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2014 के मुकाबले कच्चा तेल सस्ता, फिर भी केंद्र ने पेट्रोल-डीजल पर इतना टैक्स क्यों बढ़ा रखा है?

दिवाली से एक दिन पहले यानी बुधवार 3 नवंबर को केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर 5 रुपए और डीजल पर 10 रुपए एक्साइज ड्यूटी घटा दी. सरकार के इस फैसले को कुछ लोगों ने दिवाली का तोहफा कहा, तो कुछ ने कहा कि उपचुनाव में ‘हार’ के बाद सरकार ने ये फैसला लिया है. केंद्र के फैसले के बाद कई राज्यों खासकर बीजेपी शासित राज्यों ने पेट्रोल-डीजल पर वैट यानी वैल्यू एडेड टैक्स कम कर दिया. इससे लोगों को पेट्रोल-डीजल पर थोड़ी राहत मिली है. हालांकि अब भी पेट्रोल का दाम 100 रुपए प्रति लीटर से ज्यादा ही है. दिल्ली में 5 नवंबर को पेट्रोल 103.97 तो डीजल 86.67 प्रतिलीटर बिक रहा है.

एक्साइज ड्यूटी कम करने के बाद भी केंद्र सरकार 2014 के मुकाबले पेट्रोल-डीजल पर जमकर टैक्स वसूल रही है. इस स्टोरी में हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि जब मोदी सरकार 2014 में पहली बार सत्ता में आई तो पेट्रोल डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कितनी थी. अभी कितनी है. राज्य सरकारें कितना वैट ले रही हैं. और क्रूड ऑयल की कीमत अभी क्या है और तब क्या थी.

एक्साइज ड्यूटी क्या है?

आगे बढ़ने से पहले ये जान लेते हैं कि एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क क्या होता है? एक्साइज ड्यूटी या एक्साइज टैक्स एक तरह का अप्रत्यक्ष कर (indierct tax) है. इसे किसी प्रोडक्ट के उत्पादन या मैनुफैक्चरिंग पर लगाया जाता है. जिसके बाद प्रोडक्ट मार्केट में बिकने के लिए आता है. GST लागू होने से पहले लगभग हर तरह के प्रोडक्ट पर एक्साइज ड्यूटी लगती थी. लेकिन GST के बाद अब यह केवल कुछ ही वस्तुओं पर लगती है. जैसे- शराब, पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस, क्रूड ऑयल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल आदि.

2014 की बात करें तो तब पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.48 रु. थी. अभी 27.90 रुपए है. डीजल पर एक्साइज ड्यूटी तब 3.56 रुपए थी, इस वक्त ये 21.80 रुपए है. पेट्रोल और डीजल एक्साइज ड्यूटी कब कितनी रही, इस चार्ट से आपको समझ आ जाएगा.

 

Chart1

इस चार्ट में 2021 के आंकड़े एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद के हैं. इस चार्ट से पता चलता है कि मोदी सरकार एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद भी पेट्रोल पर 27.90 रुपए तो डीजल पर 21.80 रुपए टैक्स ले रही है. केंद्र सरकार ने 2014-15 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी से 29,279 करोड़ रुपये कमाए थे. तब डीजल पर 42,881 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष (2020-21) के पहले 10 महीनों में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर टैक्स से 2.94 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे. मोदी सरकार में 13 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है, लेकिन घटी सिर्फ 4 बार. आखिरी बार मई 2020 में एक्साइज ड्यूटी बढ़ी थी. और अब नवंबर में इसमें कटौती की गई है.

राज्यों के टैक्स पर आते हैं

पेट्रोल को GST यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के दायरे से फिलहाल बाहर रखा गया है. इस वजह से इस पर लगने वाला टैक्स हर राज्य में अलग-अलग है. 26 जुलाई को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में बताया था कि पेट्रोल पर सबसे ज्यादा वैट मध्य प्रदेश सरकार लेती है, जो 31.55 रुपये प्रति लीटर है. वहीं डीज़ल पर सबसे ज्यादा वैट राजस्थान में लगता है. सबसे कम वैट लेने वाला अंडमान निकोबार द्वीप समूह है जहां पेट्रोल पर 4.82 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल पर 4.74 प्रति लीटर वैट लिया जाता है. राज्य सरकारें वैट के साथ साथ कई बार कुछ अन्य टैक्स भी जोड़ देती हैं जिन्हें ग्रीन टैक्स, टाउन रेट टैक्स जैसे नाम दिए जाते हैं.

