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इटली के दो नौसैनिकों पर दो मछुआरों की हत्या के मामले में क्या भारत की वाक़ई जीत हुई है?

साल 2012 में केरल के दो मछुआरों की हत्या हुई. ये किसी अखबार की छोटी सी खबर लगती है. लेकिन ये फ्रंट पेज की खबर बनी. क्योंकि इस ह्त्या का आरोप इटली के दो नौसैनिकों पर था. इस मामले की सुनवाई इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल में चल रही थी. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत ने इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल में इतालवी नौसैनिकों का मुकदमा जीत लिया है. मगर एक ज़रूरी सवाल यहां पूछा जाना ज़रूरी है. कि इस जीत की परिभाषा क्या है. पूरा मामला और फ़िलहाल आए फैसले को समझेंगे ‘आसान भाषा में’.

दोनों मरीन्स पर भारत में मुक़दमा शुरू हुआ था. तस्वीर इंडिया टुडे
दोनों मरीन्स पर भारत में मुक़दमा शुरू हुआ था. तस्वीर इंडिया टुडे

# क्या हुआ था?

15 फरवरी 2012 को शाम 4 बजकर 30 मिनट पर भारतीय मछुआरों की एक नाव पर दो मिनट तक गोलियां चलीं. जिस जहाज़ की तरफ़ से गोलीबारी हुई उसका नाम था ‘एनरिका लेक्सी’. ये एक क़ारोबारी जहाज़ था. जिस पर इटली का झंडा लगा हुआ था. ये जहाज़ सिंगापुर से इजिप्ट जा रहा था जिसपर 34 लोग सवार थे. इनमें इटली नौसेना के 6 जवान भी शामिल थे. जिन्हें जहाज़ की सुरक्षा के लिए इटली की नौसेना ने तैनात किया था. भारतीय मछुआरों की नाव जिसका नाम ‘सेंट एंटनी’ था, उसके मालिक फ्रेडी लुईस ने बताया कि बिना किसी चेतावनी के उनपर गोली चलाई गई. फ्रेडी की नाव पर केरल के दो मछुआरों की इस गोलीबारी में मौत हो गई. भारतीय नौसेना ने क़ारोबारी जहाज़ एनरिका लेक्सी को लक्षद्वीप में रोक लिया और अपने साथ कोच्ची बंदरगाह ले आए. दो इतावली मरीन सैनिकों मैसिमिलिआनो लातोरे और साल्वातोर जिरोने पर गोली चलाने का आरोप तय हुआ. दोनों ने कहा कि उन्होंने समुद्री डकैत मानकर उस नाव पर गोली चलाई थी.

इसके तुरंत बाद इटली के विदेश मंत्री गुइलो तेरज़ी ने इतावली मीडिया को बताया कि क़ारोबारी जहाज़ एनरिका लेक्सी को भारतीय जलसीमा में ये कहकर ले जाया गया कि उन्हें समुद्री अपराध की छानबीन करनी है. जो कि स्थानीय पुलिस का धोखा था. 30 मार्च को भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से सलमान खुर्शीद ने किसी भी तरह के धोखे की बात से इंकार कर दिया. दोनों मरीन सैनिकों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाई थी फ्रेडी लुईस ने.

मरीन्स के भारत में रहने के दौरान दुनिया भर में ख़ूब बीच बचाव बहस हुई. तस्वीर इंडिया टुडे
मरीन्स के भारत में रहने के दौरान दुनिया भर में ख़ूब बीच बचाव बहस हुई. तस्वीर इंडिया टुडे

# आगे क्या हुआ?

– जिन दो इतावली मरीन सैनिकों मैसिमिलिआनो लातोरे और साल्वातोर गिरोने पर गोली चलाने का आरोप था उनपर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का मुक़दमा दर्ज किया गया.

-इस बीच दोनों सैनिकों को इटली में होने वाले आम चुनावों में वोट डालने के लिए सशर्त ज़मानत पर इटली भेजा गया. मगर जनवरी 2013 से इटली दोनों सैनिकों को भारत वापस भेजने में हीला-हवाली करने लगा.

