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यूपी की इन सात विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव का तिया-पांचा समझ लीजिए

यूपी की सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है. इस उपचुनाव के लिए तीन नवंबर को वोटिंग होगी और नतीजे 10 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. ठीक उसी दिन जब बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होंगे. सभी सीटों पर पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. हालांकि इस चुनाव के नतीजे से सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला, लेकिन नतीजे जनता का मूड जरूर बताएंगे. बीजेपी सपा, बसपा और कांग्रेस इस चुनाव में दम लगाती हुई दिखाई दे रही हैं. जानते हैं सातों विधानसभा सीटों की स्थिति क्या है.

मल्हनी विधानसभा सीट

Parasnath Yadav
पारसनाथ यादव को मुलायम सिंह का खास माना जाता था. (फोटो पारसनाथ यादव के फेसबुक पेज से लिया गया है)

जौनपुर जिले की मल्हनी विधानसभा सीट. 2017 के चुनाव में मल्हनी से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार पारसनाथ यादव जीते थे. जून 2020 में लंबी बीमारी के बाद उनका देहांत हो गया. वो छह बार विधायक और दो बार सांसद रहे थे. इस उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने उनके बेटे लकी यादव को टिकट दिया है. उनका मुकाबला पूर्व सांसद धनंजय सिंह से है जो निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं, बीजेपी के मनोज कुमार सिंह, कांग्रेस के राकेश कुमार मिश्र और बसपा के जयप्रकाश दुबे से है.

बुलंदशहर विधानसभा सीट

Virendra Singh Sirohi
वीरेंद्र सिंह सिरोही लगातार दो बार विधायक रहे थे. (फोटो वीरेंद्र सिंह सिरोही के फेसबुक पेज से साभार)

पश्चिमी यूपी के बुलंदशहर जिले की सदर सीट. 2017 में बीजेपी नेता वीरेंद्र सिंह सिरोही यहां से जीते थे. उन्होंने लगातार दो बार विधायक रहे बीएसपी नेता हाजी अलीम को हराया था. मार्च 2020 में बीमारी के चलते वीरेंद्र सिंह का देहांत हो गया. बीजेपी ने उनकी पत्नी उषा सिरोही को पार्टी का उम्मीदवार बनाया है. उनका मुख्य मुकाबला बीएसपी नेता और हाजी अलीम के भाई हाजी युनुस से होगा. कांग्रेस ने यहां से सुशील चौधरी को मैदान में उतारा है, जबकि रालोद ने प्रवीण कुमार तेवतिया को टिकट दिया है. रालोद का गठबंधन सपा के साथ है और बुलंदशहर सीट रालोद के खाते में गई है.

नौगांवा सादात विधानसभा सीट

Chetan Chauhan
चेतन चौहान (फोटो संगीता चौहान के ट्विटर से लिया गया है)

नौगांवा सादात विधानसभा सीट, अमरोहा जिले का हिस्सा है. 2017 में यहां से बीजेपी नेता चेतन चौहान ने जीत दर्ज की थी. उनसे पहले समाजवादी पार्टी के अश्फाक अलीखान यहां से विधायक रहे थे. अगस्त 2020 में कोरोना और अन्य बीमारियों के कारण चेतन चौहान का निधन हो गया. बीजेपी ने उनकी पत्नी संगीता चौहान को टिकट दिया है. संगीता कुछ वक्त पहले ही सेंट्रल बैंक के महाप्रबंधक पद से रिटायर हुई हैं. सपा ने यहां से सैय्यद जावेद अब्बास, बसपा ने फुरकान अहमद और कांग्रेस ने कमलेश सिंह को मैदान में उतारा है.

टूंडला विधानसभा सीट

Sp Singh Baghel
बघेल योगी सरकार में मंत्री भी थे. (फोटो एसपी सिंह बघेल के फेसबुक से ली गई है)

टूंडला विधानसभा सीट, फिरोजाबाद जिले में पड़ती है. साल 2017 में यहां से बीजेपी उम्मीदवार एसपी सिंह बघेल जीते थे और योगी सरकार में मंत्री भी बने थे. 2019 में उन्होंने पार्टी के कहने पर आगरा से लोकसभा चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी. तभी से टूंडला सीट खाली थी. बीजेपी ने जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ब्रज क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री प्रेम सिंह धनगर को मैदान में उतारा है. उनसे मुकाबले के लिए सपा के महाराज सिंह धनगर, बसपा के संजीव चक और कांग्रेस की स्नेहलता बबली मैदान में हैं.

