Submit your post

Follow Us

घर बुलाकर पीएम मोदी ने कश्मीरी नेताओं से क्या कहा?

बड़ी खबर की शुरुआत इस तस्वीर से. एक फ्रेम में प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ जम्मू कश्मीर के नेता. काल के चक्र को घूमकर इस तस्वीर तक पहुंचने में दो साल लग गए. 5 अगस्त 2019 के फैसले से उपजी तल्खी के बाद पहली बार जम्मू कश्मीर के नेताओं ने पीएम मोदी से मुलाकात की. और हम जानते हैं कि जम्मू कश्मीर के मौजूदा हालात के बीच ये बैठक कितनी अहम है. सारे हिस्सेदारों के अलग अलग स्टैंड हैं और उनके बीच ये मीटिंग हो रही थी. एक तरफ गुपकार अलायंस की पार्टियां हैं जो 5 अगस्त 2019 से पहले की स्थिति जम्मू कश्मीर में चाहती हैं. फिर कांग्रेस है जिसकी सबसे बड़ी मांग पूर्ण राज्य का दर्जा है. और केंद्र सरकार अपना स्टैंड पहले ही साफ कर चुकी थी कि पीछे जाने को कोई सवाल ही नहीं उठता. इसलिए टीवी चैनलों पर दिन की शुरुआत इस सवाल से हुई कि अब कश्मीर में क्या होगा. दिनभर मीडिया के कैमरे जम्मू कश्मीर नंबर की गाड़ियों का पीछा करते रहे. ये भांपने के लिए कि मीटिंग में क्या होने वाला है. लेकिन मीटिंग से पहले जम्मू कश्मीर के नेताओं ने ज्यादा कुछ नहीं कहा.

पीएम से मीटिंग के पहले पार्टियों की भी इंटरनल मीटिंग्स चलती रही. प्रधानमंत्री से मिलने से पहले जम्मू कश्मीर बीजेपी के नेताओं ने पार्टी हेडक्वार्टर जाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से चर्चा की. कांग्रेस के नेताओं की चर्चा गुलाम नबी आज़ाद के निवास पर चली. इसी तरह सूत्रों से खबर आई कि गृह मंत्री अमित शाह ने भी जम्मू कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा और एनएसए अजीत डोभाल के साथ चर्चा की.

दिल्ली में बैठक की तैयारी चल रही थी और जम्मू में बैठक के खिलाफ प्रदर्शन. डोगरा फ्रंट के कार्यकर्ता महबूबा मुफ्ती को बैठक में शामिल करने का विरोध कर रहे थे. महबूब मुफ्ती ने कश्मीर पर भारत को पाकिस्तान से बात करने की सलाह दी थी, इस पर डोगरा फ्रंट की नाराज़गी थी. डोगरा फ्रंट के अलावा ”एकजुट जम्मू” नाम के संगठन ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. इनकी नाराज़गी ये थी कि बैठक में गुपकार अलायंस की पार्टियों को बुलाकर सिर्फ कश्मीर को ही तरज़ीह दी जा रही है, जम्मू की आवाज़ नज़रअंदाज़ की जा रही है. इनका कहना है कि जम्मू के संगठनों को भी बैठक में बुलाना चाहिए था. ऑल इंडिया कश्मीरी पंडित समाज ने भी विरोध प्रदर्शन किया. वही नाराज़गी, कि हमें क्यों नहीं पूछा मीटिंग के लिए.

वैसे बैठक के दावतनामे को देखकर लगता है कि सरकार चुनावी राजनीति में शामिल संगठनों से बात करना चाहती थी. न कि सांस्कृतिक या समाजसेवी संगठनों से. खैर, जिनको बुलाया गया था वो दोपहर में प्रधानमंत्री के 7 लोक कल्याण मार्ग पर आवास पर पहुंचे. 3 बजे से बैठक शुरू हुई. बैठक में प्रधानमंत्री के एक तरफ गृह मंत्री अमित शाह और दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर के उपराज्य पाल मनोज सिन्हा. और थे जम्मू कश्मीर के 14 राजनेता. ये 14 नेता कौन कौन थे?

