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बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष जिनके खिलाफ अरेस्ट वॉरंट निकला, उनका क्या हुआ?

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विधानसभा: भावनगर पश्चिम (भावनगर)

बीजेपी 27,185 वोटों से जीती.

बीजेपी के जीतू बाघानी कोः 83,701 वोट

कांग्रेस के दिलीप सिंह गोहिल को 56,516 वोट

गुजरात का विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पाटीदार नेता हार्दिक पटेल और दलित नेता जिग्नेश मेवानी के लिए उनकी प्रतिष्ठा का सवाल था. इन बड़े नामों के अलावा और भी कई नेता थे, जिनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. ऐसे ही एक नेता थे जीतूभाई बाघानी, जो अपनी सीट बचाने की लड़ाई लड़ रहे थे. जीतूभाई के लिए ये सीट जीतनी इसलिए भी जरूरी थी, क्योंकि वो गुजरात बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं. चुनाव से ऐन पहले जीतूभाई बाघानी फ्रॉड के केस में भी फंसते नज़र आए थे. एक चेक बाउंस के केस में मुंबई कोर्ट ने उनके खिलाफ अरेस्ट वॉरंट तक निकाल दिया था.

विजय रूपानी जब गुजरात के मुख्यमंत्री बन गए, तो जीतू बाघानी को गुजरात बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया था.
विजय रूपाणी जब गुजरात के मुख्यमंत्री बन गए तो जीतू बाघानी को गुजरात बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया था.

जीतूभाई ने 2007 में जब अपना राजनीतिक करियर शुरू किया, तो उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था. उन्होंने भावनगर ग्रामीण सीट से 2007 का विधानसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेता माने जाने वाले शक्तिसिंह गोहिल से 7000 वोटों से हार गए थे. 2012 में जब भावनगर पश्चिम से चुनाव लड़ा तो जीत हासिल की और इतनी बड़ी जीत हासिल की कि वो पूरे सौराष्ट्र में सबसे ज़्यादा मार्जिन वाली जीत थी. इस बार का चुनाव जीतूभाई के लिए इसलिए भी बड़ा था, क्योंकि इस बार जीतूभाई सिर्फ बीजेपी के विधायक ही नहीं, गुजरात बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी थे.

Jeetu-Dilip
जीतूभाई बाघानी (बाएं) ने कांग्रेस के दिलीप गोहिल को बड़े अंतर से हरा दिया है.

पिछला नतीजा : बीजेपी के जीतूभाई बाघानी ने कांग्रेस के मनसुखभाई कनानी को 54 हजार वोटों से हराया था.
इस बार का नतीजा : बाघानी ने कांग्रेस के दिलीप सिंह गोहिल को हरा दिया है.

तीन लोकल मुद्दे, जिसने बीजेपी को जीत दिलाने में मदद की

1. भावनगर पश्चिम की सीट शहरी सीट थी. शहरी सीटों में पारंपरिक तौर पर बीजेपी के वोटर माने जाते हैं.

2. जीतूभाई बाघानी इस चुनाव में सिर्फ बीजेपी के नेता ही नहीं, गुजरात बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी थे. इसका वोटरों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा.

3. भले ही पाटीदार बीजेपी से नाराज थे, लेकिन उन्हें जीतू के रूप में एक अपना आदमी ताकतवर नजर आ रहा था. जीतू बाघानी लेवा पाटीदार समुदाय से आते हैं, जिसका पूरे राज्य में काफी प्रभाव है.


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