– फिर अचानक इटली ने कहा कि सैनिक तभी भेजे जाएंगे जब भारत इस बात की गारंटी दे कि दोनों सैनिकों को मौत की सज़ा नहीं दी जाएगी. इस पर भारत ने कूटनीतिक दबाव डालना शुरू किया. इटली के भारत में राजदूत को देश छोड़कर जाने पर रोक लगा दी गई.

-दोनों तरफ से भरपूर कूटनीतिक चालों के बाद दोनों मरीन सैनिक आख़िरकार 22 मार्च 2013 को भारत आए. इसपर इटली के विदेश मंत्री ने सरकार से असहमति के चलते इस्तीफ़ा तक दे दिया. जिसके बाद इतालवी मीडिया में खूब बवाल हुआ.

इटली में दोनों मरीन्स के भारत लौटने का भयानक विरोध हुआ था. तस्वीर इंडिया टुडे
इटली में दोनों मरीन्स के भारत लौटने का भयानक विरोध हुआ था. तस्वीर इंडिया टुडे

# मुकदमा और उसके बाद

– दिल्ली हाईकोर्ट ने 24 मार्च 2013 को पटियाला हाउस कोर्ट में मुक़दमा चलाने का आदेश दिया.

– अप्रैल 2013 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दोनों नौसैनिकों के ख़िलाफ़ FIR पेश की जिसमें हत्या, हत्या का प्रयास, और साज़िशन हत्या के आरोप लगाए गए. जनवरी 2014 में भारत ने ‘कन्वेंशन फॉर द सप्रेशन ऑफ़ अनलॉफुल एक्ट अगेन्स्ट दी सेफ्टी ऑफ़ मैरीटाइम नैविगेशन’ के तहत मरीन्स पर मुक़दमा चलाने का फैसला किया. 1988 में ये क़ानून अंतर्राष्ट्रीय जलसीमा में आतंकवाद को रोकने के लिए बना था.

– इटली ने इस पर ये कहते हुए विरोध किया कि इस घटना की तुलना आतंकवाद से कैसे की जा सकती है? जबकि दोनों मरीन्स सेना की आधिकारिक ड्यूटी पर अंतर्राष्ट्रीय जलसीमा में मौजूद थे.

– इटली ने एक और तर्क दिया कि जिस दिन ये घटना हुई थी उसी दिन कोच्चि बंदरगाह से कुछ दूरी पर एक और जहाज़ समुद्री डकैती का शिकार हुआ था. इस वजह से इनके नौसैनिक सतर्क थे. हालांकि भारतीय कोस्ट गार्ड ने इसका जवाब देते हुए कहा कि अगर दुर्घटना में भी गोली चली तो उसे इंटरनैशनल मैरीटाइम ब्यूरो(IMB) या भारतीय कोस्ट गार्ड को रिपोर्ट क्यों नहीं किया गया. बिना रिपोर्ट किए ही एनरिका लेक्सी इजिप्ट के अपने रास्ते पर 70 किलोमीटर आगे क्यों चला गया.

ट्रिब्यूनल के निर्देशों पर कोर्ट प्रोसीडिंग रोकी गई थी. तस्वीर पीटीआई
ट्रिब्यूनल के निर्देशों पर कोर्ट प्रोसीडिंग रोकी गई थी. तस्वीर पीटीआई

# दुनिया का क्या कहना था?

– 11 फरवरी 2014 को संयुक्त राष्ट्र अध्यक्ष बान की मून ने कहा कि दोनों देशों को आपसी बातचीत से ये मामला सुलझाना चाहिए ना कि संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में. उनका कहना था कि अगर ये मामला सुलझाया नहीं गया तो दोनों देशों के संबंध तो खराब होंगे ही साथ ही अंतर्राष्ट्रीय जलसीमा में आतंकवाद के ख़िलाफ़ मुहीम भी बुरी तरह से प्रभावित होगी. क्योंकि ये मुद्दा एक बुरी मिसाल बनकर रह जाएगा.

– 10 फरवरी 2014 को यूरोपियन यूनियन की तरफ़ से कैथरीन ऐश्टन ने कहा कि दोनों मरीन्स को भारत आतंकवाद और समुद्री डकैती का आरोपी मानकर कार्रवाई करना चाहता है जिससे कि आतंकवाद और समुद्री डकैती से लड़ने की अंतर्राष्ट्रीय कोशिशों को बुरी तरह से झटका लगेगा.

