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अंग्रेज़ी दवाओं को लेकर रामदेव क्या झूठ बोले?

बात करेंगे रामदेव के दावों की. पतंजलि योगपीठ और पतंजलि आयुर्वेद नाम की संस्थाओं से जुड़े रामदेव. रामदेव का वीडियो कुछ दिनों पहले वायरल हुआ. इस वीडियो में रामदेव मंच पर बैठे हुए थे, हाथ में मोबाइल था. और रामदेव कह रहे थे कि किसी ने उन्हें कोई मैसेज फ़ॉर्वर्ड किया था. फिर रामदेव ने मैसेज पढ़ना शुरू किया,

“एलोपैथी ऐसी ग़ज़ब की स्टूपिड और दिवालिया साइंस है कि पहले हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन फ़ेल हुई, फिर रेमडेसिविर फ़ेल हुई, फिर इनके एंटीबायोटिक्स फ़ेल हो गए, फिर स्टेरॉयड फ़ेल हो गए,प्लाज़्मा थेरेपी पर भी बैन लग गया, आइवरमेक्टिन भी फ़ेल हो गया, बुखार के लिए दिया जाने वाला फ़ेविफलू भी फ़ेल है.”

इसके बाद रामदेव ने अपना मोबाइल नीचे रख दिया. और फिर अपनी व्यंग्यात्मक और परिहास की शैली में उन्होंने कहा कि जितनी भी दवाएँ दे रहे हैं, सब फ़ेल है. रामदेव ने कहा कि ये क्या तमाशा हो रहा है. जिस वजह से बुखार आ रहा है, तबीयत ख़राब हो रही है, उसका इलाज की सब दवाएं फ़ेल कर जा रही हैं. इसके बाद रामदेव ने कहा कि मैं जो कहने वाला हूँ, हो सकता है उस पर विवाद हो, लेकिन लाखों लोगों की मौत एलोपैथी की दवा खाने की वजह से हुई है. रामदेव ने दावा किया कि अस्पताल में बेड न मिलने और ऑक्सिजन न मिलने से हुई मौतों की संख्या बहुत कम है. इससे ज़्यादा संख्या में मौतें ऑक्सिजन मिलने और एलोपैथी की दवा मिलने के बाद हुई हैं. अभी लाखों लोगों की मौत का कारण एलोपैथी है. ध्यान दें कि इस समय रामदेव किसी मोबाइल में कोई मैसेज पढ़कर ये बात नहीं कह रहे थे. सामने बैठे लोगों को संबोधित कर रहे थे. अब इस वीडियो के सामने आने के बाद मोर्चा खोला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने. IMA ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा. कहा कि रामदेव के खिलाफ़ एक्शन लीजिए. IMA ने अपने बयान में कहा कि अभी तक 1200 से अधिक डॉक्टर कोरोना के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं. साथ ही कहा कि,

“ये आधुनिक ऐलोपैथी पर कीचड़ उछालने की कोशिश है. योगा गुरू ने कहा है कि ऐलोपैथी स्टुपिड और दिवालिया साइंस है. पहले वो आदरणीय स्वास्थ्य मंत्री की मौजूदगी में डॉक्टर्स को कातिल बोल चुके हैं जहां उन्होंने अपनी वंडर ड्रग पेश की थी. ये भी एक फैक्ट है कि योग गुरु और उनके सहयोगी बालकृष्ण बीमार होने पर खुद आधुनिक मेडिकल ऐलोपैथी ट्रीटमेंट ले चुके हैं. अब वह ऐसे दावे इसलिए कर रहे हैं ताकि अपनी दवाइयों को बेच सकें.”

IMA ने आगे कहा कि “DCGI द्वारा अप्रूव की गई रेमडेसिविर, फैबीफ्लू और अन्य दवाइयों को उन्होंने फेल बता दिया और कहा कि लाखों लोगों की मौत ऐलोपैथी की दवाई खाने से हुई है. ये बयान DCGI पर सवाल खड़े करता है जिसके मुखिया हमारे स्वास्थ्य मंत्री हैं. रेमडेसिविर और फैबीफ्लू CDSCO द्वारा भी अप्रूव हैं. बाबा रामदेव के खिलाफ महामारी एक्ट की धारा 188 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए.”

