Submit your post

Follow Us

आर्टिकल 370 पर फैसले के पीछे है इन पांच लोगों का दिमाग

613
शेयर्स

5 अगस्त, 2019. जम्मू-कश्मीर को लेकर कुछ अहम फैसले हुए. आर्टिकल 370 के भाग दो और तीन को खत्म कर दिया गया. जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बनाने का बिल पेश किया गया. और इन सबकी जानकारी तब हुई, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इसके बारे में बताया. इसके बाद से प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के फैसले की चर्चा होने लगी. कहा जाने लगा कि जो 70 साल में नहीं हुआ, मोदी-शाह की जोड़ी ने कर दिखाया. लोगों की बात सही भी थी, लेकिन इस फैसले को इतनी आसानी से लागू करने के पीछे कुछ और भी लोग थे, जो पर्दे के पीछे थे.

1. सत्यपाल मलिक

सत्यपाल मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल हैं. फैसले के पीछे उनकी बड़ी भूमिका है.
सत्यपाल मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल हैं. फैसले के पीछे उनकी बड़ी भूमिका है.

सत्यपाल मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल हैं. विधानसभा भंग होने के बाद जम्मू-कश्मीर का पूरा प्रशासन सत्यपाल मलिक के ही अधीन है. अगस्त, 2018 में जब उन्हें जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया था, तो उनकी नियुक्ति खासी चर्चा में रही थी. इसकी एक वजह तो ये थी कि जम्मू-कश्मीर में रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारी ही राज्यपाल बना करते थे, जबकि सत्यपाल मलिक नेता थे. दूसरी वजह ये थी कि जम्मू-कश्मीर बीजेपी और संघ के कोर एजेंडे में था, जबकि सत्यपाल मलिक का संघ से कोई वास्ता नहीं रहा है. बीजेपी में भी वो 2004 में शामिल हुए थे, इससे पहले वो लोदकल से लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का हिस्सा रह चुके थे. जब से सत्यपाल मलिक राज्यपाल बने, 35 A लगातार चर्चा में रहा. और वो कहते भी रहे कि सब कुछ सामान्य है. सभी लोग निश्चिंत रहें. राज्य में जो होगा, बताकर किया जाएगा.

2. अजीत डोभाल

अजीत डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं.
अजीत डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं.

जम्मू-कश्मीर से जुड़े अहम फैसले के पीछे जितनी भूमिका केंद्र सरकार की है, उससे जरा भी कम भूमिका अजीत डोभाल की नहीं रही है. अजीत डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं. केरला कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे हैं. इंटेलिजेंस ब्यूरो के मुखिया रहे हैं. पंजाब, मिजोरम और कश्मीर के लिए खूब काम किया है. खालिस्तानी आतंकियों से निपटने के लिए चला था ऑपरेशन ब्लू स्टार. और ऑपरेशन ब्लैक थंडर. उनकी सक्सेस के पीछे इनका हाथ था. 2005 में रिटायर हो गए थे और फिर विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन बनाया. मई 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तो इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया. कश्मीर पर फैसले के बाद राज्य में हालात न बिगड़े, इसके लिए अतिरिक्त जवानों की तैनाती से लेकर इंटरनेट बंद करने, धारा 144 लगाने और कश्मीर के बड़े नेताओं को नज़रबंद करने के पीछे अजीत डोभाल ही थे.

3. के. विजय कुमार

के विजय कुमार जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार हैं.
के विजय कुमार जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार हैं.

के. विजय कुमार आईपीएस तमिलनाडु कैडर के ऑफिसर हैं, जिन्हें लोग चंदन तस्कर वीरप्पन के एनकाउंटर के लिए याद करते हैं. वो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सिक्योरिटी टीम का भी हिस्सा रहे हैं. तमिलनाडु की एसटीएफ और फिर तमिलनाडु राज्य के पुलिस मुखिया के तौर पर काम करने वाले के विजय कुमार 2012 में रिटायर हुए थे. मोदी सरकार ने 2018 में उनको जम्मू-कश्मीर राज्य के राज्यपाल का सलाहकार बनाकर भेजा था. इन्हें नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल की कोर टीम का हिस्सा माना जाता है. डोभाल जब-जब कश्मीर गए, विजय कुमार से मिले और कश्मीर की सिक्योरिटी पर बात की. पिछले एक साल के दौरान के विजय कुमार ही वो कड़ी थे, जिन्होंने राज्यपाल सत्यपाल मलिक और एनएसए अजीत डोभाल के बीच पुल का काम किया.