घाटमपुर विधानसभा सीट

Kamla Rani Varun
कमला रानी वरुण.(फोटो स्वप्निल के ट्विटर अकाउंट से साभार)

कानपुर जिले की घाटमपुर विधानसभा सीट से साल 2017 में बीजेपी की कमला रानी वरुण ने जीत दर्ज की थी. अगस्त 2020 में कोरोना वायरस के कारण उनका निधन हो गया. पार्टी ने उपचुनाव में उपेंद्र पासवान को टिकट दिया है. हालांकि टिकट के लिए कमला रानी वरुण की बेटी स्वप्निल भी दावेदार थीं. 2012 में यहां से सपा और 2007 में बसपा के उम्मीदवार ने जीत दर्ज कराई थी. यहां बीजेपी उम्मीदवार को सपा के इंद्रजीत कोरी, बसपा के कुलदीप संखवार और कांग्रेस के डॉ कृपाशंकर संखवार से मुकाबला करना होगा.

बांगरमऊ विधानसभा सीट

Kuldeep Sengar
कुलदीप सिंह सेंगर फिलहाल जेल में हैं. (फोटो क्रेडिट- PTI)

उन्नाव जिले की बांगरमऊ सीट से साल 2017 में बीजेपी के कुलदीप सिंह सेंगर ने जीत हासिल की थी. उन पर रेप का आरोप लगा था जिसके बाद अदालत ने उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी थी. इस उपचुनाव में बीजेपी ने जिलाध्यक्ष रहे श्रीकांत कटियार को टिकट दिया है. हालांकि सेंगर की पत्नी टिकट चाहती थीं, लेकिन बीजेपी ने दूरी बनाना ही ठीक समझा. सेंगर से पहले इस सीट पर सपा और बसपा मजबूत स्थिति में रही हैं. कटियार का मुकाबला सपा के सुरेश कुमार पाल, बसपा के महेश पाल और कांग्रेस की आरती वाजपेई से होगा.

देवरिया विधानसभा सीट

Janmejya Singh
जनमेजय सिंह . (फोटो जनमेजय सिंह के फेसबुक से साभार)

देवरिया विधानसभा सीट से साल 2017 में बीजेपी के टिकट पर जनमेजय सिंह जीते थे. कुछ वक्त पहले ही दिल का दौरा पड़ने से उनका देहांत हो गया था. जनमेजय लगातार दो बार विधायक बने थे. 2012 में भी उन्होंने जीत हासिल की थी. उनसे पहले लगातार दो बार दीनानाथ कुशवाहा यहां से विधायक रहे थे. बीजेपी ने यहां से सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है. इस बात से नाराज होकर जनमेजय सिंह के बेटे अजय सिंह निर्दलीय ही मैदान में उतर गए हैं. सपा की ओर से ब्रह्माशंकर त्रिपाठी, बसपा की ओर से अभय मणि‍ त्रिपाठी और कांग्रेस की ओर से मुकुंद भाष्कर मणि‍ त्रिपाठी मैदान में हैं.

स्वार विधानसभा सीट

Abdullah Azam
अब्दुल्ला आजम खान अपने पिता आजम खान के साथ (फोटो क्रेडिट- PTI)

इन सीटों के अलावा एक और सीट है रामपुर जिले की स्वार विधानसभा सीट. 2017 में आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान यहां से विधायक बने थे. उन्होंने नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां को हराया था. अब्दुल्ला की उम्र पर विवाद था, जिसे लेकर हाईकोर्ट ने उनकी विधायकी रद्द कर दी. तब से यह सीट खाली है हालांकि चुनाव आयोग इस पर चुनाव नहीं करवा रहा है.


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