पतंजलि की सफ़ाई?

इधर मामले पर पतंजलि के संस्थापक आचार्य बालकृष्ण की ओर सफ़ाई आ गयी. कहा कि रामदेव मैसेज पढ़ रहे थे. लेकिन IMA के पत्र की गम्भीरता समझिए कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को सामने आकर रामदेव को पत्र लिखना पड़ा. उन्होंने पत्र में रामदेव से कहा कि आपने अपनी बातों से ना केवल कोरोना योद्धाओं का निरादार किया, बल्कि देशवासियों की भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचाई है. कल आपने जो स्पष्टीकरण जारी किया है वह लोगों की चोटिल भावनाओं पर मरहम लगाने में नाकाफी है. चिट्ठी के अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने लिखा कि पतंजलि के स्पष्टीकरण में सिर्फ इतना कहा गया है कि आपकी मंशा मॉडर्न साइंस और अच्छे डॉक्टरों के खिलाफ नहीं है. ये पर्याप्त नहीं है. आप गंभीरतापूर्वक इस पर विचार करते हुए और कोरोना योद्धाओं की भावना का सम्मान करते हुए अपने आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण वक्तव्य को पूर्ण रूप से वापस लें.

Harsh Wardhan
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन.

इसके बाद रामदेव ने एक पत्र लिखा और अपने बयान पर खेद जताया. इसके साथ उन्होंने एक और बात चिपका दी. कहा कि किसी भी चिकित्सा पद्धति की गलतियों को बताना उस पर हमले के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए. यह विज्ञान का विरोध नहीं है. लेकिन एलोपैथी डॉक्टरों को भी भारतीय चिकित्सा विज्ञान, आयुर्वेद और योग का निरादर नहीं करना चाहिए. इससे भी करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत होती हैं.

पूरे मसले में ये बात तो साफ़ कर ही देनी चाहिए कि रामदेव ने अपनी बात मोबाइल पर आए मैसेज को पढ़ने से शुरू की. लेकिन इसके ठीक बाद वो जिस तरह अपनी बातें भी इसमें जोड़ रहे थे, उससे सिर्फ़ मोबाइल के मैसेज वाली बात थोड़ी अपच लगती है. ये तो हालिया विवाद हो गया. लेकिन ये पहला मौक़ा नहीं है जब पतंजलि आयुर्वेद या रामदेव की ओर से मॉडर्न मेडिसिन, जिसको आम भाषा में एलोपैथी कहते हैं, और उसके डॉक्टरों का परिहास न उड़ाया गया हो, या उन्हें हीनतर साबित करने की कोशिश ना की गयी हो.

सबसे पहले कोरोनिल

पतंजलि ने जून 2020 में कोरोनिल लॉन्च किया था. उस समय इसे कोरोना वायरस संक्रमण की दवा बताया गया था. बाद में दवा पर जानकारों ने सवाल उठाए तो कंपनी ने इसे ‘इम्यूनिटी बूस्टर’ यानी रोगों के खिलाफ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने वाली दवा बताया था. 19 फरवरी 2021 को कोरोनिल रीलॉन्च हुआ. इस दौरान केंद्र सरकार के दो बड़े मंत्री नितिन गडकरी और हर्षवर्धन भी मौजूद थे. इस मौके पर पतंजलि की तरफ से कहा गया कि आयुष मंत्रालय से स्वीकृति प्राप्त कोरोनिल को कोविड-19 के इलाज में बतौर ‘सपोर्टिंग ड्रग’ इस्तेमाल किया जा सकता है. साथ ही रिसर्च पेपर भी लोगों के सामने रखा गया. जिसमें बताया गया कि पतंजलि ने दवा को किस तरह तैयार किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रिसर्च पेपर के आधार पर उत्तराखंड की सरकार ने पतंजलि को लाइसेंस जारी कर दिया और आयुष मंत्रालय ने भी दवा बेचने की इजाजत दे दी.

हालांकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया. मेडिकल एसोसिएशन ने प्रेस रिलीज जारी कर डॉ. हर्षवर्धन से पूछा,

‘देश के स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते (हर्षवर्धन का) इस तरह झूठे तरीके से गढ़े गए अवैज्ञानिक प्रोडक्ट को लोगों के लिए रिलीज करना कितना उचित है और अनैतिक, गलत और फर्जी तरीकों से प्रोडक्ट को प्रोमोट करना कितना नैतिक है? हमें बाजार में एकाधिकार रखने वाले कुछ कॉर्पोरेट को मुनाफा देने के लिए आयुर्वेद को भ्रष्ट नहीं करना चाहिए और मानवता के लिए संकट नहीं पैदा करना चाहिए’

नम्बर 2 : फिर आता है ऑक्सीजन की किल्लत का परिहास

जिस वक्त देश ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहा था. ऑक्सीजन के लिए पूरे देश में मारामारी मची हुई थी. हाई कोर्ट-सुप्रीम कोर्ट में रोज सुनवाई हो रही थी. अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से लोगों के मौत की खबरें आ रही थीं. दूसरे देशों से सहायता ली जा रही थी. उसी वक्त रामदेव का एक वीडियो वायरल हुआ. जिसमें वे ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे लोगों का मजाक बनाते नजर आ रहे थे. इस वीडियो में बाबा रामदेव कहते हैं,

ऑक्सीजन की कमी पड़ रखी है. अरे, भगवान ने सारा ब्रम्हांड भर रखा है ऑक्सीजन से. ले तो ले बावले, बाहर सिलेंडर खोज रहा है, तूने अपने अंदर दो सिलेंडर लगा रखे हैं. भर तो ले.

नाकों की ओर इशारा करते हुए रामदेव कहते हैं,

ये सिलेंडर हैं, भर.

इसके बाद तंज कसते हुए और हंसते हुए रामदेव कहते हैं,

सिलेंडर कम पड़ गए.

रामदेव दावा करते हैं कि ऐसे लोग जिनका ऑक्सीजन लेवल 70-80 तक आ गया था, मैंने भश्रिका, कपालभाति, अनुलोम-विलोम कराकर के 98-100 ऑक्सीजन लेवल एक घंटे में पहुंचा दिया.

नम्बर 3 : वैक्सीन के बाद हज़ार डॉक्टरों की मौत

बाबा रामदेव एक वायरल वीडियो में वैक्सीन और डॉक्टर्स दोनों का मजाक उड़ाते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो में हंसते हुए रामदेव कह रहे हैं,

1 हजार डॉक्टर कोरोना की डबल वैक्सीन लगवाने के बाद भी मर गए. अपने आप को ही न बचा पाए तो कैसी डॉक्टरी. अगर डॉक्टर बनना है तो स्वामी रामदेव जैसा बन, जिसके पास कोई डिग्री नहीं है लेकिन सबका डॉक्टर है.

पिछले साल कोरोना की वजह से 7 सौ से अधिक डॉक्टरों की मौत हुई थी. इस साल दूसरी लहर में चार सौ से अधिक डॉक्टरों की हुई. इनमें से अधिकतर डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हुए संक्रमित हुए. जिसकी वजह से उनका निधन हुआ. महामारी के इस कठिन दौर में डॉक्टर, नर्स और अन्य मेडिकल स्टाफ अपनी जान की परवाह किए बिना दिन रात लोगों के इलाज में लगे हुए हैं. कोरोना के खिलाफ लड़ाई में इन्हें फ्रंटलाइन वारियर कहा गया. यानी कि वो सैनिक जो युद्ध के दौरान पहली पंक्ति में सेना का नेतृत्व करती है. पिछले साल प्रधानमंत्री के आह्वान पर ताली-थाली बजाकर उनके प्रति कृतज्ञता भी जता चुके हैं. रामदेव इन्हीं फ्रंटलाइन वर्कर्स की शहादत का मजाक बनाते हुए इस वीडियो में दिख रहे हैं.

