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क्या तनिष्क के बायकॉट से कंपनी को 2700 करोड़ रुपए का नुकसान हो गया?

एक हिंदुस्तानी कंपनी है. जिसके बारे में लोग कहते हैं कि अगर इन्वेस्टमेंट करना है तो रिलायंस में करो, लेकिन अगर नौकरी करनी है तो इस कंपनी में करो. उसी कंपनी का ‘एक’ शेयर है. ‘एक’ शेयर इसलिए कहा क्यूंकि इस कंपनी के कई शेयर्स हैं, उसमें से एक की बात कर रहे हैं. तो अगर इस शेयर पर आपने ठीक बीस साल पहले, यानी अक्टूबर, 2000 में, एक लाख रुपये लगाए होते, तो आज वो बढ़कर 4 करोड़ 96 लाख रुपए हो गए होते. शेयर का नाम? टाइटन. कंपनी का नाम टाटा.

टाटा को कौन नहीं जानता. आज पूरी दुनिया में कंपनियां कर्मचारियों का इंश्योरेंस करती है. लेकिन सबसे पहले ऐसा करने वाली कंपनी कौन थी? टाटा.

मेरा दोस्त है. यूके में रहता है. बोलता है, जब ‘टेटली टी’ के बड़े-बड़े होर्डिंग्स देखता हूं तो, सीना गर्व से फूल जाता है. नीचे लिखा रहता है, ‘अ टाटा प्रोडक्ट’.

ये इक्का दुक्का उदाहारण तो तुरंत याद आ रहे हैं, वरना हैं तो कितने ही. नमक से लेकर जगुआर बनाने वाली बड़ी कंपनी. इथिक्स से लेकर गर्व तक, और वेल्थ से लेकर आत्मनिर्भर भारत तक. एक कंपनी ने हम भारतीयों को इतना सब कुछ उपलब्ध कराया है कि एक विज्ञापन से उसका वर्चस्व ख़त्म होते देख दुःख होगा. वो भी तब जबकि विज्ञापन कहीं से कहीं तक वो नहीं कहता, जो उसे उल्टा लटकाकर उससे उगलवाने की कोशिश की जा रही है.

लेकिन अच्छी बात ये है कि इस एक विज्ञापन ने उसका रत्ती भर भी नुक़सान नहीं किया है. आर्थिक रूप से तो नहीं ही किया है. और जैसा लोग कह रहे हैं कि कंपनी को 2,700 करोड़ रुपए का नुक़सान हो गया, उन्हें वास्तविकता पॉइंट्स में बताते हैं. आसान भाषा में.

# एक बार अख़बार में खबर छपी कि आयरलैंड में बेरोज़गारी 150% बढ़ी. वास्तविकता ये थी कि वहां पहले 4 लोग बेरोज़गार थे और अब 10 हो गए थे. तो फ़िगर्स सही होते हुए भी कैसे मिसलीडिंग हो सकते हैं, ये बताने की ज़रूरत नहीं है.

# टाटा के अंडर में आती है टाइटन. और टाइटन के अंडर में आता है तनिष्क. एक शोरूम ऋंखला. गहने-ज़ेवरों, हीरे-जवाहरातों की. अब कहा जा रहा है कि इसे एक विज्ञापन के चलते शेयर मार्केट में 2700 करोड़ का नुक़सान हो गया. इसे, बोले तो टाइटन को. क्यूंकि शेयर मार्केट में तनिष्क नहीं टाटा की टाइटन लिस्टेड है. और दरअसल 13 अक्टूबर को टाइटन के शेयर ढाई प्रतिशत तक गिर गए.

# टाइटन का मार्केट कैप एक लाख दस हज़ार करोड़ रुपए से थोड़ा सा ही कम है. अब इसमें से 2700 करोड़ ग़ायब होना मतलब लगभग ढाई प्रतिशत कम होना.

