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मोदी ने अपनी सबसे ताकतवर चीजों का इस्तेमाल गुजरात चुनाव में क्यों नहीं किया है?

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2014 का लोकसभा चुनाव बेहद करीब था. केंद्र में पिछले 10 साल से कांग्रेस नीत यूपीए की सरकार थी. बीजेपी ने चुनाव के लिए जो कोर टीम बनाई थी, नरेंद्र मोदी उसके अध्यक्ष थे.कांग्रेस का भ्रष्टाचार दुनिया के सामने था. महंगाई चरम पर थी. विकास की रफ्तार थम सी गई थी. ऐसे वक्त में बीजेपी की ओर से एक-एक करके नारे उछले और लोगों के जेहन में घर कर गए.

# बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार

# बहुत हुआ भ्रष्टाचार, अबकी बार मोदी सरकार

# सबका साथ सबका विकास

# सुशासन संकल्प, भाजपा विकल्प

# अच्छे दिन आने वाले हैं

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का पोस्टर.
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का पोस्टर.

इन नारों ने बीजेपी को पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में ला खड़ा किया. करीब तीन साल बाद यूपी में चुनाव होने थे. फिर नए नारे बने, जिनमें विकास, सुशासन, महिला अत्याचार, गुंडागर्दी जैसे मुद्दे शामिल थे.

# बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार भाजपा सरकार.

# न गुंडागर्दी न भ्रष्टाचार, अबकी बार भाजपा सरकार.

# परिवर्तन लाएंगे, कमल खिलाएंगे.

Acche din up
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ऐसे पोस्टर सामने आए थे.

नतीजा आया और कमल खिल गया. तीन साल बाद जब इस साल 26 मई 2017 को मोदी सरकार के तीन साल पूरे हो गए, तो फिर से नारा आया

# साथ है विश्वास है, हो रहा विकास है

वक्त बीता, सरकार बने करीब साढे़ तीन साल हो गए. फिर चुनाव आया. हिमाचल और गुजरात का. हिमाचल के लिए भी ये नारे मुफीद थे, क्योंकि वहां पिछले पांच साल से कांग्रेस की सरकार थी. ऐसे में विकास, भ्रष्टाचार, नारी सुरक्षा, शिक्षा से जुड़े नारे बरकरार रहे. लेकिन बात जब गुजरात चुनाव की हुई, तो ये मुद्दे सिरे से गायब हो गए. पिछले कुछ दिनों में पीएम मोदी ने अपनी रैलियों में गुजरात चुनाव के लिए जो मुद्दे उठाएं हैं, उनपर एक नजर डालिए-

01. पाकिस्तान गुजरात चुनाव में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तानी उच्चायुक्त और पाकिस्तान के खुफिया सैन्य अधिकारी दिल्ली में कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के घर पर गुप्त बैठक कर रहे हैं.” (10 दिसंबर, पालनपुर)

02. “कांग्रेस पार्टी के नेता सलमान निजामी स्टार प्रचारक हैं. वह मूलत: कश्मीर के रहने वाले हैं. कहते हैं आजाद कश्मीर चाहिए, कहते हैं कि सेना रेपिस्ट है. मां-बहनों का बलात्कार करने वाली है. क्या गुजरात की जनता माफ करेगी? कांग्रेस का वह युवा नेता कहता है कि घर घर से अफजल निकलेगा.” (9 दिसंबर, लूनावड़ा)

03. “कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल साफ करें कि वो मंदिर के समर्थकों के पक्ष में हैं या फिर मस्जिद के समर्थकों के पक्ष में.” (8 दिसंबर, कालोल)

04. मणिशंकर अय्यर पाकिस्‍तान में मेरी सुपारी देने गए थे.” (8 दिसंबर, बनासकांठा)

एक टीवी डिबेट के दौरान संबित पात्रा कहते कहते कह गए कि मोदी देश का बाप है. एक तो ये बयान अपने आप में बहुत फूहड़ है और उससे भी ज्यादा खराब संबित का तरीका था. वैसे इस तरह की फालतू बात जिस भी अंदाज में कही जाए, रद्दी ही रहेगी.
पीएम मोदी ने चुनावी सभा में कहा कि कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान में मेरी सुपारी देने गए थे.