पेट्रोल डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद केंद्र सरकार की अपील पर 16 राज्य वैट की दरों में कटौती की घोषणा कर चुके हैं. इनमें उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, उत्तराखंड, गोवा, कर्नाटक, असम, मणिपुर और त्रिपुरा शामिल हैं. आइए बताते हैं, कहां कितना वैट घटा है.

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पेट्रोल पर 7 रुपए तो डीजल पर 2 रुपए वैट घटाने का ऐलान किया है. इस घोषणा से पहले तक यूपी सरकार पेट्रोल पर 26.80% या 18.74/Litre , इनमें जो भी अधिक हो, वैट लेती थी. वहीं डीजल पर 17.48% या Rs 10.41/Litre, इनमें जो ज्यादा हो, उस हिसाब से वैट लगाती थी.

बिहार

बिहार में जेडीयू और बीजेपी गठबंधन की सरकार है. राज्य सरकार ने पेट्रोल पर 3.20 रुपए और डीजल पर 3.90 रुपए वैट घटाया है. इससे पहले पेट्रोल पर 26% या Rs 16.65/Litre जो भी ज्यादा हो, वैट लगता था. डीजल पर 19% या 12.33/Litre तक वैट लिया जाता था.

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर 4-4 प्रतिशत वैट की कटौती की है. पेट्रोल पर प्रदेश में 33% वैट लगता था. इसके अलावा 1 प्रतिशत सेस भी जुड़ता था. वहीं डीजल के रेट में 23 प्रतिशत वैट और 1 प्रतिशत सेस लगकर आता था.

गुजरात

गुजरात सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर वैट में सात-सात रुपए प्रति लीटर की कमी की है. इस कटौती से पहले गुजरात सरकार पेट्रोल पर 20.1% वैट और इसके अलावा 4% Cess लगाती थी. वहीं डीजल पर 20.2% वैट और 4% सेस लगता था.

हरियाणा

हरियाणा सरकार ने पेट्रोल पर 7 रुपए वहीं डीजल पर 2 रुपए वैट घटाने की घोषणा की है. इससे पहले राज्य सरकार पेट्रोल पर 25 प्रतिशत या 15.62 प्रति लीटर, जो भी ज्यादा हो, वैट वसूलती थी. इसके अलावा वैट पर 5 प्रतिशत एडिशनल टैक्स भी लिया जाता था. उसी तरह डीजल पर 16.40 प्रतिशत या 10.08 रुपए प्रति लीटर, जो भी ज्यादा हो, वैट लगता था. इसके अलावा वैट पर 5 प्रतिशत एडिशनल टैक्स लगता था.

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश सरकार ने पेट्रोल पर दो रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 4.60 रुपए प्रति लीटर वैट घटाने की घोषणा की है. इससे पहले सरकार पेट्रोल पर 25 प्रतिशत या 15.50 रुपए प्रति लीटर, जो भी ज्यादा हो वैट लेती थी. डीजल की बात करें तो उस पर 14 प्रतिशत या 9 रुपए प्रति लीटर जो भी ज्यादा हो, वैट वसूल किया जाता था.

गैर बीजेपी शासित राज्यों के क्या हाल हैं?

ओडिशा ने पेट्रोल और डीजल पर तीन रुपये प्रति लीटर वैट की कटौती की है. इस कटौती से पहले ओडिशा सरकार पेट्रोल पर 32 प्रतिशत और डीजल पर 28 प्रतिशत टैक्स वसूलती थी. वहीं कांग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़, राजस्थान और पंजाब ने वैट घटाने की कोई घोषणा नहीं की है. इसके अलावा महाराष्ट्र में भी किसी तरह का वैट घटाने का ऐलान नहीं हुआ है, जहां कांग्रेस गठबंधन सरकार में है.