नम्बर 4 : तुलसी पत्र रेडिएशन

रामदेव के अवैज्ञानिक दावों की लिस्ट में एक दावा तुलसी पत्र और रेडिएशन को लेकर भी है. वीडियो पुराना है. रामदेव उडुपी में किसी शिविर को संबोधित करते हुए तुलसी पत्र से मोबाइल का रेडिएशन खत्म करने का दावा करते हैं. डेमो दिखाने के लिए वे मंच पर मौजूद दूसरे बाबा को एक हाथ में मोबाइल फोन पकड़ने के लिए कहते हैं. दूसरे हाथ को अपनी एक उंगली से जोर लगाकर नीचे ठेलते हैं. रामदेव दावा करते हैं कि हाथ नीचे इसलिए चला जा रहा है क्योंकि दूसरे हाथ में रेडिएशन वाला मोबाइल है.

इसके बाद वे मोबाइल फोन के कवर में तुलसी पत्ता रख देते हैं. अब वे दावा करते हैं कि मोबाइल फोन का रेडिएशन खत्म हो गया.

नम्बर 5 : एड्स और कैंसर का इलाज निकाल लेने का दवा.

पतंजलि योगपीठ की ओर से प्रकाशित होने वाली मैगजीन ‘योग संदेश’ के सितंबर 2006 के अंक में दावा किया गया था कि रामदेव ने एड्स और कैंसर जैसी बीमारियों को योग के जरिए ठीक किया है. DNA में छपी खबर के मुताबिक, पेज नंबर 55 पर रामदेव कहते हैं कि योग और प्रामायाम से 200 लोग ठीक हुए हैं और वे इसका सबूत देने के लिए तैयार हैं. प्राचीन विज्ञान एड्स के रोगियों के लिए भी लाभदायक है. इसको लेकर अभी प्रयोग चल रहा है. एक बार टेस्ट कम्प्लीट होने के बाद इसका औपचारिक ऐलान किया जाएगा.

नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने बाबा रामदेव के इस बयान को खारिज करते हुए उसी समय एक प्रेस रिलीज जारी किया था और इसे गुमराह करने वाला बयान बताया था. एड्स की ही तरह योग से कैंसर के इलाज वाले दावे को भी डॉक्टरों ने खारिज कर दिया था.

और दावा नम्बर 6 : बेटा पैदा करने की दवा

2015 में पतंजलि के ‘दिव्य पुत्रजीवक बीज’ नाम के प्रोडक्ट पर खूब बवाल मचा. पतंजिल पर आरोप लगा कि ये दवा इस दावे के साथ बेची जाती है कि इसे खाने से बेटा पैदा होगा. हालांकि इस प्रोडक्ट पर ऐसा कुछ नहीं लिखा था लेकिन इसका नाम पुत्रजीवक होने की वजह से इस पर काफी सवाल उठे. मीडिया से बात करते हुए पतंजलि स्टोर चलाने वालों ने भी दावा किया कि अधिकतर लोग बेटे की चाह में ही इस दवा को खरीदते हैं.

अप्रैल 2015 में जदयू सांसद केसी त्यागी ने राज्यसभा में इस दवा पर सवाल उठाए थे. जिसके बाद सदन में काफी हंगामा भी हुआ था. बाद में पतंजलि की ओर से सफाई आई. जिसमें कहा गया कि पुत्रजीवक बीज संतान प्राप्ति में सहायक है. इसका लिंग निर्धारण से कोई लेना-देना नहीं है.