– इस बीच मैसिमिलिआनो लातोरे को 31 अगस्त 2014 को ब्रेन स्ट्रोक हुआ. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 12 सितंबर 2014 को उसे चार महीने के लिए इटली जाने की इजाज़त दे दी. इटली में लातोरे की हार्ट सर्जरी के बाद कोर्ट ने चार महीने की समय सीमा और आगे बढ़ा दी.

– 21 जुलाई  2015 को इटली ये मामला ‘इंटरनैशनल ट्रिब्यूनल फॉर दी लॉ ऑफ़ दी सी’ के सामने ले गया. ट्रिब्यूनल ने ‘स्टेटस को’ जारी किया. माने कि स्थिति जस की तस बनी रहे सुनवाई पूरी होने तक.

– 24 अगस्त 2015 को ट्रिब्यूनल ने 15:6 से बहुमत से फ़ैसला किया कि ‘भारत और इटली इस केस में अपने-अपने यहां की अदालतों में जो भी प्रोसीडिंग्स हो रही हैं उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दें. इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने दोनों देशों से इस घटना की अपनी-अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा.

 

संयुक्त राष्ट्र का कहना था कि आपसदारी में मामला सुलझाओ. तस्वीर ANI
संयुक्त राष्ट्र का कहना था कि आपसदारी में मामला सुलझाओ. तस्वीर ANI

– 28 सितंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने लातोरे को तब तक अपने देश में रहने की इजाज़त दे दी जब तक कि अंतर्राष्ट्रीय आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल में भारत और इटली के बीच क्षेत्राधिकार का मामला निपट ना जाए.

– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लातोरे पर भी ज़मानत की वही शर्तें लागू मानी जाएंगी जो इससे पहले आरोपी मरीन सैनिक साल्वातोर जिरोने पर लगाई गई थीं. साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि हर तीन महीने के बाद केस की अंतर्राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल में क्या स्थिति है ये बताना होगा.

– साल्वातोर जिरोने को 26 मई 2016 को सशर्त ज़मानत मिल गई थी. तमाम शर्तों में ये भी शामिल था कि जिरोने इटली की पुलिस को हर महीने रिपोर्ट करेगा. और वो रिपोर्ट इंडिया में इटली के दूतावास को भेजी जाएगी. जिससे इंडिया के पास पहुंचेगी. साथ ही ये कि साल्वातोर जिरोने भारत के उच्चतम न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे.

– हालांकि इंटरनैशनल ट्रिब्यूनल की तरफ़ से ‘स्टेटस को’ जारी किए जाने के बाद दोनों मरीन्स के ख़िलाफ़ चलने वाली अदालती कार्यवाही रोक दी गई.

आख़िरकार दोनों मरीन्स पर फैसला आ गया. तस्वीर पीटीआई
आख़िरकार दोनों मरीन्स पर फैसला आ गया. तस्वीर पीटीआई

# और अब बात इंटरनैशनल ट्रिब्यूनल के फैसले की

– भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि ट्रिब्यूनल ने ये माना है कि इटली ने हमारे नेविगेशन क्षेत्र का उल्लंघन किया है.

– इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने इटली के उस दावे को भी खारिज़ कर दिया जिसमें वो भारत से उसके नौसैनिकों की गिरफ़्तारी का जुर्माना वसूलना चाहता था.

– जबकि इस फ़ैसले पर इटली के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ‘ट्रिब्यूनल ने ये बात मानी है कि इटली की आर्म्ड फ़ोर्स के सैनिक पर ड्यूटी निभाने की वजह से भारतीय कोर्ट उसपर कोई फ़ैसला नहीं ले सकती. जहां तक अधिकार क्षेत्र के उल्लंघन की बात है उसके लिए हम जुर्माना भरने को तैयार हैं.

तो लब्बोलुआब ये है कि दोनों मरीन्स अब भारत नहीं लौटेंगे. इटली के कोर्ट में उनपर केस चलेगा. और इंडिया के कोर्ट में उनका ट्रायल नहीं हो सकता क्योंकि वे इम्यून हैं. इंडिया को मुआवजा मिलेगा. अब ये भारत पर निर्भर करता है कि वो मुआवज़े को कैसी और कितनी बड़ी जीत मानता है.


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