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26 फिल्में जो पहलाज निहलानी और CBFC की बदनाम विरासत लिखेंगी

CBFC के अध्यक्ष पद से पहलाज निहलानी को शुक्रवार को हटा दिया गया है. कार्यकाल पूरा होने से पहले ही. विवाद बहुत हो गए थे. उनकी जगह गीतकार और एडमैन प्रसून जोशी को बोर्ड प्रमुख बनाया गया है. अब निहलानी की विरासत ऐसी है जिसमें कुछ भी प्रशंसनीय नहीं है. उन्होंने और सेंसर बोर्ड ने फिल्मों को सर्टिफिकेट देकर पास करने का सीधा सा काम, ईमानदारी से नहीं किया. बजाय इसके उन्होंने अपनी पॉलिटिक्स, नैतिकता और पूर्वाग्रह फिल्ममेकर्स पर थोपे. फिल्मों के मूल स्वरूप को छेड़ा. बेजां काट-छांट की. कुछ फिल्मों को ब्लैकमेल करने वाले ढंग से रोका.

समाज और बच्चे हमारी फिल्मों से खराब न हो जाएं, दूषित न हो जाएं इसकी भयंकर परवाह करने वाले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के चेयरमैन पहलाज निहलानी ने 1994 में ‘अंदाज’ प्रोड्यूस की थी जिसका एक दृश्य ऊपर फीचर फोटो में देख सकते हैं. इसमें स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाला हमारा नायक (अनिल कपूर) अपनी पत्नी (जूही चावला) के साथ रात में ‘इंटरकोर्स’ करना चाहता है. इसके लिए वो गा रहा है “खड़ा है, खड़ा है, खड़ा है… खोल खोल खोल.” डायरेक्टर डेविड धवन और प्रोड्यूसर निहलानी ने यहां फिल्म देख रहे बच्चों को पता नहीं लगने दिया कि बात क्या हो रही है लेकिन वयस्क दर्शकों ने कामुक इशारों और बातों को अच्छे से समझकर एंजॉय कर लिया. हालांकि फिर भी फिल्म की सीधी आलोचना की जा सकती है कि इस गाने के बोल द्विअर्थी और अश्लील हैं. बिलकुल कहा जा सकता है, सब कुछ व्याख्या पर है.

आज की डेट में यही फिल्म किसी और ने बनाई होती तो दो सौ परसेंट गारंटी है कि ऐसी ही व्याख्या करके निहलानी ने फिल्म को रोक लिया होता और पास करने के लिए निर्माता के सामने शर्त रखी होती कि ये गाना हटाओ और फिल्म पास करवा लो. जो कि नहीं होना चाहिए. चाहे तब निहलानी की फिल्म थी या आज की तमाम फिल्में हैं, सभी में मेकर्स को अपने एक्सप्रेशन की पूरी छूट होनी ही चाहिए. “खड़ा है खड़ा है” भी एक एक्सप्रेशन है और अगर आज सेंसर बोर्ड निहलानी की इसी फिल्म को रोकने की कोशिश करता तो लोग समर्थन में आकर बोलते कि ये सेंसरिंग गलत है. लेकिन ये सब लॉजिक न तो निहलानी ने समझे और न ही बोर्ड ने.

पहलाज निहलानी.
पहलाज निहलानी.

क्योंकि ये वही निहलानी है जिन्होंने ‘उड़ता पंजाब’ में से पंजाब शब्द हटाने की मांग रख दी थी, जिन्होंने एक पोलिटिकल डॉक्यूमेंट्री (Battle of Banaras) फिल्म बैन कर रखी है और दूसरी (An Insignificant Man) के मेकर्स से कहा है कि जो-जो नेता इसमें हैं उनसे एनओसी लेकर आओ, और ये वही निहलानी हैं जो बाबरी मस्जिद ढहाने जैसे भयंकर पोलिटिकल विषय पर फिल्म बना रहे हैं. क्या वे बताएंगे कि वो जब रिलीज होगी तो उसमें बाबरी और अयोध्या जैसे शब्दों को बैन करना चाहिए क्या? या उसमें आडवाणी, मुलायम, राजीव जैसे शब्दों को हटाना पड़ेगा क्या? या घटना से जुड़े हर जीवित व्यक्ति की एनओसी लानी चाहिए क्या?

