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गुजरात चुनाव: कौन है वो शख्स, जिसके आगे 'गिड़गिड़ा' रहे हैं मुख्यमंत्री विजय रुपानी!

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चुनाव के टाइम में कांड खूब होते हैं. गुजरात चुनाव में भी हो रहे हैं. ताबड़तोड़ वायरल माल आ रहा है उधर से. ताजा माल एक ऑडियो क्लिप है. इसके साथ नाम जुड़ रहा है गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी का. इसमें विजय रुपानी कह रहे हैं कि बीजेपी और खुद उनकी हालत काफी टाइट है. रुपानी किसी नरेश नाम के शख्स के साथ बात कर रहे हैं. उसे अपना नामांकन वापस लेने के लिए मना रहे हैं. उसे याद दिला रहे हैं कि पूरे देश में बस एक जैन मुख्यमंत्री है. उनकी आवाज में मुख्यमंत्री टाइप फील नहीं आ रहा मगर. लग रहा है जैसे मनुहार कर रहे हों. ये शख्स कौन है, इस बारे में हमने थोड़ी तफ्तीश की. सुरेंद्रनगर जिले की खुदाई की. इस मशक्कत में हाथ आया एक नाम. नरेश संगीतम. इनका रुपानी और राजनीति, दोनों से ही रिश्ता निकल आया. और रुपानी इस कथित ऑडियो में जो भी कह रहे हैं, उसका संदर्भ-प्रसंग भी हाथ आ गया.

इस बार बीजेपी ने जैन उम्मीदवार की जगह पाटीदार प्रत्याशी को टिकट दिया

ये जो नरेश संगीतम हैं, वो जैन हैं. गायक हैं. इनके गानों की सीडी भी मिल जाएगी आपको बाजार में. गायिकी के कारण ही इनके नाम के आगे ‘संगीतम’ जोड़ा जाने लगा. सुरेंद्रनगर से ताल्लुक रखते हैं. और ज्यादा स्पष्ट कहें तो सुरेंद्रनगर जिले की वाधवान सीट से वास्ता रखते हैं. उनकी कहानी पर आगे बढ़ने से पहले थोड़ा इस वाधवान सीट का जिक्र करना होगा. यहां से पिछली बार बीजेपी उम्मीदवार वर्षा बेन दोषी जीती थीं. वो जैन थीं. इस बार पार्टी ने वर्षा बेन का टिकट काट दिया.

वजह ये रही कि वर्षा बेन की काफी किरकिरी हो चुकी थी. हर तरफ से टोकरा भर शिकायत आ रही थी उनकी. भ्रष्टाचार का आरोप था. गोचर की जमीन के किसी घोटाले में शामिल होने का भी आरोप था. इसके अलावा लोग भी खुश नहीं थे उनसे. कहते थे कि जीतने के बाद बिल्कुल गायब रहीं. अपने क्षेत्र में नहीं गईं. लोगों से नहीं मिलीं. तो वर्षा बेन के खिलाफ इतना माहौल बन गया कि बीजेपी ने उन्हें दोबारा टिकट नहीं दिया इस बार. उनकी जगह टिकट मिला धनजीभाई पटेल को. धनजीभाई पटेल बहुत बड़े आदमी हैं. बहुत अमीर कारोबारी हैं. उनकी एक फर्म है. मसकोन नाम है कंपनी का. खाने-पीने की चीजें बनाती है. जमीन से कोई नाता नहीं है उनका. जैसा कि नाम से ही जाहिर है, धनजीभाई पाटीदार समाज से ताल्लुक रखते हैं.

समर्थकों के साथ नॉमिनेशन करने जा रहे नरेश संगीतम. नरेश ने बाद में पर्चा वापस ले लिया.
दाहिनी ओर खड़े जिस शख्स ने काला चश्मा लगाया हुआ है और जिनके गले में खूब सारी मालाएं दिख रही हैं, वो ही हैं नरेश संगीतम. ये तब की तस्वीर है जब वो अपने समर्थकों के साथ नॉमिनेशन करने गए थे. नरेश ने बाद में पर्चा वापस ले लिया. पांच और जैन उम्मीदवारों ने यहां से नॉमिनेशन वापस लिया है. खबर है कि उन्होंने बीजेपी के दबाव में ऐसा किया.