4. राम माधव

राम माधव बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं.
राम माधव बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं.

राम माधव संघ से आते हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव है. 2014 में बीजेपी के महासचिव बनने से पहले संघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता थे. जब बीजेपी में आए, तो पूर्वोत्तर में पार्टी की सरकार बनाई. असम में तरूण गोगोई का किला ध्वस्त किया था. इसके बाद जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी का गठबंधन करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने. सरकार में शामिल होकर राम माधव ने कश्मीर घाटी का माहौल बीजेपी के पक्ष में किया और फिर एक दिन पीडीपी से गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया. यहीं से जम्मू-कश्मीर में बदलाव की सबसे बड़ी ज़मीन तैयार हुई. 5 अगस्त को राज्यसभा में जब गृहमंत्री ने कश्मीर से जुड़े ऐलान किए तो उसके पीछे की सबसे बड़ी ज़मीन यही थी.

5. बीवीआर सुब्रमण्यम

बीवीआर सुब्रमण्यन जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव हैं.
बीवीआर सुब्रमण्यन जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव हैं.

इकलौता चेहरा, जिसकी चर्चा न के बराबर हुई है. बीवीआर सुब्रमण्यम आईएएस अधिकारी हैं. जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव हैं. सत्यपाल मलिक से पहले जब एनएन वोहरा राज्य के राज्यपाल थे, उन्होंने जून, 2018 में बीवीआर सुब्रमण्यम को राज्य का मुख्य सचिव बनाया था. बीवीआर सुब्रमण्यम जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बनने से पहले छत्तीसगढ़ में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) थे. इस दौरान उन्होंने राज्य की पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बल और राज्य सरकार के बीच समन्वय कायम रखा और नक्सलवाद को कमजोर करने की दिशा में काम किया. और इसी वजह से उन्हें जम्मू-कश्मीर का मुख्य सचिव बनाया गया. वहां भी उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा बलों, राज्य के सुरक्षा बलों और राज्य सरकार-राज्यपाल के बीच समन्वय कायम रखा.


गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्ताव पर क्यों भड़क गया पाकिस्तान का मीडिया?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पोस्टमॉर्टम हाउस

अपने डबल स्टैंडर्ड पर एक बार फिर ट्रोल हो गई हैं प्रियंका चोपड़ा

लोग उन्हें उनकी पुरानी बातें याद दिला रहे हैं.

उजड़ा चमन : मूवी रिव्यू

रिव्यू पढ़कर जानिए ‘मास्टरपीस’ और ‘औसत’ के बीच का क्या अंतर होता है.

फिल्म रिव्यू: टर्मिनेटर - डार्क फेट

नया कुछ नहीं लेकिन एक्शन से पैसे वसूल हो जाएंगे.

इस एक्टर ने फिल्म देखने गई फैमिली को सिनेमाघर में हैरस किया, वो भी गलत वजह से

इतनी बद्तमीजी करने के बावजूद ये लोग थिएटर में 'भारत माता की जय' का जयकारा लगा रहे थे.

हाउसफुल 4 : मूवी रिव्यू

दिवाली की छुट्टियां. एक हिट हो चुकी फ़्रेन्चाइज़ की चौथी क़िस्त. अक्षय कुमार जैसा सुपर स्टार और कॉमेडी नाम की विधा.

फिल्म रिव्यू: मेड इन चाइना

तीन घंटे से कुछ छोटी फिल्म सेक्स और समाज से जुड़ी हर बड़ी और ज़रूरी बात आप तक पहुंचा देना चाहती है. लेकिन चाहने और होने में फर्क होता है.

सांड की आंख: मूवी रिव्यू

मूवी को देखकर लगता है कि मेकअप वाली गड़बड़ी जानबूझकर की गई है.

कबीर सिंह के तमिल रीमेक का ट्रेलर देखकर सीख लीजिए कि कॉपी कैसे की जाती है

तेलुगू से हिंदी, हिंदी से तमिल एक ही डिश बिना एक्स्ट्रा तड़के के परोसी जा रही.

हर्षित: मूवी रिव्यू

शेक्सपीयर के नाटक हेमलेट पर आधारित है.

लाल कप्तान: मूवी रिव्यू

‘तुम्हारा शिकार, तुम्हारा मालिक है. वो जिधर जाता है, तुम उधर जाते हो.’