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फिल्म रिव्यू: गॉडज़िला वर्सेज़ कॉन्ग

2014 में एक फिल्म आई थी. नाम था ‘गॉडज़िला’. फिल्म ने शुरुआत की मॉन्स्टर वर्स की. मॉन्स्टर वर्स के तहत प्लान था गॉडज़िला जैसे और भी दैत्यों पर फिल्म बनाने का. तो इसी प्लान को जारी रखते हुए दूसरी फिल्म आई. 2017 की ‘कॉन्ग: स्कल आइलैंड’. यहां कॉन्ग की दुनिया दिखाई गई. जो स्कल आइलैंड का राजा है. गॉडज़िला की कहानी को आगे बढ़ाते हुए इस मॉन्स्टर वर्स की तीसरी फिल्म आई. फिल्म थी 2019 में आई ‘गॉडज़िला: किंग ऑफ द मॉन्स्टर्स’. अब इसी सीरीज़ की चौथी फिल्म आई है. जहां गॉडज़िला और उसकी टक्कर का कॉन्ग आमने-सामने हैं. फिल्म है ‘गॉडज़िला वर्सेज़ कॉन्ग’. हाल ही में थिएटर्स पर रिलीज़ हुई है. आपके लिए हमनें भी ये फिल्म देख डाली. और बात करने आ गए कि मॉन्स्टर वर्स की ये चौथी फिल्म आपके समय की हकदार है या नहीं. तो चलिए, शुरू करते हैं.

Godzilla Vs Kong
मॉन्स्टर वर्स की चौथी फिल्म.

# Godzilla Vs Kong की कहानी क्या है?

गॉडज़िला और कॉन्ग. दो माईथोलॉजिकल जीव. भयंकर किस्म के. अपने दम पर तगड़ी तबाही मचाने का दम रखते हैं. गॉडज़िला पानी में रहता है. वहीं, स्कल आइलैंड कॉन्ग का ठिकाना है. ये दोनों जीव एक दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं. इतने कि सामने आ जाएं तो चीर-फाड़ मचा दें. इसलिए कोशिश की जाती है कि इन्हें एक दूसरे से दूर रखा जाए. और ये कोशिश करने वाले हैं इंसान. जो पिछले 10 सालों से कॉन्ग को मॉनिटर कर रहे हैं. उसके इर्द-गिर्द एक कंटेनमेंट ज़ोन बनाकर. लेकिन स्कल आइलैंड कॉन्ग की असली दुनिया नहीं. उसकी दुनिया ज़मीनी सतह से बहुत नीचे बसी है. जिसका नाम है ‘हॉलो अर्थ’. ‘हॉलो अर्थ’ सिर्फ कॉन्ग का घर नहीं. बल्कि, उसके जैसे असंख्य जीवों का घर हैं. कुछ ज़मीन पर रेंगने वाले. तो कुछ हवा में उड़ने वाले.

Hollow Earth
और भी भयानक जीवों का घर है हॉलो अर्थ.

खैर, एक दिन अचानक गॉडज़िला जाग जाता है. जो इतने सालों से शांत था. गॉडज़िला के बारे में ये धारणा है कि वो कभी भी अपने आप नहीं जागता. कुछ ऐसा घटता है जिसकी वजह से वो पानी से बाहर आने पर मज़बूर हो जाता है. उधर, कॉन्ग को अपने कंटेनमेंट ज़ोन से बाहर लाया जाता है. ताकि उसे हॉलो अर्थ ले जाया जा सके. अब एक खतरा बन जाता है. कॉन्ग और गॉडज़िला के एक दूसरे के सामने आने का. क्या होगा जब ये दोनों सामने आएंगे. और इन दोनों के बीच इंसान क्या कुछ करेगा, यही फिल्म की कहानी है.


# प्योर फन, नो लॉजिक टाइप की फिल्म है Godzilla Vs Kong

फिल्म शुरू करने से पहले आपको एक बात का ध्यान रखना होगा. इसमें किसी भी किस्म के लॉजिक ढूंढने बंद करने होंगे. क्यूंकि लॉजिक फिल्म का सबसे स्ट्रॉन्ग पॉइंट नहीं है. इसे बस आपको एंटरटेन करना है. जो कि ये बखूबी करती भी है. ऐसी लार्जर दैन लाइफ फिल्म से आप और उम्मीद भी क्या कर सकते हैं. ये क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म नहीं. जहां आपको कई सारी टाइमलाइन समझने के लिए चौकन्ने होकर फिल्म देखनी पड़े. ऐडम विंगार्ड डायरेक्टिड ये फिल्म आपका मनोरंजन पूरा करेगी. बशर्ते, आप कुछ चीज़ों से आंखें फेर सकें तो. जैसे एक टाइट सिक्योरिटी वाली कॉर्पोरेट फर्म में दो बच्चों और एक आदमी का घुसना. वो भी ऐसे कि किसी को भनक तक ना पड़े.

