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वो चार हादसे, जिनमें AN 32 एयरक्राफ्ट हादसे का शिकार हो गया था

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भारत में 3 जून 2019 को एक AN 32 प्लेन लापता हो गया. 8 दिन की ज़ोरदार तलाश के बाद 11 जून को प्लेन का मलबा अरुणाचल प्रदेश के एक इलाके में पाया गया. ये भारत में इस तरह का पहला हादसा नहीं था. AN 32 प्लेन के साथ हुई ये अब तक की पांचवी दुर्घटना है.

भारतीय वायुसेना के लिए ये साल हादसों से भरा हुआ रहा है. 3 जून 2019 को हुए हादसे को मिलाकर, ये वायुसेना के विमानों को लगा इस साल का दसवां झटका है. जनवरी से लेकर जून तक एक के बाद एक प्लेन हादसों ने भारतीय वायुसेना के मनोबल को गिरा दिया है. इन 10 हादसों में भारत के अलग–अलग प्लेन क्षतिग्रस्त हुए हैं. जिनमें से एक मिग-21 भी है. कुछ वर्षों के डाटा पर अगर नज़र डाली जाए, तो AN 32 प्लेन इस लिस्ट में काफी बार आया है. आखिर क्या वजह है कि 1980 में खरीदे गए इन विमानों को भारतीय वायुसेना आज भी उड़ाने के लिए मजबूर है. साथ ही साथ ये जानना भी बहुत जरूरी है कि इन हादसों को रोकने के लिए सरकार किस तरह के कदम उठा रही है? क्यों इतनी जद्दोजहद के बाद भी भारत अपने विमानों को खोजने में हर बार नाकामयाब हो रहा है?

भारत में कब, कहां से और कैसे आया ये प्लेन?

इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 1980 में सोवियत यूनियन, यूक्रेन की एंटोनोव कंपनी से 125 AN 32 प्लेन खरीदे गए थे. जिनमें से 104 प्लेन आज भी प्रयोग किए जा रहें हैं. उस वर्ष यूक्रेन ने अलग-अलग देशों को 205 प्लेन बेचे थे. भारत के अलावा 8 देश आज भी इनका इस्तेमाल कर रहें है.

भारत द्वारा खरीदा गया AN 32 प्लेन एक रीईंजन्ड AN 26 है. यानी कि AN 26 के इंजन में बदलाव करके AN 32 का इंजन बना है. AN 32 एक ट्विन ईंजन टर्बोकॉर्प मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है. इसे भारतीय वायुसेना की सेवा में 1984 में शामिल किया गया था. इस एयरक्राफ्ट का प्रयोग लद्दाख और उत्तर-पूर्वी दुर्गम इलाकों में सेना को सामान सप्लाई करने के लिए किया जाता है. ये एयरक्राफ्ट गर्म तापमान और ज्यादा ऊंचाई पर अच्छे टेक ऑफ के लिए जाना जाता है. ये प्लेन 27,000 किलो ग्राम वजन के साथ 530 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ उड़ान भरने में सक्षम है.

पूर्वी लद्दाख के न्योमा लैंडिंग ग्राउंड पर भी AN 32 उतारे जा चुके हैं.
पूर्वी लद्दाख के न्योमा लैंडिंग ग्राउंड पर भी AN 32 उतारे जा चुके हैं.

कब-कब हुआ है ये हादसों का शिकार?

जैसा कि हमने शुरू में ही बताया था AN 32 विमानों के साथ ये पहली दुर्घटना नहीं है. इससे पहले चार बार ऐसा हो चुका है.

# 25 मार्च 1986, अरब सागर

जामनगर की तरफ सोवियत यूनियन से उड़ान भर रहा एक AN 32 प्लेन अरब सागर में अचानक गायब हो गया. ये प्लेन ओमान और मस्कट के रास्ते भारत आ रहा था. इस प्लेन पर तीन क्रू मेंबर्स और चार यात्री थे. हादसे के बाद ये सात लोग कहां गए और प्लेन का क्या हुआ, कुछ पता नहीं चला. आज तक. उड़ान के एक घंटे 18 मिनट के बाद ही ये प्लेन गायब हो गया था. सर्च ऑपरेशन तो किए गए मगर नतीजा कुछ नहीं निकला. ये सोवियत यूनियन से भारत के लिए डिलीवरी फ्लाइट थी. एक ब्रांड न्यू प्लेन देश पहुंचने से पहले ही लापता हो गया.