बहुत साफ देखा जा सकता है कि अपने कार्यकाल में इन लोगों ने अपनी पॉलिटिक्स और पूर्वाग्रहों से काम किया, कला की सेवा तो बड़ी दूर की बात है.  CBFC के बूचड़खाने में फिल्मों के हाथ-पैर, आंख-नाक न जाने क्या-क्या अंग कट जाते हैं. बहुत बार आत्मा भी निकालकर फेंक दी जाती है. निर्देशक सिर नीचे करके आंखों के सामने अपनी कला को कटता देखता है. जिस शब्द और विचार को लिखने में उसे दो साल लगे होंगे, वो बोर्ड के लोग दो सेकेंड में मिटा देते हैं. एक कलाकार के लिए ये आतंकित करने वाला होता है. ये सब लगातार होता रहा और निश्चित है कि अब इन लोगों की विरासत बहुत बदनामी भरी होगी.

एेसी फिल्मों की लिस्ट बहुत लंबी है जिनमें सर्टिफिकेशन के बजाय जैसी सेंसरिंग की गई वो भुलाई नहीं जा सकेगी. लंबे समय तक विवादों में बने रहे निहलानी और बोर्ड की अराजकता देखनी हो तो नीचे दी गई 26 रैंडम फिल्मों और उनके साथ हुए ट्रीटमेंट को देख सकते हैं. क्या काटा गया, क्यों बैन किया गया, क्यों रोका गया, तार्किक, अतार्किक सब समझ आने लगता है. समझ आने लगता है कि क्यों श्याम बेनेगल कमिटी की सिफारिशें जितनी जल्दी लागू हो जाएं उतना ही अच्छा.

1. तापसी पन्नू स्टारर नाम शबाना को यूए सर्टिफिकेट देते हुए तीन सीन काटे गए.

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इनमें एक घरेलू हिंसा का दृश्य था. कथित तौर पर सेंसर बोर्ड परदे पर औरतों से मारपीट करने जैसे सीन दिखाने के खिलाफ है. फिल्म में एक शराब की बोतल वाला सीन हटाया गया. संता-बंता का एक जोक भी डिलीट करवाया गया ताकि कोई भावना आहत न हो. तापसी पन्नू, मनोज वाजपेयी और अक्षय कुमार स्टारर ये फिल्म 31 मार्च को लगी.

2. अहमदाबाद में 2008 में हुए सीरियल बम धमाकों की घटना से प्रेरित आगामी फिल्म ‘समीर’ के एक डायलॉग में से बोर्ड ने ‘मन की बात’ शब्द हटाने के लिए कहा.

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एक सीन में जीशान मोहम्मद का विलेन कैरेक्टर कहता है, “एक मन की बात कहूं, तुम कैरेक्टर अच्छा बना लेते हो.” इसके जवाब में दूसरा लीड कैरेक्टर कहता है, “वैसे सर, चाय से चू** बनाना आप ही से सीखा है!” सीबीएफसी ने स्पष्ट शब्दों में इसे हटाने के लिए कहा क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो शो का नाम भी ‘मन की बात’ है. डायरेक्टर डेक्सिन चहरा के मुताबिक फिल्म को ‘एडल्ट सर्टिफिकेट’ मिला है, फिर भी टॉर्चर और बम धमाके जैसे कई दृश्यों को भी काटने के लिए कहा गया है.

3. सलमान खान और सोनम कपूर स्टारर अपनी फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ में से डायरेक्टर सूरज बड़जात्या को ‘रखैल’ शब्द हटाना पड़ा था.

4. लिपस्टिक अंडर माई बुर्का को सेंसर बोर्ड ने सर्टिफिकेट देने से ही इनकार कर दिया. पहलाज निहलानी ने इसकी जो वजह बताई वो शायद ही किसी गाइडलाइन के मुताबिक थी. उन्होंने इसे ‘लेडी ओरिएन्टेड’ फिल्म कहा.

