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विजय रूपानी फिर चर्चा में हैं, वजह उनका विरोधी उम्मीदवार है

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गुजरात चुनाव में बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाने के लिए कांग्रेस पूरी ताकत से जुटी हुई है. बीजेपी के लिए विजय रूपानी की जो सीट प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है, उस सीट को जीतने के लिए कांग्रेस ने भी सारे घोड़े खोल दिए हैं. सौराष्ट्र में बीजेपी की सबसे मजबूत मानी जाने वाली राजकोट पश्चिमी सीट पर कांग्रेस ने राजकोट पूर्वी के विधायक इंद्रनील राजगुरु को मैदान में उतारा है. इंद्रनील बहुत पैसे वाले हैं. राजनीति में इनका एक नाम ‘धन कुबेर’भी है. 2012 के विधानसभा चुनाव में भी वो सबसे अमीर प्रत्याशी थे. इस बार तो उनकी दौलत और बढ़ गई है. 141 करोड़ की संपत्ति के मालिक इंद्रनील पैसा और ताकत, कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. लेकिन इंद्रनील राजगुरु पर मुसीबत आ गई.  2 दिसंबर की रात को राजकोट पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. हालांकि बाद में जब कांग्रेस ने बीजेपी पर हमला बोला, तो पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया.

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इंद्रनील की गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने बीजेपी को कटघरे में खड़ा किया, जिसके बाद इंद्रनील रिहा कर दिए गए. 

राजकोट की पश्चिमी सीट से विजय रूपानी दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं. 1985 से ही ये सीट बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक रही है. विजय रूपानी से पहले कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक विधायक रहे हैं. इसलिए ये सीट बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीट है. 2012 के चुनाव में इंद्रनील राजकोट पूर्वी सीट से जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे. इस बार पार्टी ने उन्हें विजय रूपानी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा है. इंद्रनील की जीत के लिए उनके भाई दिव्यनील राजगुरु (दीपू) 2 दिसंबर की शाम ब्रह्मसमाज चौक पर एक सभा कर रहे थे. इस दौरान किसी ने दीपू राजगुरु पर हमला कर दिया. भाई पर हमले की बात सुनते ही इंद्रनील राजगुरु अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए और पुलिस से हमलावरों के खिलाफ ऐक्शन लेने की मांग की.

इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पुलिस से बहस हो गई. बाद में इंद्रनील राजगुरु की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री विजय रूपानी के घर के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया. पुलिस जब उन्हें रोकने में नाकाम रही, तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया गया. पुलिस लाठीचार्ज में कई कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हो गए. इसके बाद पुलिस ने इंद्रनील राजगुरु और उनके कुछ समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया. वहीं पुलिस ने राजकोट (पूर्व) सीट से कांग्रेस उम्मीदवार मितुल डोंगा को भी गिरफ्तार कर लिया गया. बाद में पुलिस ने दोनों को रिहा कर दिया.

इंद्रनील राजगुरु की गिरफ्तारी का वीडियो यूट्यूब पर भी मौजूद है.

गुजरात कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने इंद्रनील राजगुरु की गिरफ्तारी पर कहा कि पुलिसिया कार्रवाई साबित करती है कि बीजेपी सरकार कैसे काम कर रही है. अगर इतने बड़े नेता के खिलाफ पुलिस ऐसे पेश आती है, तो आम लोगों का क्या होगा. राजनीति के लिए बीजेपी बिल्कुल निचले स्तर पर पहुंच गई है.

कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने भी ट्वीट कर राजगुरु की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं.


कांग्रेस नेता अर्जुन मोढवाडिया ने भी सवाल उठाते हुए ट्वीट किया है

हर हाल में सीट जीतना चाहती है बीजेपी

बीजेपी की तैयारियों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो इस मुकाबले को बहुत गंभीरता से ले रही है. चुनाव की तैयारियों के लिए एक गुप्त वॉर रूम बनाया गया है. वॉर रूम माने वो जगह, जो चुनाव की तैयारियों का अड्डा होता है. ये वॉर रूम खासतौर पर इस सीट के लिए बनाया गया है. मुंबई, दिल्ली और पटना से IT विशेषज्ञों को बुलाया गया है. ये लोग 9 दिसंबर तक राजकोट में ही डेरा डाले रहेंगे. मीडिया खबरों की मानें, तो इस वॉर रूम के बारे में बीजेपी के बाकी IT एक्सपर्ट्स तक को कोई जानकारी नहीं है. इसे लेकर इतनी सतर्कता बरती जा रही है कि बिना इजाजत यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता टाइप स्थिति है. यहां तक कि पार्टी कार्यकर्ताओं का भी अंदर आना मना है. इस वॉर रूम के कुछ एक्सपर्ट बीजेपी के साथ पहले भी काम कर चुके हैं. 2014 में मोदी की टीम के साथ. सोशल मीडिया पर खूब ध्यान दिया जा रहा है. और ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि इंद्रनील राजगुरु राजकोट पूर्वी से विधायक हैं और अब वो विजय रूपानी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं.

विजय रूपानी के खिलाफ अपनी उम्मीदवारी पर उन्होंने जो कहा था, उसे सुनिए.

स्थानीय लोगों के मुताबिक इंद्रनील पिछले एक साल से इस सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे. 2012 के चुनाव में इस सीट पर बीजेपी को 56 फीसदी वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के पाले में 40 पर्सेंट वोट आए थे. इंद्रनील राजगुरु के पास इसी 16 फीसदी वोट को पाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.


वीडियो में देखें उस जगह की हालत, जहां का नवाब पाकिस्तान भाग गया

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