बीजेपी से नाराज़ जैन समाज ने अपना उम्मीदवार मैदान में उतार दिया

धनजीभाई को टिकट मिलने की देर थी कि सुरेंद्रनगर में हंगामा शुरू हो गया. जैन समाज खूब नाराज़ हो गया. उसका कहना था कि अगर वर्षा बेन को टिकट नहीं दे सकते तो किसी और जैन को दो टिकट. पाटीदार को क्यों दिया? उधर बीजेपी कार्यकर्ता भी आग-बबूला हैं. उनका कहना है कि धनजीभाई तो बीजेपी के सदस्य भी नहीं थे. फिर उनको टिकट देने की मेहरबानी क्यों की गई? बीजेपी के ही लोग खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि पार्टी ने सात करोड़ रुपए में धनजीभाई को टिकट बेचा.

बीजेपी के सामने ये दो-तरफा तलवार पर चलने जैसी स्थिति आ गई. एक तरफ जैन समाज नाराज़. दूसरी तरफ पार्टी कार्यकर्ता नाराज़. जैन समाज ने बीजेपी को धमकी दी. कहा, जैन को टिकट नहीं दिया तो हम अपना स्वतंत्र उम्मीदवार उतारेंगे. ये जो वाधवान सीट है, वहां जैन मजबूत हैं. ढाई लाख वोटर हैं यहां कुल. इनमें करीब 25 हजार जैन हैं. इतनी ही संख्या पाटीदारों की भी है. बीजेपी ने तो यही समीकरण देखकर टिकट बांटा होगा. जैन नहीं, तो पाटीदार. लेकिन अगर जैन बीजेपी के खिलाफ वोट दें तो पार्टी को बहुत नुकसान होगा. खैर. बीजेपी उम्मीदवार का नाम वापस लेने की स्थिति में तो थी नहीं. किरकिरी तो होती ही, साथ में पाटीदार भी नाराज़ हो जाते. बस इसी समय एंट्री हुई नरेश संगीतम की.

हार्दिक पटेल भी सुरेंद्र नगर पहुंचे थे. यहां के भक्तिनगर सर्कल में उन्होंने बाइक रैली भी निकाली थी.
हार्दिक पटेल भी सुरेंद्र नगर पहुंचे थे. यहां के भक्तिनगर सर्किल में उन्होंने बाइक रैली भी निकाली थी. हार्दिक खुद तो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, मगर कांग्रेस को समर्थन दे रहे हैं.

रुपानी ने किसी तीसरे शख्स को फोन मिलाकर संगीतम से बात की थी!

नरेश जैन हैं. समाज में अच्छा-खासा रुतबा रखते हैं. जैन समाज ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाकर चुनाव में उतार दिया. नामांकन वाला पर्चा भी दाखिल करवा दिया. बस इससे बीजेपी के हाथ-पांव फूल गए. इतने वोटरों को नाराज़ करने का जोखिम नहीं ले सकती वो. विजय रुपानी खुद भी जैन हैं. अगर जैन ही उनके लिए वोट नहीं करेंगे तो पार्टी में उनकी क्या साख रह जाएगी! इसीलिए रुपानी ने नरेश संगीतम से बात की होगी. सूत्रों की मानें, तो रुपानी ने सीधे संगीतम को फोन नहीं किया था. उन्होंने किसी तीसरे शख्स को फोन किया और संगीतम से बात कराने को कहा. जो ऑडियो लीक हुआ है, उसमें रुपानी कह रहे हैं:

विजय रुपानी – नरेशभाई, हमें लड़ना नहीं है. फॉर्म वापस ही लेना है क्योंकि पूरे भारत में एक ही जैन मुख्यमंत्री है.
नरेश – बराबर
विजय रुपानी – मुझे नरेंद्र भाई का फोन आया था. उन्होंने कहा कि पांच फीसदी जैन भी नहीं हैं, फिर भी हमने जैन को मुख्यमंत्री बनाया. और सुरेंद्रनगर में जैन माने या नहीं?
नरेश – माने-माने, क्यों नहीं माने..
विजय रुपानी – हमारी सबकी परिस्थिति खराब है, मेरी स्थिति ज्यादा खराब हो रही है.
नरेश – हम आपकी परिस्थिति खराब नहीं होने देंगे. आपका साथ देंगे.