नेशनल कॉन्फ्रेंस से डॉ फारूख़ अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला.
पीडीपी से महबूबा मुफ्ती.
पीपल्स कॉन्फ्रेंस से सजाद गनी लोन और मुज़फ्फर हुसैन बेग़.
कांग्रेस से गुलाम नबी आज़ाद, गुलाम अहमद मीर और ताराचंद.
अपनी पार्टी से अल्ताफ़ बुखारी.
बीजेपी से रवींद्र रैना, निर्मल सिंह और कवींद्र गुप्ता.
सीपीआईएम से यूसुफ तारीगामी.
नेशनल पैंथर्स पार्टी से प्रो. भीम सिंह.
इनके अलावा जम्मू कश्मीर से बीजेपी सांसद और मोदी सरकार में मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह भी बैठक में मौजूद थे.

बैठक के बाद नेताओं ने क्या कहा?

3 बजे शुरू हुई बैठक शाम साढ़े छह बजे तक चलती रही. प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा कि वो ये बैठक बहुत पहले बुला लेना चाहते थे. दिल्ली की दूरी और दिल की दूरी दूर होना ज़रूरी है. लेकिन कोरोना महामारी के चलते बात टलती रही. बैठक में चर्चा के दो बिंदुओं को लेकर बहुत कौतुहल था – चुनावी राजनीति के रास्ते लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली और पूर्ण राज्य का दर्जा. बैठक से बाहर आकर इन दोनों बातों को लेकर नेताओं ने अपनी बात रखी.

पीपल्स कॉन्फ्रेंस के मुज़फ्फर बेग ने कहा कि बैठक बहुत अच्छे माहौल में हुई. बेग की बात में एक बीच का रास्ता नज़र आता है. माने बिना अनुच्छेद 370 लागू किए भूमिपूत्रों के लिए ज़मीन और नौकरियों की सुरक्षा देना. जैसी व्यवस्थाएं संविधान के अनुच्छेद 371 में दूसरे राज्यों को मिली हुई हैं.

अपनी पार्टी के अल्ताफ बुखारी ने कहा कि गृहमंत्री ने विकास कार्यों का जायज़ा दिया और प्रधानमंत्री ने तसल्ली से सबको सुना. ग़ुलाम नबी आज़ाद ने पूर्ण राज्य के दर्जे और कश्मीरी पंडितों की वापसी पर बात की. भाजपा नेता निर्मल सिंह ने भी बैठक को लेकर अपनी बात रखी.

PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि,

मैंने बैठक में प्रधानमंत्री की प्रशंसा की और कहा कि आपने पाकिस्तान से बात कर सीज़फायर करवाया. घुसपैठ कम हुई यह अच्छी बात है. उन्होंने बताया कि मैंने पीएम से कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को पाकिस्तान से बात करने पर सुकून मिलता है तो आपको पाकिस्तान से बात करनी चाहिए.

महबूबा ने आगे बताया-

मैंने बैठक में पीएम मोदी से कहा कि अगर आपको धारा 370 को हटाना था तो आपको जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को बुलाकर इसे हटाना चाहिए था. इसे गैरकानूनी तरीके से हटाने का कोई हक नहीं था. हम धारा 370 को संवैधानिक और क़ानूनी तरीके से बहाल करना चाहते हैं.

NC नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हमने बैठक में कहा कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार के द्वारा 370 को ख़त्म करने के फ़ैसले को हम स्वीकार नहीं करेंगे. हम अदालत के जरिए 370 के मामले पर अपनी लड़ाई लड़ेंगे. लोग चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण रूप से राज्य का दर्ज़ा दिया जाए. प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक में कहा कि हम चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्ज़ा जल्द से जल्द मिले और वहां पर चुनाव भी जल्द से जल्द करवाए जाएं.