13 अक्टूबर को लगभग ढाई प्रतिशत गिरा टाइटन का शेयर. (स्क्रीनग्रैब: गूगल फ़ाइनेंस)
13 अक्टूबर को लगभग ढाई प्रतिशत गिरा टाइटन का शेयर. (स्क्रीनग्रैब: गूगल फ़ाइनेंस)

# और अगर आपको ये ढाई प्रतिशत भी ज़्यादा लगता है तो आप इसे चार और तरह से देखिए-

1. आपके 2000 में लगे हुए एक लाख रुपये जो इस डाउन फ़ॉल से पहले 5 करोड़ 5 लाख थे, इसके बाद 4 करोड़ 96 लाख रुपए हो गए होते. देखिए ये अमाउंट तुलनात्मक रूप से कितना कम है. वो भी तब जबकि शेयर प्राइस का गिरना न पहली बार है, न आख़िरी. न महत्तम है, न न्यूनतम.

2. एक दिन में किसी शेयर का 2 से 3 प्रतिशत गिरना शेयर मार्केट में सामान्य बात मानी जाती है. वो भी तब जबकि वो शेयर लगातर बढ़ता जा रहा हो. मतलब जिस दिन टाइटन को 2700 करोड़ का घाटा हुआ बताया जा रहा है, उस दिन HDFC को 6000 करोड़ से ज़्यादा का नुक़सान हुआ. और दोनों ही कंपनियां 13 अक्टूबर को सबसे ज़्यादा गिरने वाली कंपनियों में भी नहीं थीं.

3. ये कहना भी अनुचित होगा कि ‘कंपनी को’ 2700 करोड़ रुपए का घाटा हुआ. घाटा तो दरअसल उनको हुआ जिनके पास टाइटन के शेयर्स हैं. किसी को सिर्फ़ 500-1000 रुपये का ही घाटा हुआ होगा किसी को करोड़ों का. लेकिन अनुपात निकालेंगे तो ये घाटा नगण्य आएगा. महज़ दो से तीन प्रतिशत.

4. इस घाटे को ‘ट्विटर मुहिम’ से जोड़ना भी उचित न होगा. क्यूंकि अगर किसी मुहिम, किसी बड़े कारण के चलते कोई शेयर गिरता है तो वो 2-3 प्रतिशत पर जाकर रुक नहीं जाता. गिरने के ऐसे कीर्तिमान बनाता है कि उसके शेयर्स की ट्रेडिंग रोक देनी पड़ती है. जो शेयर मार्केट को थोड़ी बहुत भी जानते होंगे, वो सिरे से इस बात को नकार देंगे कि तनिष्क को किसी बॉयकाट से कोई भयानक घाटा हुआ. 

तो लब्बोलुआब ये कि अव्वल तो टाइटन को नहीं उसके शेयर-धारकों को 2,700 करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ है. दूसरा ये Boycott Tanishq के चलते था, निश्चित नहीं कह सकते. तीसरा ये नुक़सान इतना छोटा या नेगलीजेबल है कि इसे कोई अपनी जीत मानकर सेलिब्रेट तो नहीं ही कर सकता है.

ख़ैर, मुझे उन लोगों से पूछना है कि क्या आपको वाकई लगता है टाटा भारतीयों को या भारत की किसी कौम, किसी जाति की ‘जानबूझकर’ कर भावनाओं को आहत करेगी.

अगर आप मुंबई गए हैं, तो उस गेटवे ऑफ़ इंडिया को सोचते हुए इस सवाल का उत्तर दीजिएगा, जहां से अंग्रेजों का आख़िरी बीड़ा रवाना हुआ था. जहां पर ढेर सारे कबूतर दाना चुगते हुए माहौल और भी जीवंत बना देते हैं. जहां पर एक खूबसूरत पुरानी बहुमंज़िला बिल्डिंग है. बिल्डिंग जहां एक बहुत बड़ा आंतकवादी हमला हुआ था, लेकिन फिर से वो उठ खड़ी हुई, मुंबई की तरह. मुंबईकार की तरह. भारत की तरह. भारतीय की तरह.

और हां. जाते-जाते एक बात और, तनिष्क की वेबसाइट में ‘हिंदू’ और ‘मुस्लिम’ सर्च करने पर कितने रिज़ल्ट आते हैं, ये देखने वाले शायद ही जानते होंगे कि ‘तनिष्क’ का क्या अर्थ होता है और ये शब्द कहां से लिया गया है.


वीडियो देखें:

बजाज और पार्ले ‘टॉक्सिक हेट’ के खिलाफ खड़े हुए तो टाटा का तनिष्क़ हार क्यों मान गया?-

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