कांग्रेस के उम्मीदवार मोहनभाई पटेल के पक्ष में अच्छा माहौल बन रहा है. मोहनभाई की छवि अच्छी है. लोग उनके बारे में अच्छी राय रखते हैं. अगर जैन समाज उन्हें वोट देता है, तो उनकी जीत पक्की ही हो जाएगी.
कांग्रेस के उम्मीदवार मोहनभाई पटेल के पक्ष में अच्छा माहौल बन रहा है. मोहनभाई की छवि अच्छी है. लोग उनके बारे में अच्छी राय रखते हैं. अगर जैन समाज उन्हें वोट देता है तो उनकी जीत पक्की ही हो जाएगी.

ऑडियो में रुपानी ने जो कहा, नरेश संगीतम ने वैसा ही किया!

ये बातचीत पूरी नहीं लीक की गई है. बस एक हिस्सा काटकर उड़ा दिया गया है. इसी एक हिस्से की बातचीत ने विजय रुपानी और उनके साथ-साथ बीजेपी की किरकिरी करा दी है. वैसे बता दें कि नरेश संगीतम अपना नामांकन वापस ले चुके हैं. उन्होंने ठीक वैसा ही किया, जैसी विनती इस कथित ऑडियो में रुपानी उनसे करते सुनाई दे रहे हैं. संगीतम के नामांकन वापस लेने के बाद भी बीजेपी का संकट कम नहीं हुआ है. जैन समाज उससे नाराज़ है तो है. उसने कांग्रेस को वोट देने की धमकी दी है. वैसे इस सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भारी लग भी रहा है. इसकी वजह कांग्रेस नहीं, उसके उम्मीदवार हैं.

कांग्रेस ने यहां मोहनभाई पटेल को टिकट दिया है. यानी, दोनों मुख्य उम्मीदवार पटेल हैं. वोट तो कटेंगे. मोहनभाई पटेल की छवि भी बहुत अच्छी है. लोग बड़ा मानते हैं उनको. जमीन के आदमी माने जाते हैं. लोगों के सुख-दुख में काम आते हैं. यहां की मंडी बाजार के चेयरमैन भी हैं. साथ में, द्वारकाधीश मंदिर के ट्रस्टी भी हैं. कारोबारी ये भी हैं. हीरो हॉन्डा का एक शोरूम है इनका. धनजीभाई के मुकाबले बीस नजर आते हैं. आगे जो होगा, वो तो 18 दिसंबर को ही मालूम चलेगा.

बीजेपी के दबाव में कई निर्दलीय जैन उम्मीदवारों ने नामांकन वापस लिया!

इस सीट से करीब 18 निर्दलीय उम्मीदवारों ने पर्चा भरा था. अब सुनने में आ रहा है कि पांच जैन प्रत्याशी अपना नामांकन वापस ले चुके हैं. इन पांचों जैन प्रत्याशियों ने 24 नवंबर को नामांकन वापस लिया. वो नॉमिनेशन वापस लेने की आखिरी तारीख थी. खबरों के मुताबिक, बीजेपी के दबाव के कारण ये उम्मीदवार पीछे हट गए. फिलहाल, हम नहीं जानते कि ये ऑडियो असली है या फर्जी. जब तक ऑडियो की पुष्टि नहीं होती, तब तक कसम खाकर तो कुछ नहीं कहा जा सकता. वैसे अगर ये ऑडियो असली है तो यकीनन बीजेपी मुश्किल में है. आखिरकार, उसके मुख्यमंत्री खुद हालत टाइट होने की बात कह रहे हैं.


टीम लल्लनटॉप गुजरात के एक-एक जिले में पहुंचकर ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रही है. गुजरात चुनाव से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें: 

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