# 15 जुलाई 1990, केरल

चार साल बाद ही एक और हादसा हुआ. चेन्नई से तिरुवनंतपुरम के लिए जा रहा प्लेन केरल की पॉन्मुंडी पर्वत श्रृंखला में क्रैश हो गया. प्लेन ने नौ बजे उड़ान भरी थी. एक घंटे के बाद ही ये क्रैश हो गया था. इस हादसे में 11 लोग मारे गए थे. पांच भारतीय वायु सेना कर्मचारी थे और छह आम नागरिक.

# 10 जून 2009, अरुणाचल प्रदेश

अभी भारत ने अपने प्लेन अपग्रेड करने शुरू किए ही थे कि अरूणाचल प्रदेश में एक हादसा हो गया. ये प्लेन मेन्चुका अरूणाचल प्रदेश से उड़ान भर चीन बॉर्डर के पास लापता हो गया था. इस दर्दनाक हादसे में 13 लोग मारे गए थे. भारतीय सेना ने कुछ दिनों तक सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन किया. मगर खराब मौसम की वजह से किसी का सुराग नहीं मिलने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बंद कर दिया गया.

# 22 जुलाई 2016, बंगाल की खाड़ी

चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर अपनी साप्ताहिक ट्रिप के लिए जा रहा AN 32 अपने 29 यात्रियों के साथ रडार से गायब हो गया. पिछले हादसे की तरह इस बार भी यात्रियों का कुछ पता नहीं चला. इस हादसे के तीसरे दिन इंडियन नेवी और भारतीय तट रक्षक ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया था. ये इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री रेस्क्यू सर्च ऑपरेशन था. इस सर्च में 16 जहाज, एक पनडुब्बी और छह जहाजों को शामिल किया गया था.

प्लेन ने सुबह 8 बजे चेन्नई के तंबारम एयर फोर्स स्टेशन से पॉर्टब्लेयर के लिए उड़ान भरी थी. 11 बजकर 45 मिनट पर प्लेन पॉर्टब्लेयर में आईएनएस उत्कर्ष इंडियन नेवल एयर स्टेशन पर लैंड करने वाला था. तभी नौ बजकर 12 मिनट पर बंगाल की खाड़ी के ऊपर से प्लेन रडार से गायब हो गया. दो महीने तक सर्च ऑपरेशन चला. कुछ नतीजा न निकलने पर 15 सितंबर 2016 को इसे बंद कर दिया गया. सभी यात्रियों को मृत घोषित कर दिया. इन 29 यात्रियों में छह क्रू मेंबर्स, 11 इंडियन एयर फोर्स के कर्मचारी, दो भारतीय सेना के सिपाही, एक इंडियन नेवी गार्ड, एक इंडियन कोस्ट गार्ड और विशाखापट्टनम से आठ एन ए डी डिफेंस कर्मचारी शामिल थे.

# 3 जून 2019, अरुणाचल प्रदेश

पिछली घटना के तीन साल बाद ही भारत ने अपना AN 32 एक बार फिर खो दिया है. प्लेन ने 3 जून को अपने 13 कर्मचारियों के साथ जोरहाट असम से मेन्चुका के लिए उड़ान भरी थी. भारतीय वायुसेना द्वारा बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन किया गया. 11 जून को लापता हुए इस प्लेन का मलबा नज़र आया. अभी बाकी डिटेल्स आनी बाकी हैं. भारतीय वायु सेना ने प्लेन के बारे में जानकारी देने वाले को 5 लाख का इनाम देने का एलान किया था.


ये स्टोरी दी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रही कामना ने की है.


Video: इंडियन एयर फोर्स का लापता An-32 विमान 8 दिन तक क्यों नहीं मिला?

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