बता दें कि छत्तीसगढ़ पेट्रोल और डीजल दोनों पर 25 प्रतिशत वैट लेता है. राजस्थान में पेट्रोल पर 36 प्रतिशत तो डीजल पर 26 प्रतिशत वैट लगता है. पंजाब पेट्रोल पर 24.79% वैट के अलावा कई तरह के टैक्स और भी लेता है. वहां डीजल पर 15.94% वैट और अन्य टैक्स लगते हैं. महाराष्ट्र में पेट्रोल पर 25% VAT और Rs.10.12 प्रति लीटर एडिशनल टैक्स वसूले जाते हैं. राज्य में डीजल पर 21% VAT के अलावा 3 रुपये प्रति लीटर अन्य टैक्स भी लगते हैं.

कौन सा राज्य पेट्रोल-डीजल पर कितना टैक्स लेता है, आप यहां पूरी लिस्ट देख सकते हैं.

क्रूड ऑयल सस्ता तो पेट्रोल-डीजल महंगा क्यों?

मई 2014 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने, तब कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 106.85 डॉलर प्रति बैरल थी. (एक बैरल में 159 लीटर कच्चा तेल होता है.) उस वक्त दिल्ली में पेट्रोल 71.41 रु. और डीजल 56.71 रु./लीटर बिक रहा था. इस चार्ट में देखिए साल दर साल क्रूड ऑयल के मुकाबले देश की राजधानी में पेट्रोल और डीजल के दामों में कैसे उतार चढ़ाव आए.

Chart2

इस चार्ट के आधार पर कहा जा सकता है कि मई 2014 में जब क्रूड ऑयल 106 डॉलर से ऊपर था तो पेट्रोल 71 रुपए और डीजल 65 रुपए प्रति लीटर था. जबकि नवंबर 2021 में जब कच्चे तेल के दाम लगभग 82 रुपये हैं, फिर भी पेट्रोल 103 रुपये और डीजल 86 रुपये से ज्यादा महंगा बिक रहा है. नवंबर 2021 के ये रेट केंद्र सरकार की ओर से 3 नवंबर को एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद के हैं.

सरकार इतना टैक्स लेती क्यों है?

कहा जा रहा है कि डीजल और पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती से 45,000 करोड़ रुपये का घाटा केंद्र को होगा. पेट्रोल-डीजल पर ज्यादा टैक्स वसूली को केंद्र सरकार सही ठहराती रही है. इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी कह चुके हैं कि टैक्स से मिले रुपयों का इस्तेमाल सड़कों के निर्माण, गरीबों के लिए घर बनाने और कई सामाजिक कल्याण की योजनाओं में किया जाता है. सरकार पेट्रोल-डीजल पर जो एक्साइज टैक्स लेती है, उससे कई तरह की कल्याणकारी योजनाएं चलाई जाती हैं. हकीकत ये भी है कि कोरोना के समय अन्य सेक्टरों से सरकार की कमाई घटी है.

2014 की तुलना में पेट्रोल-डीजल पर इस समय ज्यादा टैक्स वसूली पर फॉर्च्यून इंडिया के एडिटर राजीव दुबे का कहना है,

इसकी दो वजह हैं. स्लोडाउन की वजह से सरकार का टैक्स कलेक्शन घटा है. ग्रोथ हो रही है, लेकिन उस तेजी से ग्रोथ नहीं हो रही है जितना सरकार ने अनुमान लगाया था. उस घाटे को बढ़ने से रोकने के लिए सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ाती जा रही थी. दूसरा कोविड के समय में बिजनेस बंद होने से सरकार की कमाई घटी. उस घाटे के भरपाई के लिए भी सरकार पेट्रोल डीजल पर टैक्स बढ़ाती चली गई.

राजीव दुबे का कहना है कि सरकार ने अभी एक्साइज ड्यूटी कम की है. इसकी भरपाई जीएसटी से हो जाएगी, क्योंकि अभी जीएसटी कलेक्शन बढ़ रहा है. कोविड के समय यह कलेक्शन महीने का एक लाख करोड़ से कम था, लेकिन अक्टूबर के आए नए आंकड़े बताते हैं कि जीएसटी कलेक्शन एक लाख 30 हजार करोड़ को पार कर गया है. यह 2017 में जीएटी सिस्टम लागू होने के बाद अब तक का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है. अब देखना ये है कि सरकार पेट्रोल डीजल की महंगाई पर आम आदमी को और राहत देती है या नहीं.


पेट्रोल-डीज़ल के दामों ने जेट फ्यूल को भी पछाड़ा, दाम सुनकर लोग सन्न रह गए!

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