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कौन हैं जयराम ठाकुर, जिन्हें हिमाचल प्रदेश का सीएम बनाया जा रहा है

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हिमाचल प्रदेश में सीएम फेस रहे प्रेमकुमार धूमल की सुजानपुर सीट पर हार ने यह तो तय कर दिया था कि उन्हें सीएम नहीं बनना. मगर किसे बनना है, ये सबसे बड़ा सवाल था. सीएम की रेस में दो नाम जो सबसे आगे चल रहे थे वो पांच बार के विधायक जयराम ठाकुर और केंद्रीय मंत्री जगतप्रकाश नड्डा के थे. हालांकि इसका रिजल्ट आ गया है. रेस में जयराम ठाकुर ने बाजी मार ली है. लंबी जद्दोजहद के बाद उन्हें विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. माने हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर ही होंगे. पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल और वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने भी उनके नाम पर हामी भर दी है. दिल्ली से भी इस पर मुहर लग गई है. शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हिमाचल प्रदेश के प्रभारी नरेंद्र तोमर ने इसकी घोषणा की. अब बात करते हैं उन फैक्टरों की, जिनके कारण जयराम ने और सभी दावेदारों को मात दे दी-

1. धूमल का मजबूत विकल्प

हिमाचल में अभी तक के मुख्यमंत्रियों का इतिहास देखें तो ठाकुर चेहरे ही हावी दिखेंगे. पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार से लेकर ठाकुर रामलाल, वीरभद्र सिंह, प्रेमकुमार धूमल तक राजपूत नेता इस गद्दी पर बैठे हैं. बस एक बार शांता कुमार के रूप में 1990 में बदलाव देखा गया था. वो ब्राह्मण समुदाय से आते हैं. हिमाचल की राजनीति इन्हीं दो जाति समूहों के इर्द-गिर्द घूमती रही है. इस लिहाज से जयराम ठाकुर का नाम बीजेपी को रास आना लाजमी था.

चुनाव के दौरान जयराम ने कई जनसभाएं की थीं.
चुनाव के दौरान जयराम ने कई जनसभाएं की थीं.

2. संघ के करीबी होने का फायदा

मुख्यमंत्रियों के चुनाव में संघ की राय भी ली जाती है या कहें आखिरी मुहर वहीं से लगती है. इस लिहाज से भी जयराम का दावा मजबूत था. जयराम शुरुआत से ही संघ के करीबी रहे हैं. वो छात्र जीवन के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP)में सक्रिय रहे. श्रीनगर के लाल चौक पर ABVP की रैली कराने की उपलब्धि भी उनके नाम है. 15 अगस्त 1992 को लाल चौक पर झंडा फहराने के लिए मुरली मनोहर जोशी, नरेंद्र मोदी और कई दूसरे नेता पहुंचे थे. तब वे जम्मू कश्मीर में इस छात्र संगठन के प्रभारी थे.

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ जयराम.
अटल बिहारी वाजपेयी के साथ जयराम.

3. संगठन और सरकार का एक्सपीरियंस

1993 से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले इस नेता ने मंडी में भाजपा को मजबूत किया और कद्दावर कांग्रेसी करम सिंह की पकड़ को खत्म किया. 1998 से लेकर 2017 तक 5 बार विधायकी जीत चुके हैं. 2007-2009 के बीच स्टेट बीजेपी चीफ की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली थी. 2007 में धूमल सरकार में जयराम को कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया था. उनको ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी मिली थी. वहीं, इस चुनाव में जब अमित शाह मंडी में रैली के लिए आए थे तो अपने भाषण में कहा था कि जयराम को मुख्यमंत्री की बगल वाली सीट पर बिठाएंगे. इस बयान का भी यही मतलब निकाला जा रहा था कि शाह जयराम को बड़ी जिम्मेदारी देने का पहले ही मन बना चुके थे.

स्मृति ईरानी के साथ एक जनसभा में जयराम.
स्मृति ईरानी के साथ एक जनसभा में जयराम.

4. चुनाव में अच्छा प्रदर्शन

विधानसभा चुनाव में एक तरफ जहां बीजेपी के कई बड़े नाम हार गए, जयराम ने 11,254 मतों से जीत हासिल की. धूमल न सिर्फ अपनी सीट हारे, उनके करीबी गुलाब सिंह ठाकुर, रविंदर सिंह रवि, पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती, रंधीर शर्मा, केएल ठाकुर और विजय अग्निहोत्री भी हार गए. वहीं जयराम खुद तो जीते ही, मंडी की 10 सीटों में से बीजेपी ने 9 सीटें जीतीं. इसका क्रेडिट भी जयराम को दिया जा रहा है. इससे भी जयराम का दावा मजबूत था.

पहली बार टिकट मिला तो घरवाले नाराज हो गए थे

# 6 जनवरी 1965 को जयराम का जन्म मंडी के तांदी गांव में हुआ. प्राइमरी की पढ़ाई गांव से ही की. ग्रैजुएशन करने मंडी के वल्लभ कॉलेज पहुंचे. यहीं एबीवीपी का दामन थामा और छात्र राजनीति में एंट्री की. फिर जम्मू कश्मीर जाकर एबीवीपी का प्रचार किया. 1992 में घर वापसी हुई. प्रदेश की राजनीति में एंट्री की. 1993 में बीजेपी ने उन्हें सेराज विधानसभा से टिकट दिया और वो चुनावी दंगल में कूद पड़े.

5 बार से लगातार विधायक हैं जयराम ठाकुर.
5 बार से लगातार विधायक हैं जयराम ठाकुर.

चुनाव लड़ने से हालांकि उनके घरवाले नाराज थे. कारण थी घर की आर्थिक स्थिति, जो चुनाव लड़ने लायक नहीं थी. उनका परिवार एक साधारण कृषक परिवार था. उनके पिता ने मिस्त्री का भी काम किया है. फिर भी जयराम ने हार नहीं मानी और लड़े, मगर हार गए. उस वक्त उनकी उम्र महज 26 साल थी. ऐसे में उनके पास वक्त की कमी नहीं थी. वो डटे रहे.

1998 में एक बार फिर पार्टी ने उनपर भरोसा किया. सेराज विधानसभा से टिकट दिया. वो इस बार लड़े और चुनाव जीते भी. और फिर कभी हार का मुंह नहीं देखा. लगातार जीतते रहे और इस बार 5वीं बार विधायक बने हैं.


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