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हिमाचल चुनाव 2017: बीजेपी के CM कैंडिडेट प्रेम कुमार धूमल सुजानपुर में क्यों हारे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भले पूरी तरह गुजरात विधानसभा चुनाव में व्यस्त रहे हों, लेकिन नतीजे हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से भी रोचक आ रहे हैं. दी लल्लनटॉप आप तक पहुंचा रहा है गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव 2017 के नतीजे. हिमाचल, जहां बीजेपी के प्रेम कुमार धूमल और कांग्रेस के वीरभद्र सिंह के बीच सीधी टक्कर है. जुड़े रहिए.

विधानसभा सीट: सुजानपुर (सीट नंबर 37)
जिला: हमीरपुर
लोकसभा सीट: हमीरपुर

2017 विधानसभा चुनाव का नतीजा

2017 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राजिंदर सिंह राणा ने बीजेपी के सीएम कैंडिडेट और अपने पूर्व राजनीतिक गुरु प्रेम कुमार धूमल को 1,919 वोटों से हरा दिया.

1. राजिंदर सिंह राणा (कांग्रेस) – 25,288 वोट
2. प्रेम कुमार धूमल (बीजेपी) – 23,369 वोट
3. जोगिंदर कुमार ठाकुर (सीपीएम) – 1,023


सीट की डीटेल

सज्जनपुर से सुजानपुर हुए इस इलाके की राजनीति करीब दो दशक से बीजेपी के प्रेम कुमार धूमल और उनके शागिर्द रहे राजिंदर राणा के इर्द-गिर्द घूम रही है. ये सीट 2012 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई. इससे पहले बमसन सीट पर चुनाव होता था. परिसीमन में बमसन के 92 बूथों में से 47 सुजानपुर के हिस्से में आए थे. बमसन पर परंपरागत रूप से बीजेपी मजबूत रही है.

बमसन में पहला चुनाव 1972 में हुआ था, जिसमें कांग्रेस की चंद्रेश कुमारी जीती थीं. 1977 में जनता पार्टी के रंजीत सिंह वर्मा जीते. 1982 में बीजेपी के लश्कारी राम जीते. 1985 में कांग्रेस के करम सिंह जीते. 1990 में बीजेपी के लश्कारी राम जीते. 1993 में कांग्रेस के कुलदीप सिंह पठनिया जीते. फिर 1998, 2003 और 2007 में बीजेपी के प्रेम कुमार धूमल जीते. 2012 में धूमल हमीरपुर से जीते, जबकि सुजानपुर से राजिंदर सिंह राणा जीते.

सुजानपुर विधानसभा सीट से कोई बड़ा नेता

इस सीट पर सबसे बड़ा नाम प्रेम कुमार धूमल ही हैं, जिन्हें बीजेपी ने अपना सीएम कैंडिडेट भी घोषित किया था. वो बीजेपी से पहले भी दो बार मुख्यमंत्री रह भी चुके हैं. सांसदी दो बार जीते हैं और दो बार हारे हैं. विधायकी चार बार जीते हैं. इनके बेटे अनुराग ठाकुर हमीरपुर से सांसद हैं, जिन्होंने हिमाचल में अपने पिता के लिए और गुजरात में बीजेपी के लिए चुनाव-प्रचार किया.

2017 चुनाव में धूमल के विरोधी राजिंदर राणा को खुद धूमल ही सियासत में लाए थे. उन्हें बीजेपी का मीडिया प्रभारी और धूमल का मीडिया सलाहकार भी बनाया गया. लेकिन 2010 में राणा का सेक्स रैकेट जैसे मामले में नाम आया और धूमल-राणा के रिश्तों में खटास आ गई. फिर राणा ने बीजेपी छोड़ दी. 2012 में राणा सुजानपुर से निर्दलीय लड़े और धूमल हमीरपुर से लड़े. दोनों अपनी-अपनी सीटों पर जीते और फिर 2017 में आमने-सामने आए.

2012 विधानसभा चुनाव का परिणाम

2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 44,847 वोटर्स थे और कुल 68.99 फीसदी वोटिंग हुई थी. इसमें निर्दलीय राणा ने कांग्रेस की अनीता वर्मा को 14,166 वोटों से हराया था.

1. राजिंदर राणा (निर्दलीय): 24,674 वोट (55.02%)
2. अनीता वर्मा (कांग्रेस): 10,508 वोट (23.43%)
3. उर्मिल ठाकुर (बीजेपी): 8,853 वोट (19.74%)

2017 विधानसभा चुनाव में ये उम्मीदवार थे

बीजेपी ने सुजानपुर से प्रेम कुमार धूमल को उतारा था, जो पिछले चुनाव में हमीरपुर सीट से चुनाव जीते थे. स्थानीय पत्रकार बताते हैं कि 2012 में धूमल-राणा के खराब रिश्तों के बारे में कम ही लोगों को पता था, ऐसे में धूमल के प्रभाव वाले इलाके में भी राणा जीत गए. कुछ लोग इसे ऐसे भी देखते हैं कि धूमल ने खुद ही राणा को जीतने दिया. एक थ्योरी ये भी बताई गई कि इस बार बीजेपी ने धूमल को राणा के सामने इसीलिए उतारा है, ताकि राणा की हार निश्चित हो सके. 2014 में राणा विधायकी छोड़कर धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर के खिलाफ लोकसभा चुनाव में उतर गए थे और हार गए थे. उनके सीट छोड़ने से सुजानपुर में उपचुनाव हुआ. उपचुनाव में कांग्रेस ने राणा की पत्नी अनीता राणा को उतारा और बीजेपी ने जगदेव चंद के बेटे नरिंदर ठाकुर को. नरिंदर चुनाव जीत गए थे.

प्रेम कुमार धूमल
प्रेम कुमार धूमल

कांग्रेस ने पिछले चुनावों के नतीजों से सबक लेते हुए इस बार राजिंदर राणा को टिकट दिया था. 2012 में कांग्रेस ने अनीता वर्मा को टिकट दिया था, जो निर्दलीय राणा के सामने दूसरे नंबर पर रही थीं. 2014 के उपचुनाव में कांग्रेस ने राणा की पत्नी अनीता राणा को टिकट दिया, लेकिन वो हार गई थीं. फिर 2017 में कांग्रेस ने धूमल के सामने राणा को उतारा. दूर से ये गुरु-चेले की कांटे की टक्कर दिख रही थी, लेकिन कयास यही लगाए जा रहे थे कि धूमल बड़े नेता हैं और अपना चुनाव आसानी से निकाल ले जाएंगे.

राजिंदर राणा
राजिंदर राणा

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ने रविंदर सिंह डोगरा, सीपीएम ने जोगिंदर कुमार और बीएसपी ने परवीन कुमार को टिकट दिया था.

2017 में जीत / हार के तीन फैक्टर्स

1. राजिंदर राणा को अपनी सीट पर जनाधार बढ़ाने के अलावा कोई काम नहीं था. इस बार उनके पास कांग्रेस का टिकट भी था. वो जीत गए.
2. प्रेम कुमार धूमल को सिर्फ अपनी ही सीट नहीं देखनी थी. वो दूसरी जगहों पर भी प्रचार करने गए, लेकिन अपनी सीट पर ज़रूरत के मुताबिक मेहनत नहीं कर पाए.
3. एक थ्योरी ये भी बताई जा रही है कि जेपी नड्डा को सूबे में वापस लाने के लिए प्रेम कुमार धूमल को राजनीतिक रूप से ठिकाने लगाया गया है. उनके बेटे अनुराग ठाकुर पहले से सांसद हैं.


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