जायसवाल की तस्वीर को भी पोस्ट किया. दोनों की तुलना की. बताया कि बीच में दिखने वाला पहाड़ एवरेस्ट है और उसके राइट साइड जो दिख रहा है, वो मकालू है.

इस ट्वीट के बाद IFS प्रवीण ने लिखा कि इन सारी बातों से ये साबित होता है कि सिंहवाहिनी से एवरेस्ट ही दिख रहा है.

अभी तक जितनी जानकारी जुटाई गई है, उससे यही पता चल रहा है कि सिंहवाहिनी से दिखने वाली पहाड़ी एवरेस्ट है. गांव के लोगों के मुताबिक, करीब तीन दशक पहले भी एवरेस्ट दिखा था.


वीडियो देखें: लॉकडाउन तोड़ा, तो पुलिस ने ‘नानी’ नहीं, ‘सपना चौधरी’ की याद दिला दी

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