अर्थ ये लगा सकते हैं कि फिल्म में केंद्रीय महिला पात्रों की यौन अभिलाषाएं, विचार, उन्मुक्तता भारतीय संस्कृति के पुरुषवादी स्ट्रक्चर को तोड़ती हैं इसलिए. सेंसर ने फिल्म को पास करने से मना कर दिया. उन्होंने कारण लिखा, “ये कहानी महिला उन्मुख है और जीवन से अलग औरतों की फैंटेसियों को इसमें दिखाया गया है. इसमें सेक्सुअल दृश्य, अपमानजनक शब्द और अश्लील वीडियो है. फिल्म समाज के एक वर्ग के लिए ज्यादा संवेदनशील है.” अपने प्रगतिशील कंटेंट के लिए तारीफ और अवॉर्ड पा चुकी प्रोड्यूसर प्रकाश झा और डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव की ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ को आखिरकार अप्रैल में अपील ट्राइब्यूनल (FCAT) के सामने ले जाया गया. उन्होंने सेंसर बोर्ड को निर्देश दिया कि वो इस फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट के साथ पास कर दे. ट्राइब्यूनल ने कहा कि कुछ स्वैच्छिक व अन्य कट्स लगाने और सेक्सुअल नेचर के कुछ दृश्यों की लंबाई कम करने के बाद फिल्म पास कर दी जाए. उन्होंने बोर्ड को कहा कि ‘लेडी ओरिएन्टेड’ होने के आधार पर किसी फिल्म की रिलीज नहीं रोक सकते.

5. अनुष्का शर्मा की फिल्लौरी में से हनुमान चालीसा का पाठ हटा दिया गया.

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एक सीन में सूरज शर्मा के कैरेक्टर के सामने साक्षी (अनुष्का शर्मा) का भूत आ जाता है, वो डर के मारे कांपने लग जाता है और हनुमान चालीसा पढ़ता है ताकि भूत भाग जाए. सेंसर बोर्ड ने इसे हटवा दिया. हालांकि हिंदी सिनेमा में दशकों तक चालीसा का इस्तेमाल फिल्मों में अलग-अलग भावों में होता रहा, उन्हें हटाने की जरूरत नहीं महसूस हुई.

6. जेम्स बॉन्ड सीरीज की चौबीसवीं फिल्म ‘स्पैक्टर’ पर भी बोर्ड की कैंची चली. नवंबर 2015 में पहलाज निहलानी की टीम ने दो पैशन भरे चुंबन दृश्य काट दिए.

डेनियल क्रेग और मोनिका बेलुची के बीच किस की लंबाई आधी कर दी गई. बोर्ड के मुताबिक भारतीय दर्शकों के लिहाज से ये बहुत लंबे थे. बोर्ड ने कहा कि जेम्स बॉन्ड ‘एफ वर्ड’ का इस्तेमाल भी नहीं कर सकता है. ‘स्पैक्टर’ में दो ऑडियो और दो वीडियो कट लगाए गए उसके बाद उसे यूए सर्टिफिकेट दिया गया.

7. हंसल मेहता की फिल्म अलीगढ़ के ट्रेलर में सेंसर बोर्ड ने समलैंगिकता जैसे शब्द पर आपत्ति की.

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जबकि ये फिल्म ही एक समलैंगिक प्रोफेसर की जिंदगी और मौत की सच्ची कहानी पर आधारित थी जिनकी भूमिका मनोज वाजपेयी ने निभाई थी. फिल्म को एडल्ट सर्टिफिकेट दिया गया. इसमें कुछ कट लगाने के लिए भी कहा गया. जहां जहां ‘बास्टर्ड’ और ‘मादर**’ शब्द थे उन्हें म्यूट कर दिया गया. बास्टर्ड सिर्फ एक जगह पर इस्तेमाल करने दिया गया. ‘भेन**’ शब्द को हटाकर ‘भाग इधर से’ कर दिया गया. एक डायलॉग में से ‘तमाचा’ शब्द हटा दिया गया. उसकी जगह ‘चैलेंज’ शब्द यूज किया गया. एक और जगह कट लगा. दो जगह मनोज के किरदार प्रोफेसर सिरास को कोर्ट में जम्हाई लेते और सोते दिखाया गया था जिसके विजुअल की लंबाई घटा दी गई और दूसरे विजुअल लगाए गए.