लेकिन पतंजलि या रामदेव पर ही इन अनदेखियों का ठीकरा नहीं फोड़ा जा सकता है. हमने आपको बताया का इस साल फ़रवरी के महीने में जब रामदेव ने कोरोनिल को कोरोना की दवा बताकर लॉंच किया था, उस समय उनके साथ मंच पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्ष वर्धन ख़ुद मौजूद थे. ख़बरों के मुताबिक़, इस मौक़े पर हर्ष वर्धन ने कहा था, “आयुर्वेद का भारत में 30 हज़ार करोड़ का बाज़ार है. कोविड के पहले आयुर्वेद के बाज़ार में 15-20 प्रतिशत के बढ़त देखी जाती थी, लेकिन कोविड के बाद 50 से 90 प्रतिशत की बढ़त देखी गयी है. इसका मतलब है कि लोग आयुर्वेद को स्वीकार कर रहे है.” इस दवा को सामने लाते वक़्त भी रामदेव ने दावा किया था कि कोरोनिल को WHO द्वारा मान्यता प्राप्त है. लेकिन इस मामले पर WHO का ट्वीट सामने आ गया था. उन्होंने कहा था कि उन्होंने ऐसी किसी दवा को मान्यता नहीं दी है.

लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ही नहीं, सवाल आयुष मंत्रालय पर भी उठाए जाते हैं. बीते कुछ समय में आयुष मंत्रालय ने कुछ आयुर्वेदिक दवाओं को लेकर भी कई दावे किए.

जनवरी 2020 में आयुष मंत्रालय की ओर से होम्योपैथी दवा आर्सेनिकम एल्बम 30 को संक्रमण रोकने के लिए रोगनिरोधी दवा के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह दी गई. आयुष मंत्रालय के इस दावे की फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज ने जांच की. जिसमें ऑल्ट न्यूज को ऐसा कोई भी अध्ययन नहीं मिला जो कोरोनावायरस संक्रमण में किसी भी होम्योपैथी दवा की प्रभावकारिता से जुड़ा हो. साथ ही ऐसा कोई अध्ययन भी नहीं मिला जिसमें मनुष्यों या जानवरों में कोरोना वायरस के लिए आर्सेनिकम एल्बम के प्रभाव पर शोध किया गया हो.

 

रामदेव और पतंजलि से चलते हैं IMA. इस पूरे मामले IMA ने पत्रों के माध्यम से खुलकर अपनी प्रतिक्रियाओं को ज़ाहिर किया है. हमसे बातचीत में IMA के पदाधिकारी रह चुके लोग कहते हैं कि इस तरह की बयानबाज़ी से लगातार काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों का मॉरल कम होने का ख़तरा बना रहता है.

इस पूरे प्रकरण पर हमने पतंजलि और रामदेव का पक्ष जानने की कोशिश की. हमने प्रवक्ता को सवाल पूछे.जवाब का इंतज़ार हम अभी तक कर रहे हैं. जवाब आता है तो हम आपको ज़रूर बतायेंगे. लेकिन अथक रूप से हमारी और आपकी जान बचाने में लगे हुए स्वास्थ्यकर्मियों का उत्साह किस वजह से भी कम होता है, तो उस वजह को आंकने की ज़रूरत है. अक्सर तर्कों को राष्ट्रवाद और स्वदेशी का जामा पहना दिया जाता है, लेकिन विज्ञान रीसर्च के आधार पर चलता है. किसी तर्क या किसी आरोप के आधार पर नहीं. हम विज्ञान और वैज्ञानिक चेतना का पूरा सम्मान करते हैं, तो योग और आयुर्वेद की तमाम वैज्ञानिक पद्धतियों का भी. बात बस अपने देश के लाखों डॉक्टरों की है, जो करोड़ों लोगों की जान बचाने में अथक लगे हुए हैं. आप अपना और अपनों का ख़याल रखिए.


विडियो- रामदेव के एलोपैथी वाले बयान डॉक्टरों के भड़कने की वजह ये थी

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