इन बयानों के आधार पर हम मीटिंग को डिकोड करने की कोशिश करते हैं

मीटिंग में नेताओं का एक धड़ा वो था जिसने अनुच्छेद 370 का ज़िक्र नहीं किया. इसमें बीजेपी, कांग्रेस के अलावा अल्ताफ बुखारी की अपनी पार्टी और सजाद लोन की पीपल्स कॉन्फ्रेंस भी शामिल हैं. इन पार्टियों का रुख ये रहा कि मामला न्यायालय में विचारधीन है. इसलिए फैसले का इंतज़ार कर लिया जाना चाहिए. यानी बैठक में अनुच्छेद 370 कोई बड़ा मुद्दा नहीं रहा. उमर ने भी प्रेस को दिए अपने बयान में ये ज़रूर कहा कि वो 5 अगस्त 2019 को नहीं मानते, और उसमें विशेष दर्जे और पूर्ववर्ती राज्य के बंटवारे का ज़िक्र भी किया. लेकिन उन्होंने इस बात को ज़्यादा तूल नहीं दिया. हां उन्होंने ये ज़रूर रेखांकित किया कि परिसीमन को लेकर वो बहुत सहज नहीं हैं.

महबूबा ने ज़रूर अनुच्छेद 370 की मांग ज़ोरशोर से उठाई. और ये भी कहा कि पाकिस्तान से बात होनी चाहिए. लेकिन उनके जितनी मुखरता और किसी ने नहीं दिखाई और महबूबा ने भी ढेर सारी मांगों के बीच इन दो बिंदुओं का ज़िक्र किया. ऐसा लगता नहीं कि इस बात को लेकर बैठक में कोई खास हलचल पैदा हुई होगी.

तो बैठक के दो ही बड़े मुद्दे रहे – विधानसभा चुनाव और राज्य का दर्जा. विधानसभा चुनाव कब होगा, इसके जवाब में सरकार ने कहा कि जब परिसीमन पूरा हो जाएगा. परिसीमन कब पूरा होगा ये सरकार तय नहीं कर सकती, परिसीमन आयोग को तय करना है. यानी इसकी भी सरकार को डेडलाइन देने की ज़रूरत नहीं पड़ी. और राज्य के दर्जा देने पर भी सरकार के पास कहने को ये है कि जब विधानसभा चुनाव हो जाएगा तो स्टेटहुड पर विचार होगा. माने सरकार ने एक तरह से एक लकीर खींच दी. कि परिसीमन होगा, फिर चुनाव होंगे और पूर्ण राज्य के दर्जे पर विचार भी किया जाएगा. लेकिन 5 अगस्त 2019 से पहले की स्थिति की कल्पना बेकार है. इस सच्चाई को समझते हुए घाटी के दलों ने भी अपना रुख कुछ नर्म किया है.

तो चुनाव से पहले बात आती है परिसीमन की

परिसीमन का पेच क्या है, ये भी समझते हैं. परिसीमन, विधानसभा या लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव की प्रक्रिया है, अंग्रेज़ी में डिलिमिटेशन कहते हैं. जनगणना के आंकड़ों के हिसाब से समय समय पर परिसीमन होता रहता है. मकसद ये होता है कि हर सीट लगभग बराबर आबादी का प्रतिनिधित्व करे. परिसीमन में निर्वाचन क्षेत्र के एरिया में बदलाव किया जाता है या कई बार सीटें भी बढ़ाई जाती हैं. इसके लिए एक परिसीमन आयोग बनता है जो नए निर्वाचन क्षेत्रों का नक्शा तैयार करता है. तो देश के बाकी राज्यों की तरह जम्मू कश्मीर में भी परिसीमन होता पहले से होता आया है, हालांकि ये बाकी राज्यों से थोड़ा अलग तरह से होता था. क्योंकि जम्मू कश्मीर भी बाकी राज्यों से थोड़ा अलग था, विशेष राज्य का दर्जा था. लोकसभा सीटों का परिसीमन भारत के संविधान के हिसाब से होता था और विधानसभा सीटों का परिसीमन जम्मू कश्मीर के संविधान और स्टेट लॉज़ के हिसाब से होता था.

विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन जम्मू कश्मीर में आखिरी बार 1995 में हुआ था. ये परिसीमन 1981 की जनगणना के आधार पर था. क्योंकि 1991 में उग्रवाद की वजह से जम्मू कश्मीर में जनगणना हो ही नहीं पाई थी. इसके बाद जम्मू कश्मीर में विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन नहीं हुआ. बाद में जम्मू कश्मीर विधानसभा ने परिसीमन को 2026 तक रोक दिया. यानी अभी जम्मू कश्मीर में 1981 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्र बंटे हुए हैं.

5 अगस्त 2019 से पहले के जम्मू कश्मीर राज्य में विधानसभा की 87 सीट थी. जम्मू संभाग में 37, कश्मीर में 46 और लद्दाख में 4. इसके अलावा पीओके के लिए 24 सीटें रिजर्व थीं. लद्दाख को अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद जम्मू कश्मीर में विधानसभा की 114 सीटें रखी गई हैं जिसमें 24 सीटें पीओके वाली भी शामिल हैं. सीटें बढ़ाई गई हैं मतलब परिसीमन ज़रूरी है. और अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया तो अब जम्मू कश्मीर विधानसभा का परिसीमन भी भारतीय संविधान के हिसाब से ही होगा. इसके लिए 6 मार्च 2020 को सरकार ने परिसीमन आयोग का गठन किया. सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई परिसीमन आयोग की अध्यक्ष हैं. इलेक्शन कमीशनर सुशील चंद्रा और जम्मू कश्मीर के इलेक्शन कमीशनर केके शर्मा इसके पदेश रूप से सदस्य हैं. परिसीमन आयोग में चुने हुए प्रतिनिधि भी शामिल किए जाते हैं. जम्मू कश्मीर के पांचों सांसद परिसीमन आयोग के सदस्य हैं. इसमें तीन नेशनल कॉन्फ्रेंस के हैं – फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी और अकबर लोन. इसके अलावा बीजेपी से डॉ जीतेंद्र सिंह और जुगल किशोर शर्मा.

परिसीमन आयोग को एक साल का वक्त दिया गया था. लेकिन कोरोना की वजह से ज्यादा काम हो नहीं पाया और अब इसे 1 साल का एक्सटेंशन दिया गया है. बुधवार को ही खबर आई थी कि परिसीमन आयोग ने जम्मू कश्मीर के सभी जिला अधिकारियों के साथ मीटिंग की है, उनसे आबादी और एरिया का डेटा मांगा है, लोगों के किस तरह के मुद्दे हैं, क्या परेशानियां हैं इसकी जानकारी मांगी है. इसके बाद परिसीमन आयोग एक एक करके राजनीतिक पार्टियों से भी बात करेगा. अभी तक नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद परिसीमन आयोग की बैठकों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस का ये स्टैंड 24 वाली मीटिंग से पहले का है. अब हो सकता है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस परिसीमन में सहयोग करे.

परिसीमन में जम्मू क्षेत्र की सीटें बढ़ जाएगी?

परिसीमन में ये भी हो सकता है कि जम्मू रीजन और कश्मीर रीजन की सीटें लगभग बराबर हो जाएं. जम्मू रीजन की हमेशा से शिकायत रही है कि उनका विधानसभा में प्रतिनिधित्व कम होता है. बीजेपी का भी जम्मू रीजन की सीटें बढ़ाने पर ज़ोर रहा है. इसीलिए बीजेपी का परिसीमन पर भी ज़ोर रहा है. जम्मू कश्मीर में सीटें बढ़ाई भी गई हैं, अब ये देखना है कि सीटें किस तरफ ज़्यादा बढ़ती हैं. बीजेपी जम्मू बेस्ड पार्टी है इसलिए जम्मू की सीटें बढ़ने से बीजेपी अपना सीएम बनाने का सपना देख सकती है.