8. डायरेक्टर अविनाश दास की अनारकली ऑफ आरा में 11 कट लगाए गए.

एक डायलॉग में से अमिताभ बच्चन और अमरीश पुरी के नाम हटवाने के लिए कहा गया. कारण? कि भावनाएं आहत हो सकती हैं. ये डायलॉग था जिसमें संजय मिश्रा का कैरेक्टर स्वरा भास्कर के पात्र से कहता है, “अगर तुम अमिताभ बच्चन बन कर आई तो चाहती हो कि हम अमरीश पुरी बन जाएं?” इनमें से दोनों के नाम हटाए गए. एक संवाद में से अर्जुन का नाम तक हटाने को कहा गया क्योंकि महाभारत का रेफरेंस था. एक सीन में एक किरदार स्वरा से कहता है, “ये क्या सुंदर कांड कर दिया.” तो सुंदर कांड भी हटाने के लिए कहा गया क्योंकि ये रामायण का रेफरेंस था.

9. नवाजुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत हरामखोर को सेंसर ने पास करने से मना कर दिया था.

इसकी कहानी एक स्कूल टीचर और उसकी नाबालिग़ स्टूडेंट के संबंध पर आधारित थी जिसे श्लोक शर्मा ने डायरेक्ट किया था. ये फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए आठ महीने तक अटकी रही. बाद में अपीलिएट ट्रिब्यूनल ने इसे पास किया.

10. ऑस्कर-2017 में बेस्ट पिक्चर की ट्रॉफी जीती मूनलाइट में कई कट लगाए.

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हालांकि इसे ए सर्टिफिकेट दिया गया था, बावजूद इसके कई एडल्ट सीन काट दिए गए. इसमें ‘बिच’, ‘मदर***’, ‘डि*’ जैसे शब्द जहां-जहां आते हैं वहां से हटा दिए गए. एक सीन में लड़के-लड़की का सेक्सुअल एक्ट होता है जिसे डिलीट कर दिया गया. बैरी जेनकिन्स की ये फिल्म एक गरीब, अश्वेत, समलैंगिक लड़के शिरॉन के जीवन को अमेरिका में तीन चरणों में दिखाती है. फिल्म में बोर्ड ने शिरॉन और दूसरे लड़के केविन के बीच किसिंग सीन भी पूरी तरह डिलीट करवा दिया जो कहानी के लिए बहुत जरूरी था.

11. सनी देओल अभिनीत मोहल्ला अस्सी को बोर्ड ने पिछले साल जून में पास करने से मना कर दिया. डायरेक्टर डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी खुद बोर्ड मेंबर हैं लेकिन उनकी फिल्म भी अटकी है.

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फिल्म में बहुत सारी गालियां हैं क्योंकि जिस साहित्यिक रचना पर ये आधारित है उसमें भी गालियां हैं. इसमें भगवान शिव का भेस बनाए हुए एक आदमी के मुंह से भी गाली निकलती दिखती है. पिछले साल दिसंबर में निर्माता की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीएफसी और फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलिएट ट्रिब्यूनल को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों ‘मोहल्ला अस्सी’ का सर्टिफिकेशन रोककर रखा गया है.

12. यशराज बैनर की फिल्म ‘दम लगाके हईशा’ को यूए सर्टिफिकेट देते हुए बोर्ड ने पांच ऑडियो कट लगाए. इसमें कुछ शब्द तो बेहद सामान्य थे जिनको और भी सामान्य शब्दों से रिप्लेस किया गया.