05. “जब हिंदू पक्ष, शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड भी जल्द समाधान के पक्ष में हैं, तो फिर कपिल सिब्बल राम मंदिर की राह में रोड़े क्यों अटका रहे हैं?” (6 दिसंबर, अहमदाबाद)

06. यदि सरदार पटेल नहीं होते, तो सोमनाथ में मंदिर बनना कभी संभव नहीं होता. आज कुछ लोग सोमनाथ को याद कर रहे हैं, मुझे उनसे पूछना है, क्या आप अपना इतिहास भूल गए हैं? आपके परिवार के सदस्य, हमारे पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू वहां पर मंदिर बनने से खुश नहीं थे.” (29 नवंबर, प्राची)

07. मोरबी में इंदिरा बहन आईं थी तो बदबू के चलते उन्‍होंने नाक पर रुमाल रख लिया था. लेकिन जनसंघ और आरएसएस के लिए मोरबी की सड़कें खुशबू है, यह इंसानियत की खुशबू है.” (29 नवंबर, मोरबी)

08. “वे गुजरात आते हैं, गुजरात के बेटे के बारे में झूठ फैलाते हैं और बेबुनियाद आरोप लगाते हैं. उन्होंने (कांग्रेस ने) सरदार पटेल के बारे में भी ऐसा ही किया था. कोई भी गुजराती उनके झूठ को स्वीकार नहीं करेगा.” (27 नवंबर, भुज)

इन बातों में खोजिए, विकास कहां है. फिर से पढ़ जाइए, खोजने पर भी नहीं मिलेगा. ये अनायास नहीं है कि जिस गुजरात में बीजेपी पिछले 22 साल सत्ता में है, वहां वो विकास के अलावा और सभी मुद्दों, यहां तक कि पाकिस्तान के नाम पर भी वोट मांग रही है.

 

वो विकास के नाम पर वोट मांग भी नहीं सकती है. इसकी कुछ वजहें भी है:

1. गुजरात ने अपना राजकोषीय घाटा कम कर रखा है, जो विकास का एक पैमाना है.

2. ब्लूमबर्ग क्विंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक साक्षरता में गुजरात बहुत पीछे है.

3. यहां की साक्षरता दर 78.03 फीसदी है, जबकि केरल में ये 94 फीसदी और महाराष्ट्र में 82.34 फीसदी है.

4. हर एक लाख पर 28 कॉलेज हैं. केरल में ये संख्या प्रति एक लाख पर 43 और कर्नाटक में 50 है.

5. उच्च शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों की संख्या केरल से कम है.

6. इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या में भी गुजरात दूसरे राज्यों से पीछे है.

7. सोशल सेक्टर में गुजरात का खर्च महाराष्ट्र के बाद सबसे ज्यादा है.

जब गुजरात इन मुद्दों पर पिछड़ा है, तो विकास की बात कहां से हो पाएगी. आखिर 22 साल से सरकार बीजेपी की ही रही है, विकास की जिम्मेदारी भी बीजेपी सरकार की ही रही है. जैसा चाहिए था, 22 साल में विकास नहीं हुआ, तो अगले पांच साल में भी नहीं होगा. पीएम मोदी को इस बात का ठीक से पता है, इसलिए वो विकास के अलावा सभी मुद्दों पर वोट मांगते नजर आ रहे हैं.

अपने काम ही गिना लेते, तो विकास जस्टिफाई हो जाता

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पीएम मोदी ने मंदिर मुद्दे को भी गुजरात चुनाव में इस्तेमाल किया है.

तीन साल में मोदी सरकार ने देश को कई बड़े इवेंट दिए हैं. आलोचकों की न मानते हुए वे इन्हें उपलब्धियां बताते हैं. जैसे जीएसटी और उससे पहले नोटबंदी है. नोटबंदी करने के दौरान पीएम मोदी टीवी स्क्रीन पर नमूदार हुए थे. कहा था, भाइयों-बहनों 50 दिन दीजिए, भ्रष्टाचार, काला धन, सीमा पार से आतंकवाद, नकली नोट, कश्मीर में पत्थरबाजी और पता नहीं क्या-क्या ठीक हो जाएगा. जीएसटी लागू किया तो कहा कि देश के व्यापारियों को राहत मिलेगी.

दोनों का हाल क्या हुआ, ये सबको पता है. खुद मोदी को भी. यही वजह है शायद कि चुनाव प्रचार के दौरान वो जीएसटी और नोटबंदी पर नहीं बोल रहे. बीजेपी के प्रवक्ताओं के मुताबिक ये फैसले ऐतिहासिक हैं. अगर इतने एेतिहासिक है तो हर रैली में इन्हीं की बात करके जनता से वोट नरेंद्र मोदी क्यों नहीं मांग रहे?