तो परिसीमन को लेकर ये कैलकुलेशन चल रही है. हालांकि परिसीमन का काम पूरा होने अभी वक्त लगेगा. परिसीमन आयोग एक बार पूरा मसौदा तैयार कर लेगा तो उसे जनता के सुझाव और आपत्तियों के लिए सार्वजनिक किया जाएगा. फिर उन सुझावों, आपत्तियों और जनता की शिकायतों को ध्यान में रखकर परिसीमन को अंतिम रूप दिया जाएगा. फिर विधान सभा क्षेत्रवार मतदाता सूची अपडेट की जाएगी. दिवंगत मतदाताओं के नाम हटाना और नए मतदाताओं के नाम जोड़कर फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित की जाएगी. इस पूरी प्रक्रिया में लंबा वक्त लग सकता है.

तो परिसीमन होगा, विधानसभा का चुनाव होगा और राज्य का दर्जा भी वापस मिलेगा. ऐसे कई चरण अभी जम्मू कश्मीर के भविष्य के साथ जुड़े होंगे. आज की प्रधानमंत्री के साथ बैठक इस तरफ एक कदम है. उम्मीद है ऐसी और भी बैठक होती रहेंगी. होनी भी चाहिए. पूरे देश की तरफ जम्मू कश्मीर में भी लोकतंत्र फलना फूलना चाहिए. पार्टी कोई भी हो, किसी भी चिन्ह के साथ हो, मुख्यमंत्री कोई भी बने, ये मायने नहीं रखता, ज़रूरी ये है कि जम्मू कश्मीर में भी आवाम का चुना हुआ मुख्यमंत्री हो.


विडियो- जम्मू-कश्मीर में सभी पार्टी के नेताओं के साथ PM मोदी की होने वाली बैठक पर मुफ्ती ने क्या कहा?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

आन्हां, ऐसे नहीं कि योग बस किए, दिखाना पड़ेगा कि बुद्धिबल कित्ता बढ़ा.

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

जब ट्रेलर आया था, तबसे लगातार विरोध जारी है.

माधुरी से डायरेक्ट बोलो 'हम आपके हैं फैन'

आज जानते हो किसका हैप्पी बड्डे है? माधुरी दीक्षित का. अपन आपका फैन मीटर जांचेंगे. ये क्विज खेलो.

जिन मीम्स को सोशल मीडिया पर शेयर कर चौड़े होते हैं, उनका इतिहास तो जान लीजिए

कौन सा था वो पहला मीम जो इत्तेफाक से दुनिया में आया?

पार्टियों को चुनाव निशान के आधार पर पहचानते हैं आप?

चुनावी माहौल में क्विज़ खेलिए और बताइए कितना स्कोर हुआ.

लगातार दो फिफ्टी मारने वाले कोहली ने अब कहां झंडे गाड़ दिए?

राहुल के साथ यहां भी गड़बड़ हो गई.

रोहित शेट्टी के ऊपर ऐसी कड़क Quiz और कहां पाओगे?

14 मार्च को बड्डे होता है. ये तो सब जानते हैं, और क्या जानते हो आके बताओ. अरे आओ तो.

आमिर पर अगर ये क्विज़ नहीं खेला तो दोगुना लगान देना पड़ेगा

म्हारा आमिर, सारुक-सलमान से कम है के?

परफेक्शनिस्ट आमिर पर क्विज़ खेलो और साबित करो कितने जाबड़ फैन हो

आज आमिर खान का हैप्पी बड्डे है. कित्ता मालूम है उनके बारे में?

अनुपम खेर को ट्विटर और वॉट्सऐप वीडियो के अलावा भी ध्यान से देखा है तो ये क्विज खेलो

चेक करो अनुपम खेर पर अपना ज्ञान.