Godzilla And Kong
दोनों ने लड़ाई वाले सीन्स में तो बाजे फाड़ दिए गुरु.

फिल्म देखने के अपने अनुभव को एक थीम पार्क की राइड की तरह समझिए. बेफिक्र होकर आप राइड में बैठ गए. उसके बाद सारा काम उस राइड का है. यहां भी इस फिल्म रूपी राइड ने अपना काम तरीके से किया है. फिल्म आउट एंड आउट एंटरटेनिंग फिल्म है. टाइटल से ही फिल्म का मैसेज बड़ा क्लियर है. गॉडज़िला और कॉन्ग की टक्कर. होती भी है. एक नहीं बल्कि दो मौकों पर. और जब होती है तो विद्या कसम, स्क्रीन के अलावा कहीं और देखने को जी नहीं करता. दोनों मिलकर ग़ज़ब की तबाही मचाते हैं. वैसे तो पूरी फिल्म ही छुट-पुट एक्शन सीन्स से भरी हुई है. फिर भी कॉन्ग और गॉडज़िला के एक्शन सीन सब पर भारी पड़ते हैं. पूरी तरह एंटरटेनमेंट देते हैं.


# Godzilla Vs Kong चलाई नहीं भगाई है

गॉडज़िला और कॉन्ग. फिल्म के दो सबसे मजबूत पहलू. लेकिन यहां एक तीसरा पहलू भी है. जो कमजोर पड़ा है. वो हैं फिल्म के इंसान. ये तुलना ताकत के तौर पर नहीं की गई. राइटिंग के तौर पर की गई है. फिल्म ने अपने इंसानी किरदारों को ठीक से सांस लेने की भी जगह नहीं दी. कुछ इमोशनल सीन्स का स्कोप तो साफ बनता था. लेकिन फिल्म के स्क्रीनप्ले राइटर्स एरिक पियरसन और मैक्स बोरनस्टाइन ने ऐसा जरूरी नहीं समझा.

Kong 6
फिल्म की लेंथ और बढ़ाई जा सकती थी.

इसके पीछे भी दो वजह हो सकती हैं. पहली तो फिल्म की पेस. जो कट-टू-कट चलती है. कहानी के दो नायकों के अलावा किसी और चीज़ को ज़्यादा फुटेज देने की अनुमति नहीं देती. यही फिल्म का कमजोर पक्ष भी है. कि फिल्म का दिल उसकी सही जगह पर नहीं था. दूसरी वजह 2014 में आई ‘गॉडज़िला’ से जुड़ी हो सकती है. दरअसल, 2014 की फिल्म में ह्यूमन टच था. इतना कि शुरुआती 40 मिनट फिल्म ने इंसानों की कहानी दिखाई. हालांकि, उस समय इस बात की आलोचना हुई थी. कि मॉन्स्टर्स की फिल्म में भला इंसानों को इतनी स्पेस देने का क्या मतलब. शायद इसलिए स्टूडियो ने इस बार कांट-छांट करने का फ़ैसला लिया.

Maddison
‘स्ट्रेन्जर थिंग्स’ देखा है तो इन्हें झट से पहचान गए होंगे.

खैर इंसानों को जितनी भी स्पेस मिली है, उसमें से भी आप एक किरदार को देखते ही झट से पहचान जाएंगे. मैडीसन के किरदार को. जिसे निभाया है मिली बॉबी ब्राउन ने. आप उन्हें वेब सीरीज़ ‘स्ट्रेन्जर थिंग्स’ से जरूर पहचानते होंगे. वहां उन्होंने इलेवन का किरदार निभाया था. मिली गॉडज़िला वाली पिछली फिल्म का भी हिस्सा थीं.


# दी लल्लनटॉप टेक

फिल्म का क्लाइमैक्स हॉन्गकॉन्ग में सेट है. और वहां इन दोनों जीवों ने हॉन्गकॉन्ग का जितना नुकसान किया है, उतना इससे पहले सिर्फ चीन की सरकार ने किया था. उम्मीद करते हैं इससे आपको फिल्म के एक्शन के पैमाने का अनुमान लग गया होगा.

Kong And Godzilla
इतना नुकसान होता देख, दिल से बुरा लगता है भाई.

अगर अब भी नहीं लगा, तो फिल्म देख डालिए. ऐसे विज़ुअल्स, ऐसा एक्शन है कि थिएटर में अपना फोन चेक करना भूल जाएंगे. मम्मी कसम.


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