प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को सरदार सरोवर बांध का लोकार्पण किया.(दाएं) मध्यप्रदेश में 36 महिलाएं विरोध में जल सत्याग्रह कर रही हैं.
प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को सरदार सरोवर बांध का लोकार्पण किया.(दाएं) मध्यप्रदेश में 36 महिलाएं विरोध में जल सत्याग्रह कर रही थीं.

‘ये तो राष्ट्रीय मुद्दे हैं’, ये लॉजिक देकर बीजेपी इन्हें साइड में भी कर सकती है. चलिए, ठीक है. गुजरात की बात करते हैं. सरदार सरोवर डैम बना, एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा डैम. उद्घाटन करते वक्त कहा गया कि इससे पूरे गुजरात को फायदा होगा. महीनों गुजर गए, इसी परियोजना का फायदा गिनाकर वोट मांग लेते, तो उनका किया गया विकास जस्टिफाई हो जाता. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

वजह साफ है, विकास के नाम पर किए गए वादों का हश्र आम जनता तो छोड़िए, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी नहीं छिपा है. उनको बेहतर ढंग से पता है कि उनकी नीतियों का कौन सा ख़ामियाजा जनता भुगत रही है. ऐसे में वो विकास की बात तो नहीं ही कर सकते थे. ऐसे में ले देकर बचता है मंदिर, पाकिस्तान, आतंकवाद, तीन तलाक, जिसके आधार पर मोदी वोट मांगने में जुटे हुए हैं.

अपने घर में तो हिम्मत दिखानी ही चाहिए थी

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बनासकांठा में पीएम मोदी ने रैली कर वोट मांगे.

2018 में तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव है, जहां बीजेपी की सरकार है. राजस्थान को छोड़ दिया जाए, तो मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में लंबे समय से बीजेपी की सरकार है. राजस्थान में भी अगले साल पांच साल हो जाएंगे. 2019 में लोकसभा का चुनाव है. ऐसे में पीएम मोदी अपने घर गुजरात को अपने काम का लिटमस टेस्ट मान लेते. गुजरात मोदी का गृहराज्य है. वो 12 साल इस राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं. एकछत्र राज किया है. अपने हिसाब से विकास किया है. उनको चुनौती देना तो दूर, आस-पास भी कोई खड़ा नहीं हो सका है. वो खुद को गुजरात का बेटा कहते भी हैं.

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12 साल तक मोदी गुजरात के मुख्यमंंत्री रहे थे.

गुजरात के लोगों ने उन्हें बेटे जैसा प्यार दिया भी है. पहले 12 साल राज्य में फिर केंद्र में. प्यार बरकरार है. ऐसे में पीएम मोदी को तो अपने घर में सच बोलने की हिम्मत दिखानी चाहिए थी. उन्हें बताना चाहिए था कि 22 साल में उन्होंने या पूरी बीजेपी ने गुजरात के लिए क्या किया? उन्हें अपने घरवालों से बताना चाहिए था कि तीन साल से केंद्र में बैठकर उन्होंने विकास की नई इबारत लिखी है. उन्हें बताना चाहिए था कि पार्टी ने उनको जिस विकास पुरुष के नारे से नवाजा है, वो सच है. गुजरात तो उनकी मां है, मां अपने बेटे से नाराज नहीं होती है, उसका गुस्सा भी प्यार ही होता है. अगर मोदी कुछ नहीं कर पाए थे, तो ये भी बताना चाहिए था मां के सामने. क्या होता, थोड़ी डांट पड़ती, थोड़े से फटकारे जाते, लेकिन मां अपने बच्चे को खुद से दूर थोड़े ही करती. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

मोदी ने इस चुनाव में अपनी विकास पुरुष वाली छवि पूरी तरह छोड़ दी है और एक बेचैन नेता वाले सारे हथकंडे अपनाए हैं. मान लें कि इस जरिए से वे 18 दिसंबर को जीत जाते हैं, लेकिन इस दिन उनकी विकास पुरुष वाली छवि हार चुकी होगी और इतिहास के पन्नों में वे एक महान नेता के बजाय सिर्फ politics करने वाले एक गुजराती नेता के तौर पर दर्ज कर लिए जाएंगे.


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वीडियो में देखिए गुजरात के उस गांव की कहानी, जहां विकास पागल हो गया है

 

 

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