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PM मोदी ने अपने संबोधन में 'वयं राष्ट्रे जागृयाम...' कहा, लेकिन इसके मायने क्या हैं?

देशभर की नजरें पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन पर टिकी थीं. हर कोई जानना चाहता था कि लॉकडाउन कब तक चलेगा, कहां-कहां छूट मिल सकती है. पीएम मोदी ने कई जरूरी बातें बताईं. साथ ही अंत में यजुर्वेद का एक सूक्त बोला, ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम…’ ऐसे में हमने ये तलाशने की कोशिश की कि आखिर यजुर्वेद के इस सूक्त का पीएम मोदी या मौजूदा हालात से क्या ताल्लुक है.

यजुर्वेद में कहां पर है सूक्त

यजुर्वेद के नौवें अध्याय का 23वां सूक्त. पूरा इस तरह है, ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः‘. लेकिन पीएम मोदी ने अपने संबोधन में ‘पुरोहित’ शब्द नहीं कहा.

सूक्त का अर्थ क्या है

‘वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः’ का शाब्दिक अर्थ है, ‘हम पुरोहित राष्ट्र को जाग्रत बनाए रखेंगे.’

अब ‘पुरोहित’ का मतलब समझ लें

‘पुरोहित’ शब्द कैसे बना? इसकी उत्पत्ति को कई तरीके से बताया गया है. भारतीय समाज में आम तौर पर पुरोहित वो कहलाते हैं, जो धार्मिक क्रिया-कलाप और कर्मकांड आदि करवाते हैं. लेकिन इस मूल शब्द का बड़ा व्यापक अर्थ है. जानकार इसे अलग-अलग तरीके से बताते हैं. एक मत है कि ये पुरस् + हित से बना. पुरस् शब्द पूर्व से बना है, जिसका अर्थ है पहले से, सामने की ओर. हित का मतलब है भलाई. इस तरह पुरोहित का अर्थ हुआ- सामने खड़ा रहनेवाला. भलाई के लिए सदैव तत्पर.

कुछ इसे पुरः + हित से बना शब्द बताते हैं. बड़े नजरिए से देखें, तो इसका अर्थ है- पूरे समाज का हित सोचने-देखने समझने वाला.

खास बात ये है कि ‘सुश्रुत संहिता’ में पुरोहित को वैद्य से भी श्रेष्ठ बताया गया है. इसलिए कि वैद्य केवल रोग और उसका उपचार जानता है, जबकि पुरोहित समूचे ‘पुर’ के हित के लिए काम करता है.

अब मोदी की बात की चीर-फाड़

हालांकि ‘पुरोहित’ शब्द के तमाम मतलब सकारात्मक ही हैं, इसके बावजूद पीएम मोदी ने इस शब्द को बोलने से परहेज किया. वो ‘पुरोहित’ कहते, फिर जाति के आधार पर इसके तरह-तरह के मनगढ़ंत मायने बताए जाते. शायद यही बड़ी वजह रही होगी, उस सूक्त से एक शब्द कम बोलने की.

सूक्त के शुरुआती शब्दों का मतलब साफ ही है- हम राष्ट्र को जगाए रखेंगे. इस ‘हम’ के दो अर्थ हो सकते हैं. एक तो ये कि संकट के इस दौर में ‘मुझ’ (पुरोहित) पर राष्ट्र के लिए नीतियां बनाने और उसे लागू करने का दारोमदार है. कोरोना संकट के दौर में हमें इसकी पूरी फिक्र है.

‘हम’ का दूसरा मतलब हो सकता है- ‘हम भारत के लोग’. फर्क यही है कि संविधान की प्रस्तावना में ‘हम’ के आगे ‘भारत के लोग’ लिखा है. लेकिन यहां यजुर्वेद के सूक्त में एडिट करने की ज्यादा गुंजाइश नहीं बच रही होगी.

तो अब समझने को क्या रह गया?

देश-दुनिया को कोरोना वायरस के संकट का सामना करना पड़ रहा है. वैक्सीन तो अब तक बनी नहीं. ऐसे में जागरूकता और सावधानी ही उपाय हैं वायरस से बचने के. एक देश के स्तर पर सबसे कारगर उपाय है सोशल डिस्टेंसिंग. लॉकडाउन भी इसी की खातिर किए जा रहे हैं.

मतलब, पीएम मोदी के ‘हम’ का मतलब चाहे जो हो, हम सतर्क रहें, चौकन्ने रहें. बाकी जब पीएम को लगेगा, तो वो एक बार फिर हमें जगा देंगे. आज की तरह.


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