जैसे ‘घंटा’ शब्द डिलीट करके उसे ‘ठेंगा’ कर दिया गया. ‘हरामीपना’ को हटाकर ‘छिछोरीपना’ कर दिया गया. ‘हराम के पिल्ले’ को हटाकर ‘गली के पिल्ले’ किया गया. फिल्म में ‘हरामखोर’ शब्द भी था जिसे ‘कठोर’ कर दिया गया. इनके अलावा सबसे ज्यादा आपत्ति ‘लेस्बियन’ शब्द पर ली गई. उसे पूरी तरह हटा दिया गया. ये शब्द फिल्म में उस जगह आता है जब संध्या तलाक के लिए अप्लाई करती है. उसका छोटा भाई इस दौरान यूं ही पूछ लेता है, “मम्मी, कहीं दीदी लेस्बियन तो नहीं होती जा रही है?” डायरेक्टर शरत कटारिया ने कहा कि जब बोर्ड ने लेस्बियन शब्द पर आपत्ति की तो उन्होंने पूछा कि ‘आप लोग तो कह रहे थे कि सिर्फ गालियां ही हटा रहे हैं? तो लेस्बियन क्यों हटा रहे हैं, ये गाली तो नहीं है!’ इस पर जवाब मिला कि चूंकि एक बच्चे के मुंह से इस शब्द को बुलवाया जा रहा है तो ये ठीक नहीं है और फनी नहीं है.

13. पंजाब में ड्रग्स की समस्या पर आधारित फिल्म उड़ता पंजाब को भी सेंसर बोर्ड ने रोककर रखा. बोर्ड ने इसमें 89 जगह कट लगाने के लिए कहा.

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फिल्म के निर्माता फैंटम फिल्म्स के अनुराग कश्यप और निर्देशक अभिषेक चौबे इस पर नहीं माने. वे बॉम्बे हाई कोर्ट में अपना केस लेकर गए. कोर्ट ने सेंसर बोर्ड के कहे के खारिज करते हुए सिर्फ एक कट और तीन डिस्क्लेमर के साथ ‘उड़ता पंजाब’ को रिलीज सुनिश्चित की.

14. ‘हेट स्टोरी-3’ में से संभोग शब्द हटाने के लिए कहा गया. निर्माता भूषण कुमार के मुताबिक, “उन्होंने (सेंसर सदस्य) कहा कि जिस तरीके से और स्थिति में संभोग शब्द यूज़ किया जा रहा है वो उनके नियमों के खिलाफ है.”

15. डायरेक्टर आलेहांद्रो गोंजालेज़ इनारित्तू की चर्चित द रेवनेंट पिछले साल फरवरी में भारत में रिलीज हुई तो कुछ कट्स के बाद.

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अपने सेंसर बोर्ड ने फिल्म में हर जगह से ‘बिग टिट्स’ और ‘बिच’ शब्दों को डिलीट करवा दिया. इसमें जहां पर निर्वस्त्र नितंबों वाले विजुअल्स थे उन्हें हटा दिया गया. इन कट्स के साथ इसे ए सर्टिफिकेट देकर पास किया गया. भारत में रिलीज होने के दो दिन बाद ही ‘द रेवनेंट’ ने तीन ऑस्कर जीते जिसमें लियोनार्डो डिकैप्रियो का बेस्ट एक्टर का ऑस्कर भी शामिल था.

16. ‘बॉम्बे वेलवेट’ को पहले निहलानी ने यूए सर्टिफिकेट के साथ पास करने से मना कर दिया. उनके मुताबिक क्योंकि इसमें ख़ून, गालियां, बहुत ज्यादा हिंसा और किसिंग सीन थे.

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वे इसे एडल्ट सर्टिफिकेट ही दे रहे थे. डायरेक्टर अनुराग कश्यप अपनी इस पीरियड ड्रामा के लिए ए सर्टिफिकेट नहीं चाहते थे. वे अपनी इस फिल्म को रिवाइजिंग कमिटी के पास लेकर गए. वहां इसे तीन कट्स के साथ यूए दिया गया. इसमें से दो गालियां हटाई गईं – ‘हरामज़ादा’ और ‘सन ऑफ अ बिच.’ रणबीर और अनुष्का के बीच एक पैशनेट लिपलॉक भी छांटा गया.

17. नेशनल अवॉर्ड प्राप्त डायरेक्टर शिवाजी पाटिल की 31 अक्टूबर को पास करते हुए बोर्ड ने 40 कट सुझाए.

