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हाई कोर्ट को आश्वासन देने के बावजूद दिल्ली सरकार बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म नहीं दे पाएगी

बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म की जगह पैसे दिए जाने के दिल्ली सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि परिवार इन पैसों से बच्चों के लिए यूनिफॉर्म न खरीदकर इसका दुरुपयोग कर रहे हैं.

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21 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 21 अगस्त 2025, 03:09 PM IST)
Delhi Schools Can Not Supply Uniforms
इस एकेडमिक ईयर में भी बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म नहीं मिलेंगे. (सांकेतिक तस्वीर: इंडिया टुडे)
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दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को इस साल भी स्कूल यूनिफॉर्म (Delhi School Uniform) नहीं मिल पाएगा. दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट को ये जानकारी दी है. सरकार का कहना है कि वो इस एकेडमिक ईयर में भी बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म नहीं दे पाएगी. जबकि इससे पहले सरकार ने कोर्ट को ये आश्वासन दिया था कि नए एकेडिमक ईयर से पहले ही ऐसा किया जाएगा. 

सरकार ने कहा है कि वो इस साल भी यूनिफॉर्म की जगह, डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (DBT) के जरिए सब्सिडी देगी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला 2013 में दायर एक याचिका से जुड़ा है. इसमें बताया गया कि राइट टू एजुकेशन (RTE) कानून के तहत बच्चों को फ्री यूनिफॉर्म देना अनिवार्य है, जबकि दिल्ली सरकार ऐसा करने में विफल रही है. हाई कोर्ट लगातार ये निर्देश देती रही है कि बच्चों के परिवारों को यूनिफॉर्म के पैसे देने के बजाए, बच्चों को फिजिकल यूनिफॉर्म दिए जाएं.

अपने हालिया सबमिशन में शिक्षा विभाग ने ऑपरेशनल दिक्कतों का हवाला देते हुए कहा है कि इस समस्या को मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा गया है. 

इसस पहले 10 मई को कैबिनेट ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दी. इसमें शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल यूनिफॉर्म के दाम को रिवाइज करने का प्रस्ताव दिया गया था. ये DBT के लिए थे. इस प्रस्ताव में भी ऑपरेशनल दिक्कतों का हवाला दिया गया था. हालांकि, मंत्रीपरिषद ने मंजूरी के साथ ये निर्देश भी दिया कि इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग दिल्ली हाई कोर्ट से संपर्क करे.

सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि क्लास 1 से 5 तक के बच्चों को 1,250 रुपये, क्लास 6 से 8 तक के बच्चों को 1,500 रुपये और क्लास 9 से 12 तक के बच्चों को 1,700 रुपये दिए जाएंगे. इससे पहले क्रमश: 1,100 रुपये, 1,400 रुपये और 1,500 रुपये निर्धारित थे. 

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याचिकाकर्ता, दिल्ली स्थित NGO जस्टिस फॉर ऑल ने कहा कि ये वृद्धि मामूली है और परिवार इन पैसों से बच्चों के लिए यूनिफॉर्म न खरीदकर इसका दुरुपयोग कर रहे हैं. शिक्षा निदेशालय ने कोर्ट को बताया कि होलसेल दाम के आधार पर मार्केट सर्वे के बाद ये दरें तय की गई हैं. थोक मूल्य पर एक यूनिफॉर्म किट में आमतौर पर दो जोड़ी कपड़े, एक स्वेटर, मोजे, जूते और एक बेल्ट शामिल होते हैं. लड़कियों के मामले में, इसमें एक सूट या दुपट्टा शामिल होता है.

विभाग ने कहा है कि वो कम से कम एक और साल तक DBT के माध्यम से सब्सिडी का वितरण जारी रखेगा. इस मामले को सितंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है.

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