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बाद में निर्माता के आग्रह पर नौ कट लगे. सोहा अली खान और वीर दास अभिनीत ये फिल्म प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में फैले सिख विरोधी दंगों के माहौल पर आधारित थी.

18. फरवरी 2016 में आई डायरेक्टर पैन नलिन की फिल्म एंग्री इंडियन गॉडेसेज़ में 16 कट लगाने का आदेश सेंसर बोर्ड ने दिया था. फिल्म में काली माता की तस्वीर के इस्तेमाल पर आपत्ति की गई. साथ ही ‘इंडियन फिगर’, ‘आदिवासी’, ‘सरकार’ और ‘लंच’ जैसे शब्दों पर आपत्ति की गई.

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19. प्रकाश झा की प्रियंका चोपड़ा अभिनीत फिल्म ‘जय गंगाजल’ को सेंसर ए सर्टिफिकेट देना चाहता था. लेकिन उन्हें यूए सर्टिफिकेट चाहिए था. इसके बदले में फिल्म में 11 कट सुझाए गए.

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इसमें ‘साला’ जैसे शब्द को हटाने के लिए भी कहा गया. झा ने इस पर यह कहते हुए हैरानी जताई कि इससे पहले राजकुमार हीरानी के बैनर की फिल्म ‘साला खड़ूस’ के नाम में से सेंसर ने साला शब्द नहीं हटाया था लेकिन उनकी फिल्म में उन्हें आपत्तिजनक लगा. खैर, झा ने 11 कट स्वीकार नहीं किए और अपील ट्रिब्यूनल के समक्ष गए. वहां फिल्म को दो छोटे बदलावों के साथ यूए सर्टिफिकेट देकर पास कर दिया गया.

20. डायरेक्टर कमल स्वरूप की डॉक्यूमेंट्री फिल्म डांस फॉर डेमोक्रेसी/ बैटल ऑफ बनारस को बोर्ड ने पिछले साल सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया.

इसे सेंसर बोर्ड की दोनों समितियों और अपील ट्रिब्यूनल के सामने भी रखा गया और तीनों जगह पास करने से इनकार कर दिया गया. फिर निर्माता मनु कुमारन इसके खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट गए. अप्रैल 2014 में इस फिल्म को शूट किया गया था. लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट पर नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल और अन्य प्रत्याशियों के बीच हुए चुनाव मुकाबले को ये कैप्चर करती है.

21. मलयालम फिल्म का बॉडीस्केप्स को भी सीबीएफसी ने सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया.

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उनका कहना था कि फिल्म समलैंगिक और गे रिलेशनशिप को ग्लोरीफाई करती है. कि इसमें मर्दों के जननांग दिखाती न्यूडिटी है. बोर्ड की दूसरी रिवाइजिंग कमिटी ने  कहा कि इसमें हिंदु भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कंटेंट है जिससे कानून व्यवस्था खऱाब हो सकती है.

22. ब्रिटिश-अमेरिकी फिल्म ‘कैरल’ तीन कट लगाने के बाद पिछले साल फरवरी में रिलीज हुई.

1952 के रोमैंटिक नॉवेल ‘प्राइस ऑफ सॉल्ट’ पर आधारित ये फिल्म दो महिलाओं के समलैंगिक रिश्ते पर आधारित थी. छह ऑस्कर नामांकन पाने वाली इस फिल्म को भारतीय सेंसर बोर्ड ने तीन कट्स के साथ ए सर्टिफिकेट दिया. इसमें 2.23 मिनट लंबा एक रोमैंटिक सीन भी था. जब टिरीज़ और कैरल किस करने लगते हैं और टिरीज़ कहती है ‘Take me to the bed’ उसके बाद ये प्रणय दृश्य आता है जिसे पूरा डिलीट किया गया. एक दूसरा किसिंग सीन भी आता है जिसे 31 सेकेंड तक काट दिया गया. फिल्म में एक जगह ‘सन ऑफ बिच’ शब्द आता है जिसे म्यूट किया गया.

23. डायरेक्टर नीरज घेवन की रिचा चड्ढा, विकी कौशल और संजय मिश्रा अभिनीत फिल्म मसान को पहले से ही एडल्ट रेटिंग दी गई थी इसके बावजूद सेंसर बोर्ड ने मेकर्स से कहा कि वे ‘साला’ और ‘साली’ शब्दों को म्यूट कर दें.

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24. इस साल जनवरी में आई श्रद्धा कपूर और आदित्य रॉय कपूर की फिल्म ओके जानू को बोर्ड ने चार वर्बल कट्स के बाद यूए सर्टिफिकेट देकर पास किया.

मणिरत्नम की फिल्म ‘ओके कनमनी’ की यह हिंदी रीमेक दो युवाओं के लिव इन रिलेशन की कहानी है. जब इस पर आश्चर्य किया गया कि लिव इन रिश्ते की थीम पर सेंसर को आपत्ति नहीं हुई? तो पहलाज निहलानी ने कहा, “वक्त बदल रहा है. एक समय ऐसा भी था जब लड़का-लड़की शादी से पहले मिल भी नहीं सकते थे. लेकिन अब वो एक दूसरे के साथ समय बिताने का मौका भी पाते हैं ताकि देख सकें एक दूसरे से कंपैटिबल हैं कि नहीं. ये एक सामाजिक हकीकत है. सामाजिक ताने-बाने में आ रहे इन बदलावों को हमें पहचानना चाहिए और इनका सम्मान करना चाहिए.”

25. निहलानी ने इम्तियाज अली की जब हैरी मेट सेजल में ‘इंटरकोर्स’ शब्द पर आपत्ति की.

फिल्म जब हैरी मेट सेजल में शाहरुख और अनुष्का शर्मा.
फिल्म जब हैरी मेट सेजल में शाहरुख और अनुष्का शर्मा.

फिल्म के दूसरे मिनी ट्रेलर में अनुष्का शर्मा ‘इंटरकोर्स’ शब्द का इस्तेमाल करती हैं. निहलानी इस पर बिफर गए. उन्होंने फिल्म में इसके इस्तेमाल को गलत बताया. जब विरोध हुआ तो उन्होंने खुली चुनौती दी कि अगर एक लाख से ज्यादा लोग कहते हैं तो वो प्रोमो और फिल्म दोनों में इस शब्द को यूज़ होने देंगे और पास कर देंगे. हालांकि एक चैनल के पोल में एक लाख से ज्यादा लोगों ने ऐसा कह दिया तो पहलाज अपनी बात से पलट गए. आखिरकार 4 अगस्त को रिलीज हुई इस फिल्म को सीबीएफसी ने यू/ए सर्टिफिकेट के साथ पास किया. इसमें किसी सीन को तो नहीं काटा गया लेकिन कुछ ऑडियो कट लगा दिए गए. कुछ और बदलाव भी करने को कहा गया. डायरेक्टर इम्तियाज अली ने स्पष्ट नहीं बताया कि कौन-कौन से शब्द काटे गए.

26. आपातकाल पर आधारित मधुर भंडारकर की फिल्म ‘इंदु सरकार’ में से ‘आरएसएस’ और ‘अकाली’ जैसे कई शब्द हटाने के लिए कहा गया.

फिल्म 'इंदु सरकार' के एक दृश्य में नील नितिन मुकेश.
फिल्म ‘इंदु सरकार’ के एक दृश्य में नील नितिन मुकेश.

पहले बोर्ड की परीक्षण समिति ने डायरेक्टर मधुर भंडारकर से कहा कि वे फिल्म में 12 कट लगाएं. साथ ही इसमें दो डिसक्लेमकर भी लगाने होंगे. इसमें से आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) और अकाली जैसे शब्दों को हटाने के लिए कहा गया. वे इसके लिए राज़ी नहीं हुए. वे सेंसर बोर्ड की रिवाइजिंग कमिटी के पास गए. वहां ‘इंदु सरकार’ को यू/ए सर्टिफिकेट देकर पास किया गया. फिल्म में दो कट लगाए गए और कुछ शब्द बीप किए गए. इसमें उन्हें एक डिसक्लेमकर भी लगाना पड़ा. 28 जुलाई को फिल्म रिलीज हुई.

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